फरवरी खत्म हो गया है। मार्च के पहले सप्ताह में टेम्परेचर में और बदलाव होने की उम्मीद है। दिन में गर्मी और तेज होगी, वहीं अभी रात में हल्की ठंडक बनी रह सकती है। मौसम बदलने के साथ हमारे शरीर की जरूरतें भी बदलती हैं, इसलिए लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करना बहुत जरूरी है। गर्मी करीब आ रही है। ऐसे में तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल इन्फेक्शन और पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में अपनी सेहत का खास ख्याल रखने की जरूरत है। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अंकित बंसल, एसोसिएट कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली सवाल- मौसम बदलने पर हमारा शरीर बीमारियों और इन्फेक्शन के प्रति संवेदनशील क्यों हो जाता है?
जवाब- फरवरी-मार्च के महीने में तापमान में काफी उतार-चढ़ाव होता है। बदलता मौसम शरीर के लिए आसान नहीं होता है। शरीर को नए वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में थोड़ा वक्त लगता है। इस दौरान इम्यून सिस्टम पर दबाव पड़ता है, जिससे शरीर की बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा गर्मियों में हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया के पनपने का खतरा अधिक रहता है। सवाल- मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
जवाब- डॉ. अंकित बंसल बताते हैं कि मौसम बदलने पर सर्दी, खांसी और फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्मियों में भोजन जल्दी खराब होने लगता है, जिससे डायरिया, पेट दर्द और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही शरीर में पानी की जरूरत बढ़ जाती है। पानी की कमी से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, चक्कर आना और थकावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मौसम में बदलाव के कारण बॉडी क्लॉक पर भी असर पड़ता है, जिससे नींद भी प्रभावित हो सकती है। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए, मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सवाल- इस मौसम में बीमारियों और इन्फेक्शन से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- डॉ. अंकित बंसल बताते हैं कि मौसम बदलने के साथ हमें अपनी दिनचर्या और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने की जरूरत होती है। इससे हम मौसमी बीमारियों और वायरल इन्फेक्शन से बच सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- मौसम बदलने पर कपड़ों को लेकर किस तरह के बदलाव करने चाहिए?
जवाब- मौसम बदलने के साथ अपने पहनावे में भी धीरे-धीरे बदलाव करने चाहिए। तुरंत फुल स्लीव्स से हाफ स्लीव्स या ऊनी कपड़ों से हल्के कपड़े पहनने लगना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए अभी कुछ दिन सुबह-शाम फुल स्लीव्स या ऊनी कपड़े ही पहनें। दिन में तापमान बढ़ने के साथ हल्के और आरामदायक कपड़े पहन सकते हैं। इससे न केवल शरीर मौसम के अनुकूल धीरे-धीरे ढलेगा, बल्कि आपको स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी नहीं रहेगा। सवाल- गर्मियां आ रही हैं। इस मौसम में खानपान की आदतों में क्या बदलाव करने की जरूरत है?
जवाब- मौसम बदलने पर हमारी खाने-पीने की आदतों में भी बदलाव जरूरी होता है। इसे इन पॉइंट्स से समझिए- सवाल- इस मौसम में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब- सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन तापमान बढ़ने के साथ शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसलिए दिन भर में 8-10 गिलास पानी पीने की आदत डालें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। बहुत ज्यादा पसीना आने पर पानी की मात्रा बढ़ाएं। घर से बाहर जाने से पहले और लौटने के बाद पानी जरूर पिएं। ध्यान रखें कि एकदम ठंडा या बर्फ वाला पानी न पिएं। इससे गले में खराश, सर्दी-जुकाम हो सकता है। सवाल- इसके अलावा मौसम बदलने पर लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए?
