अंशु के लिए माता-पिता ने नौकरी छोड़ी:दोनों ट्रेनिंग में साथ रहते हैं, मां को लेकर पेरिस भी पहुंचीं; आज कुश्ती लड़ेंगी

पेरिस ओलिंपिक से करीब 10 महीने पहले अंशु मलिक की एक फर्जी अश्लील वीडियो वायरल हुई। जब इस वीडियो के बारे में अंशु के पिता धर्मवीर को पता चला तो उन्होंने परिवार और अंशु को इसकी जानकारी नहीं दी। उन्होंने कोच से बातचीत कर इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। पिता को लगा कि अगर अंशु तो पता चलेगा तो उसकी पेरिस ओलिंपिक की तैयारी पर बुरा असर पड़ेगा। उस समय अंशु अपनी इंजरी का इलाज करवाने के लिए मां के साथ चेन्नई में थीं। कुछ दिन बाद जब अंशु को पता चला तो वीडियो का खंडन किया। अंशु मलिक ने कहा था, मेरा इस वीडियो से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद मुझ पर गंदे कॉमेंट्स किए जा रहे हैं। मैं किसी बड़ी साजिश का शिकार हुई हूं। मैं और मेरा परिवार सदमे से गुजर रहे हैं। अब अंशु पेरिस में 8 अगस्त को 57 किग्रा कैटेगरी में देश की ओर से चुनौती पेश करेंगी। हरियाणा की 22 साल की रेसलर अंशु मालिक लगातार दूसरी बार ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। भास्कर रिपोर्टर अंशु के घर पहुंचे। अंशु के घर से ग्राउंड रिपोर्ट… कोच बोले- सभी को अंशु पर विश्वास था
भास्कर रिपोर्टर ने अंशु के कोच अजय ढांडा से बातचीत की। ढांडा ने कहा, “अंशु पिछले तीन साल से शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल रेसलिंग एकेडमी में अपने परिवार के साथ रहती हैं। उसके माता-पिता और भाई भी एकेडमी में रूम लेकर रहते हैं। वहीं इससे पहले वह अपने गांव से यहां प्रैक्टिस करने के लिए आती थी।” ओलिंपिक से कुछ महीने पहले अंशु का फेक वीडियो वायरल होने पर वह कहते हैं, “परिवार और मुझे अंशु पर पूरा भरोसा था। गलत चीजों के आने से कहीं न कहीं मानसिकता पर असर तो पड़ता है। हमने अंशु से यही कहा कि आप अपना पूरा फोकस कुश्ती की ट्रेनिंग पर लगाओ। समाज में घटिया मानसिकता के लोग हैं, उनसे परेशान होने की जरूरत नहीं है। शरारती लोगों ने एडिंटिंग कर उसका गलत वीडियो वायरल किया था। पुलिस ने उन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने बताया कि उसने फेमस होने के लिए ऐसा किया था।” अंशु ने प्रैक्टिस से कभी मना नहीं किया
कोच कहते हैं, “अंशु ने कभी भी प्रैक्टिस से मना नहीं किया और उसको जो भी दांव बताया जाता था, उसे वह ध्यान से देखती और सीखती है। फोकस की वजह से ही वह ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर सकी।” अंशु पूरी तरह फिट
ढांडा ने कहा, “अंशु पूरी तरह फिट है। पिछले साल इंजरी हुई थी। उसने चेन्नई और बेंगलुरु में जाकर इलाज करवाया। चूंकि यहां पर फीजियो थेरेपिस्ट की कई मशीनें नहीं थीं, इसलिए उसे बाहर जाना पड़ा। मेरी हर दिन अंशु और उसके पापा से बातचीत होती है। मुझे पूरा भरोसा है कि अंशु देश के लिए मेडल जरूर जीतेगी।” माता-पिता दोनों ने छोड़ी नौकरी
अंशु की नानी बुगल देवी ने बताया, “अंशु के लिए उनकी मां मंजू ने टीचर की नौकरी छोड़ दी। मेरी बेटी मंजू एमए बीएड है। उसने प्राइवेट स्कूल में 10 साल तक टीचिंग की। जब अंशु बाहर जाने लगी तो मंजू ने नौकरी छोड़ दी। क्योंकि अंशु को बाहर का खाना खाने में दिक्कत होती है। इसलिए वह मंजू के साथ जाती है ताकि उसे घर का खाना मिल सके। अभी भी उसके साथ पेरिस गई है। अंशु के पिता धर्मवीर सीएसएफ में थे। जब अंशु और उसका भाई शुभम कुश्ती में बेहतर करने लगे और अंशु इंटरनेशनल में जाने लगी तो उसके पापा ने नौकरी छोड़ कर ट्रेनिंग पर फोकस किया” अंशु के दादा, ताऊ और पापा भी पहलवान
बुगल देवी ने बताया, “अंशु के दादा, ताऊ और पापा सभी पहलवान रहे हैं। इनके घर में शुरू से ही पहलवानी का माहौल रहा है। अंशु के पिता जूनियर लेवल पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं इनके ताऊ भी जूनियर लेवल पर हरियाणा और देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।” अंशु के भाई की तैयारी न रुके इसलिए नानी हॉस्टल में रह रहीं
बुगल देवी कहती हैं, “अंशु की तैयारी में दिक्कत न हो, इसलिए उसके मम्मी और पापा दोनों उसके साथ गए हैं। वहीं अंशु का भाई भी कुश्ती करता है। वह अकेला था और उसे घर का खाना मिले, इसलिए मैं हॉस्टल आकर रह रही हूं।” 11 साल की उम्र में अंशु ने शुरू की कुश्ती
अंशु का छोटा भाई शुभम ने बताया, “हमारे परिवार में शुरू से ही कुश्ती का माहौल है। जब मैं 9 साल का था तब से ही कुश्ती करना शुरू कर दिया। मुझे देखकर दीदी ने भी 11 साल की उम्र में कुश्ती शुरू कर दी। शुरुआत में पापा ने ही गांव में ट्रेनिंग कराई। पापा और ताऊ दोनों पहलवान रहे हैं। ऐसे में घर पर किसी ने रेसलिंग से नहीं रोका, हमें पूरा सपोर्ट मिला। दीदी ने अपना पहला मेडल 2016 एशियाई कैडेट चैंपियनशिप में जीता, वहां उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। 2016 में उन्होंने विश्व कैडेट चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। फिर वह पीछे नहीं मुड़ी।” कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल​
वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट, एशियन चैंपियन अंशु 20 साल की उम्र में ही ओलंपियन बन गई थीं। वह पिछले ओलिंपिक में 9वें नंबर पर रही। अब पेरिस में उनसे मेडल की उम्मीद है।