इक्विटी कैश सेगमेंट में निवेश करने वाले 70% से ज्यादा इंडिविजुअल निवेशकों को नुकसान हुआ है। यह जानकारी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंड बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI की एक स्टडी में सामने आई है। मार्केट रेगुलेटर ने वित्त वर्ष 2023 के दौरान निवेश करने वाले लोगों पर यह अध्ययन किया। स्टडी में एकेडमिक जगत से जुड़े लोग, ब्रोकर्स और मार्केट एक्सपर्ट्स को शामिल किया गया। आज यानी बुधवार 24 जुलाई को जारी स्टेटमेंट में सेबी ने बताया कि इक्विटी कैश सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले लोगों की संख्या वित्त वर्ष 2019 के मुकाबले वित्त वर्ष 2023 में 300% बढ़ी है। सेबी के स्टडी की बड़ी फाइंडिंग्स इक्विटी कैश सेगमेंट के 86% ट्रेडर्स पर किया गया स्टडी
इस स्टडी में कोरोना महामारी से पहले और बाद के ट्रैंड्स को एनालाइज करने के लिए सेबी ने वित्त वर्ष 2019, 2022 और 2023 को स्टडी में शामिल किया। इसमें देश के टॉप-10 ब्रोकर्स के इंडिविजुअल क्लाइंट्स को शामिल किया गया था। यह नंबर इक्विटी कैश सेगमेंट में ट्रेड करने वालों का 86% है। इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है?
इंट्राडे ट्रेडिंग इसे डे-ट्रेडिंग भी कहा जाता है। इसमें एक ही ट्रेडिंग डे के भीतर शेयरों की खरीद और बिक्री होती है। ट्रेडिंग डे के दौरान शेयरों की कीमत लगातार बदलती रहती है। ऐसे में इंट्रा-डे ट्रेडर शॉर्ट टर्म में शेयर में उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाते हैं।
क्यों नुकसान उठाते हैं ज्यादातर इंट्राडे ट्रेडर? अक्सर लोग कहते हैं कि बाजार में तेजी के बावजूद वे नुकसान में हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं: यह खबर भी पढें… सेबी चेयरपर्सन बोलीं- घर की सेविंग सट्टेबाजी में जा रही: बजट में FO की कमाई पर 30% टैक्स की तैयारी, सरकार इसे स्पेकुलेटिव इनकम मानेगी वित्त वर्ष 2022 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या में वित्त वर्ष 2019 की तुलना में 500% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। 90% एक्टिव ट्रेडर्स को इस दौरान औसतन 1.25 लाख रुपए का नुकसान हुआ। SEBI की 25 जनवरी 2023 को इंडिविजुअल ट्रेडर के FO में प्रॉफिट और लॉस को लेकर पब्लिश रिपोर्ट में ये बात कही गई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
इस स्टडी में कोरोना महामारी से पहले और बाद के ट्रैंड्स को एनालाइज करने के लिए सेबी ने वित्त वर्ष 2019, 2022 और 2023 को स्टडी में शामिल किया। इसमें देश के टॉप-10 ब्रोकर्स के इंडिविजुअल क्लाइंट्स को शामिल किया गया था। यह नंबर इक्विटी कैश सेगमेंट में ट्रेड करने वालों का 86% है। इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है?
इंट्राडे ट्रेडिंग इसे डे-ट्रेडिंग भी कहा जाता है। इसमें एक ही ट्रेडिंग डे के भीतर शेयरों की खरीद और बिक्री होती है। ट्रेडिंग डे के दौरान शेयरों की कीमत लगातार बदलती रहती है। ऐसे में इंट्रा-डे ट्रेडर शॉर्ट टर्म में शेयर में उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाते हैं।
क्यों नुकसान उठाते हैं ज्यादातर इंट्राडे ट्रेडर? अक्सर लोग कहते हैं कि बाजार में तेजी के बावजूद वे नुकसान में हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं: यह खबर भी पढें… सेबी चेयरपर्सन बोलीं- घर की सेविंग सट्टेबाजी में जा रही: बजट में FO की कमाई पर 30% टैक्स की तैयारी, सरकार इसे स्पेकुलेटिव इनकम मानेगी वित्त वर्ष 2022 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या में वित्त वर्ष 2019 की तुलना में 500% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। 90% एक्टिव ट्रेडर्स को इस दौरान औसतन 1.25 लाख रुपए का नुकसान हुआ। SEBI की 25 जनवरी 2023 को इंडिविजुअल ट्रेडर के FO में प्रॉफिट और लॉस को लेकर पब्लिश रिपोर्ट में ये बात कही गई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…