जवाब- मौसम बदलते ही शरीर को नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में समय लगता है। इसलिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव जरूर करें। इसे नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- हैवी एक्सरसाइज न करें
मौसम बदलने पर हैवी एक्सरसाइज, जैसे वेट लिफ्टिंग, हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट या लंबी दौड़ करने से बचना चाहिए। इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह थकान, कमजोरी या डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। सोने की आदत में करें बदलाव
सर्दी में रातें लंबी होती हैं, जबकि गर्मी में रातें छोटी होती हैं। इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपने सोने-जागने का सही समय निर्धारित करें। 7-8 घंटे की नींद लेने की आदत डालें, जिससे शरीर को पर्याप्त आराम मिल सके। कूलर-पंखे से बनाएं दूरी
मौसम बदलने पर तुरंत कूलर या पंखे का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे सर्दी-जुकाम, गले में खराश और बुखार जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। …………………………….. सेहत की ये खबर भी पढ़ें…
जवाब- फरवरी-मार्च के महीने में तापमान में काफी उतार-चढ़ाव होता है। बदलता मौसम शरीर के लिए आसान नहीं होता है। शरीर को नए वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में थोड़ा वक्त लगता है। इस दौरान इम्यून सिस्टम पर दबाव पड़ता है, जिससे शरीर की बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा गर्मियों में हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया के पनपने का खतरा अधिक रहता है। सवाल- मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
जवाब- डॉ. अंकित बंसल बताते हैं कि मौसम बदलने पर सर्दी, खांसी और फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्मियों में भोजन जल्दी खराब होने लगता है, जिससे डायरिया, पेट दर्द और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही शरीर में पानी की जरूरत बढ़ जाती है। पानी की कमी से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, चक्कर आना और थकावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मौसम में बदलाव के कारण बॉडी क्लॉक पर भी असर पड़ता है, जिससे नींद भी प्रभावित हो सकती है। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए, मौसम बदलने पर किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सवाल- इस मौसम में बीमारियों और इन्फेक्शन से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- डॉ. अंकित बंसल बताते हैं कि मौसम बदलने के साथ हमें अपनी दिनचर्या और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने की जरूरत होती है। इससे हम मौसमी बीमारियों और वायरल इन्फेक्शन से बच सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- मौसम बदलने पर कपड़ों को लेकर किस तरह के बदलाव करने चाहिए?
जवाब- मौसम बदलने के साथ अपने पहनावे में भी धीरे-धीरे बदलाव करने चाहिए। तुरंत फुल स्लीव्स से हाफ स्लीव्स या ऊनी कपड़ों से हल्के कपड़े पहनने लगना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए अभी कुछ दिन सुबह-शाम फुल स्लीव्स या ऊनी कपड़े ही पहनें। दिन में तापमान बढ़ने के साथ हल्के और आरामदायक कपड़े पहन सकते हैं। इससे न केवल शरीर मौसम के अनुकूल धीरे-धीरे ढलेगा, बल्कि आपको स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी नहीं रहेगा। सवाल- गर्मियां आ रही हैं। इस मौसम में खानपान की आदतों में क्या बदलाव करने की जरूरत है?
जवाब- मौसम बदलने पर हमारी खाने-पीने की आदतों में भी बदलाव जरूरी होता है। इसे इन पॉइंट्स से समझिए- सवाल- इस मौसम में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब- सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन तापमान बढ़ने के साथ शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसलिए दिन भर में 8-10 गिलास पानी पीने की आदत डालें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। बहुत ज्यादा पसीना आने पर पानी की मात्रा बढ़ाएं। घर से बाहर जाने से पहले और लौटने के बाद पानी जरूर पिएं। ध्यान रखें कि एकदम ठंडा या बर्फ वाला पानी न पिएं। इससे गले में खराश, सर्दी-जुकाम हो सकता है। सवाल- इसके अलावा मौसम बदलने पर लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए?
जवाब- मौसम बदलते ही शरीर को नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में समय लगता है। इसलिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव जरूर करें। इसे नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- हैवी एक्सरसाइज न करें
मौसम बदलने पर हैवी एक्सरसाइज, जैसे वेट लिफ्टिंग, हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट या लंबी दौड़ करने से बचना चाहिए। इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह थकान, कमजोरी या डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। सोने की आदत में करें बदलाव
सर्दी में रातें लंबी होती हैं, जबकि गर्मी में रातें छोटी होती हैं। इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपने सोने-जागने का सही समय निर्धारित करें। 7-8 घंटे की नींद लेने की आदत डालें, जिससे शरीर को पर्याप्त आराम मिल सके। कूलर-पंखे से बनाएं दूरी
मौसम बदलने पर तुरंत कूलर या पंखे का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे सर्दी-जुकाम, गले में खराश और बुखार जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। …………………………….. सेहत की ये खबर भी पढ़ें…
सेहतनामा- एक साल में दोगुने से ज्यादा हुए डेंगू केस:भारत में गर्मी बढ़ने से बढ़ रहा खतरा, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, पिछले 10-15 वर्षों में भारत के तापमान में 5-7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि भारत में भी डेंगू का जोखिम बढ़ रहा है। पूरी खबर पढ़िए…