आषाढ़ मास की अमावस्या और शुक्रवार का योग आज:दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास जलाएं दीपक

आज (5 जुलाई) आषाढ़ मास की अमावस्या है, इसका नाम हलहारिणी है। इस तिथि से जुड़ी कई मान्यताएं है। हलहारिणी अमावस्या पर किए गए पूजा-पाठ और धूप-ध्यान से अक्षय पुण्य मिलता है। ऐसा पुण्य जिसका असर जीवनभर बना रहता है। जानिए आज कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं… उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, आषाढ़ मास की अमावस्या पर भगवान विष्णु, महालक्ष्मी, शिव जी और गणेश जी का अभिषेक करें। शुक्रवार और अमावस्या के योग में शुक्र ग्रह के लिए भी विशेष पूजा-पाठ करनी चाहिए। पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करेंगे तो घर पर पवित्र नदी के स्नान का पुण्य मिल सकता है। स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। ऐसे कर सकते कर सकते हैं पूजा-पाठ घर के मंदिर में गणेश पूजन के बाद शिव-पार्वती, महालक्ष्मी और विष्णु जी का पूजन करें। देवी-देवता की प्रतिमा का जल से, फिर केसर मिश्रित दूध से, पंचामृत से और फिर जल से अभिषेक करें। देवियों को को लाल चुनरी ओढ़ाएं। देवताओं को नए वस्त्र अर्पित करें। हार-फूल चढ़ाएं। तिलक करें। इत्र चढ़ाएं। अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय, ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करते रहें। विष्णु-लक्ष्मी को तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। शिव-पार्वती को बिल्व पत्र के साथ भोग लगाएं। ध्यान रखें शिव-पार्वती को तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। दोपहर में क्यों करते हैं पितरों के लिए धूप-ध्यान? अमावस्या पर पितरों के लिए धूप-ध्यान खासतौर पर करना चाहिए, क्योंकि इस तिथि के स्वामी पितर देवता माने गए हैं। मान्यता है कि आज धूप-ध्यान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है। घर-परिवार के मृत सदस्यों को पितर देव माना जाता है। सुबह का समय देवी-देवताओं की पूजा के लिए श्रेष्ठ होता है। मृत सदस्य यानी पितरों के लिए धूप-ध्यान करने के लिए दोपहर का समय सबसे अच्छा माना जाता है। दोपहर में पितरों को धूप देने के लिए गाय के गोबर से बने कंडे जलाएं और जब कंडों से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी डालकर धूप दें। हथेली में जल लें और अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें। इस दौरान पितरों का ध्यान करते रहना चाहिए। अमावस्या पर कर सकते हैं ये शुभ काम भी अमावस्या की शाम तुलसी के पास दीपक जलाएं और तुलसी की परिक्रमा जरूर करें। हनुमान जी के मंदिर में दीपक जलाएं और सुंदरकांड के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं। अमावस्या पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। इसलिए जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल, अनाज, धन, खाना, पढ़ाई से जुड़ी चीजें दान करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें। गौशाला में गायों के लिए देखभाल के लिए दान करें। किसी तालाब में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं।