कुछ साल पहले की बात है। दीपावली की रात थी। लोकसभा सांसद रीता बहुगुणा जोशी की 8 साल की पोती अपने दोस्तों के साथ छत पर खेल रही थी। उसने झालर वाली फ्रॉक पहन रखी थी। पटाखे की एक चिंगारी उसकी फ्रॉक में आ लगी और देखते-ही-देखते आग बच्ची के पूरे शरीर में फैल गई। आग की लपटें देखकर उसके दोस्त डरकर भाग गए। नौकर-चाकरों से भरे सांसद के घर में भी लोग तुरंत बच्ची तक नहीं पहुंच पाए। जब तक आग बुझाई गई, बच्ची 60 फीसदी झुलस चुकी थी। उसे बचाया नहीं जा सका। ये कहानी तो एक घर की है, लेकिन ऐसे खतरे उन तमाम घरों पर मंडराते रहते हैं, जहां खुशियों का यह त्योहार रोशनी और पटाखों के साथ मनाया जा रहा हो। तेल के दीए, पटाखे और जगमग करती इलेक्ट्रिक लाइट्स, इनके इस्तेमाल में थोड़ी भी कोताही हो तो आग लगने की पूरी आशंका होती है। पिछले साल का ही आंकड़ा देखें। सिर्फ जयपुर शहर में दीपावली की रात आग लगने की 60 घटनाएं हुईं। इसी दौरान भोपाल में 25 और दिल्ली में 201 ऐसे मामले सामने आए। जबकि आम दिनों में यह आंकड़ा जयपुर-भोपाल में बमुश्किल एक या दो और दिल्ली में 3-4 तक होता है। आंकड़ों से साफ है कि दीपावली के आसपास आग लगने की घटनाएं अचानक बढ़ जाती हैं। आग की मुख्य वजहें- पटाखा, खुला तार, ओवरलोड से हुआ शॉर्ट शर्किट पिछले साल दीपावली पर दिल्ली, जयपुर और भोपाल में हुई आग लगने की कुल 286 घटनाओं पर एक सरसरी निगाह डालें तो पाएंगे कि इसमें से अधिकर आग पटाखों की चिंगारी से लगी थी। दूसरी बड़ी वजह इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट रही। जबकि दीए और मोमबत्ती जैसी पारंपरिक चीजें आग लगने के कारणों में सबसे पीछे रहीं। बीएमसी के आंकड़े कहते हैं कि मुंबई में पिछली दीपावली आग लगने की कुल 85 घटनाओं में से 44% यानी 37 पटाखे की वजह से हुईं। इसलिए आज जरूरत की खबर में हम जानेंगे कि फायरसेफ्टी के लिए हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए। क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और अगर आग लग जाए तो उस स्थिति में बचाव के लिए क्या करना चाहिए। बाहर से आए पटाखों पर वश नहीं, मगर घर की वायरिंग को रखें दुरुस्त आंकड़ों में आपने देखा कि दीपावली पर आग लगने की सबसे बड़ी वजह पटाखे हैं। उनमें भी वैसे पटाखे ज्यादा हैं, जो जलाए तो कहीं और जाते हैं, लेकिन उड़ते हुए खिड़कियों से घर में घुसकर तबाही लाते हैं। इससे बचने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। हां, खिड़की-दरवाजों को यथासंभव बंद रखकर इसकी आशंका कम जरूर की जा सकती है। साथ ही छत, बालकनी या घर के खुले हिस्से में कोई ऐसी चीज नहीं रखनी चाहिए, जिसमें आग लगने की आशंका हो। इसके अलावा नीचे दिए क्रिएटिव से समझें कि दीपावली पर हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। अब आते हैं, आग लगने की दूसरी सबसे बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट पर। बाजार में जिधर नजर दौड़ाइये, रंग-बिरंगे झालर और घर को डिस्को में बदलने का दावा करती चाइनीज लाइटें मिल जाएंगी। जिसकी न कोई गारंटी है और न ही जिसमें सेफ्टी के मानक फॉलो किए जाते हैं। ‘सिर्फ एक ही दिन के लिए तो चाहिए, कुछ भी चलेगा।’ यही सोचते हुए लोग बाजार से सस्ती चाइनीज लाइटें खरीदकर ले आते हैं, जो आग लगने की वजह बनती है। यूं तो शॉर्ट सर्किट कभी भी हो सकता है, लेकिन दीपावली के दौरान घर के इलेक्ट्रिक सिस्टम पर लोड बहुत ज्यादा होता है। इस तरह आग लगने के मुख्य कारण इस प्रकार हैं- बिजली के तारों में आग लगने और शॉर्ट सर्किट होने की वजह आग जैसे हादसों से बचने के लिए घर, दुकान, बिल्डिंग में फायर एक्सटिंग्विशर यानी अग्निशमन यंत्र जरूर लगवाएं। ये आग लगने पर आपके बचाव के लिए होता है। घर में आग लगने की स्थिति में अगर आपके आसपास फायर एक्सटिंग्विशर है और आपको उसे चलाना आता है तो आप बड़े हादसे को होने से रोक सकते हैं। अगर आपकी बिल्डिंग, दुकान में फायर एक्सटिंग्विशर नहीं लगा है तो आग से होने वाले हादसों से बचने के लिए इसे लगवा लें। फायर एक्सटिंग्विशर यूज करने की P.A.S.S टेक्नीक 1.P = Pull the pin (पिन को खींचें) 2.A = Aim at base of fire (फायर के निचले भाग पर निशाना साधे) 3.S = Squeeze (फायर एक्सटिंग्विशर के हैंडल को दबाएं) 4.S = Sweep at the base (आग के निचले भाग पर तब तक स्वीप करें, जब तक कि फायर एक्सटिंग्विशर पूरी तरह से खाली न हो जाए।) ऐसा करके आग पर काबू पाया जा सकता है और बड़ी दुर्घटना को होने से रोका जा सकता है। नोट: अगर फायर एक्सटिंग्विशर पहले से लगा है तो दीपावली से पहले से चेक करा लें और चलाना भी सीख लें। आग लगने पर बरतें ये सावधानियां