अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने मंगलवार को ईरान के राजनयिक रेजा अमीरी मोगदम को अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया है। मोगदम फिलहाल पाकिस्तान में ईरान के राजदूत हैं। मोगदम पर आरोप है कि उन्होंने 2007 में एक रिटायर्ड अमेरिकी FBI एजेंट रॉबर्ट लेविंसन के अपहरण की योजना बनाने और उसे छिपाने में अहम भूमिका निभाई थी। लेविंसन 8 मार्च 2007 को ईरान के किश द्वीप पहुंचे थे और अगले ही दिन अचानक गायब हो गए थे। अब तक उनकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। FBI बोली- अपहरण कैसे हुआ, इसकी गुत्थी सुलझा रहे FBI का मानना है कि मोगदम ने उस पूरे ऑपरेशन की निगरानी की थी जिसमें रॉबर्ट लेविंसन का अपहरण हुआ था। बाद में उन्होंने इस पूरे मामले की सच्चाई छुपाने का भी काम किया था। रेजा मोगदम, जिन्हें अहमद अमीरिनिया के नाम से भी जाना जाता है, पहले ईरान के खुफिया मंत्रालय (MOIS) में एक सीनियर अधिकारी थे। उनकी निगरानी में ही यूरोप में ईरान के गुप्त एजेंट काम किया करते थे। FBI ने कहा कि वे अभी भी पता लगा रहे हैं कि लेविंसन का अपहरण किन लोगों ने और कैसे किया। FBI ने 3 ईरानी अधिकारियों के खिलाफ पोस्टर जारी किया FBI ने मंगलवार को मोगदम के अलावा 2 और सीनियर ईरानी खुफिया अधिकारियों के खिलाफ पोस्टर जारी किए। बाकी 2 ईरानी खुफिया अधिकारियों में तागी दानेश्वर (सैय्यद तागी घामी) और गुलामहुसैन मोहम्मदनिया का नाम शामिल है। इन लोगों पर न सिर्फ लेविंसन के अपहरण में शामिल होने का आरोप है, बल्कि इस पूरे मामले में ईरान सरकार की भूमिका को छिपाने की कोशिश में भी इनकी अहम भूमिका मानी जा रही है। तागी दानेशवर इस समय ईरान के खुफिया मंत्रालय में काउंटर-इंटेलिजेंस अधिकारी हैं। उन पर आरोप है कि लेविंसन के लापता होने के दौरान वे एक ऑपरेटिव मोहम्मद बसेरी (जिसे ‘सनाई’ भी कहते हैं) की निगरानी कर रहे थे। वहीं, गुलामहुसैन मोहम्मदनिया MOIS के सीनियर डिप्टी चीफ रह चुके हैं। वे 2016 में अल्बानिया में ईरान के राजदूत थे। उन्हें 2018 में अल्बानिया ने देश से बाहर निकाल दिया था। मोहम्मदनिया पर आरोप था कि वे अल्बानिया में आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे। FBI का आरोप है कि मोहम्मदनिया ने लेविंसन के गायब होने की साजिश का दोष पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में सक्रिय एक आतंकी संगठन पर डालने की कोशिश की थी। 2011 में आखिरी बार दिखे थे लेविंसन FBI अधिकारी स्टीवन जेन्सन ने कहा कि ये तीनों अधिकारी उस प्लान का हिस्सा थे, जिसमें लेविंसन को अगवा किया गया और फिर इस मामले को छुपाया गया। FBI का मानना है कि लेविंसन को बंदी बनाकर रखा गया और शायद उनकी मौत भी कैद में ही हो गई। 2010 और 2011 में लेविंसन की कुछ तस्वीरें और एक वीडियो सामने आए थे, जिनमें वो जिंदा दिख रहे थे। लेकिन उसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। मार्च 2025 में अमेरिकी वित्त विभाग ने मोगदम समेत कई लोगों पर इस मामले को लेकर प्रतिबंध लगा दिए थे। अपनी मर्जी से ईरान गए थे लेविंसन न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक लेविंसन प्रशासन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश में जुटे थे। वे ईरान में एक भगोड़े अमेरिकी अपराधी को CIA का एजेंट बनाने की कोशिश कर रहे थे। वे अपनी मर्जी से ईरान गए थे। लेविंसन को आखिरी बार 2010 में एक वीडियो में देखा गया था, जिसमें उन्होंने ग्वांतानामो जेल जैसी नारंगी जंपसूट पहन रखी थी और मदद की गुहार लगा रहे थे। उनके कैद की कुछ तस्वीरें भी 2011 में सामने आईं, लेकिन यह कभी स्पष्ट नहीं हुआ कि उन्हें किसने बंधक बनाया था या वे अभी जिंदा हैं या नहीं। पाकिस्तान में गिरफ्तार नहीं होंगे ईरानी राजदूत FBI की वांटेड लिस्ट में नाम आने का मतलब है कि अमेरिका उस व्यक्ति को गंभीर अपराधी मानता है और उसे पकड़ने के लिए वैश्विक सहयोग की मांग कर रहा है। हालांकि, राजदूत को ‘डिप्लोमैटिक इम्युनिटी’ मिली होती है, इसलिए पाकिस्तान उसे गिरफ्तार नहीं कर सकता, लेकिन इस पाकिस्तान पर इस घटना का राजनीतिक दबाव तो बन सकता है।