बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (21 अगस्त) को महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले मामले में सुनवाई की। जस्टिस एएस गडकरी और नीला गोखले की बेंच ने कहा कि ईमेल, सोशल मीडिया पर लिखे गए ऐसे शब्द जो किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचा सकते हैं तो वो आईपीसी की धारा 509 के तहत अपराध है। दरअसल, बेंच ने 2009 के मामले में सुनवाई की। केस में शिकायतकर्ता महिला है। उसने एक व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 509 के केस दर्ज कराया था। महिला का आरोप था कि साउथ मुंबई की एक सोसायटी में रहे के दौरान व्यक्ति ने उसके खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक ईमेल लिखे थे। मेरे चरित्र पर टिप्पणी की गई थी। और इन ईमेल को सोसायटी के दूसरे लोगों को भी भेजा गया था। महिला के दर्ज कराए केस को खारिज करने की मांग को लेकर व्यक्ति ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उसकी दलील थी कि IPC की धारा 509 में बोले गए शब्द का मतलब केवल बोले गए शब्द होंगे न कि ईमेल या सोशल मीडिया पोस्ट आदि में लिखे गए शब्द। कोर्ट ने IPC की धारा 354 के तहत लगाए आरोप हटाए
बेंच ने कहा कि ईमेल की सामग्री निस्संदेह अपमानजनक है और समाज की नजर में शिकायतकर्ता की छवि और प्रतिष्ठा को कम करने के उद्देश्य से है। अदालत ने मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि, बेंच ने IPC की धारा 354 (शील भंग करने के इरादे से किसी महिला पर हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना) के तहत व्यक्ति पर लगे आरोपों को हटा दिया। सुनवाई में बेंच की कही बातें यह खबर भी पढ़ें…
कोलकाता रेप-मर्डर केस, CBI ने कहा- सबूतों से छेड़छाड़ हुई, सुप्रीम कोर्ट बोला- 30 साल में ऐसी लापरवाही नहीं देखी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 9 अगस्त को हुए ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर केस में 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान CBI ने कोर्ट में कहा- क्राइम सीन से छेड़छाड़ हुई है। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा- कोलकाता पुलिस की भूमिका पर संदेह है। जांच में ऐसी लापरवाही अपने 30 साल के करियर में नहीं देखी। मामले में अगली सुनवाई 5 सितंबर को होगी। पूरी खबर पढ़ें… बदलापुर यौन शोषण केस: हाईकोर्ट बोला- बच्चियों को भी नहीं बख्शा जा रहा, यह कैसी स्थिति महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर स्थित एक स्कूल में दो बच्चियों से यौन शोषण मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट में गुरुवार (22 अगस्त) को सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि अब 4 साल की बच्चियों को भी नहीं बख्शा जा रहा। यह कैसी स्थिति है। कोर्ट ने कहा कि अगर स्कूल ही सेफ नहीं है तो शिक्षा के अधिकार और बाकी चीजों की बात करने का क्या मतलब। पूरी खबर पढ़ें…
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