संस्कृत विवि का पांचवें दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के कर कमलों द्वारा किया गया। श्री कोविंद जी ने दीप प्रज्जवलित करते हुये दीक्षांत समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संस्कृत विवि के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता, कुलपति डॉ. एमडी चेट्टी, प्रति कुलाधिपति श्री राजेश गुप्ता, उद्योगपति श्री दिनेश अग्रवाल, धर्मगुरू आचार्य सद्गुरू नाथ जी महाराज (पेमेश्वर पीठाधीश्वर) एवं देश की 6 दिग्गज हस्तियां उपस्थित रही। अपने सम्बोधन में पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने दीक्षांत समारोह की सम्बोधित करते हुये कहा कि विद्यार्थी लक्ष्य हासिल करने के लिये कठिन मेहनत करें। कठिनाईयां आने पर भी अपने रास्ते को न छोड़ें, बल्कि चुने हुए मार्ग पर आगे बढ़ते रहें, मंजिल एक दिन अवश्य मिलेगी। उन्होंने कहा कि समाज ने जो भी हमें दिया है, उसे लौटाना होगा। हमेशा देशहित में काम करें, आपकी सफलता इस पर निर्भर नहीं करती कि आपका बैकग्राउंड क्या है? मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन मैं देश का राष्ट्रपति बनूंगा। आप अपना काम ईमानदारी व निष्ठा के साथ करेंगे तो उसका प्रतिफल आपको एक दिन अवश्य मिलेगा। अक्सर ऐसा देखा गया है कि लक्ष्य के करीब पहुंचकर भ्रम की स्थिति आ जाती है, ऐसे में आप अपनी ताकत को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े, सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने छात्रों को स्वस्थ रहने का भी मंत्र दिया। साथ ही कहा कि आधुनिक बनिए पर अपनी सभ्यता और संस्कृति से हमेशा जुड़े रहो। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि महत्वपूर्ण ये नहीं है कि हम कहां से आते हैं, महत्वपूर्ण ये है कि हम समाज को क्या देते हैं? माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा उठ जाता है जब वे अपने बच्चों के नाम से जाने जाते हैं। इस अवसर पर देश की 6 दिग्गज हस्तियों संगीतकार, ध्वनि कलाकार सत्या हिंदुजा, स्वयं साध्य डिजाइनर कृष्णा माहता, लेखिका व कवि रोशेल पोर्टकर, सुप्रसिद्ध संतूर वादक राहुल शर्मा, विख्यात विचारक, आध्यात्मिक गुरु, कलाकार व चित्रकार उदयरान, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस व भगवान राम के बाल रूप रामलला की मूर्ति बनाने वाले अरूण योगी राज को मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया।