बारिश के मौसम में वायरल इन्फेक्शन या फ्लू का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में हवा में मौजूद नमी हमारी स्किन, बालों, हाथों और पैरों को नुकसान पहुंचा सकती है। बरसात के मौसम में पैरों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है क्योंकि हमारे पैर फंगस और बैक्टीरिया के प्रति अधिक सेंसिटिव होते हैं। इस कारण इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा बरसात के दिनों में सड़कों पर जलभराव और कीचड़ हो जाता है। गंदे पानी में पैरों के भीगने पर भी इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिए आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि बारिश के मौसम में पैरों की देखभाल कैसे करें? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. गोविन्द सिंह बिष्ट, पोडियाट्रिस्ट, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- पैरों का फंगल इन्फेक्शन क्या है और इसके लक्षण क्या हैं? जवाब- पैरों में इन्फेक्शन (एथलीट फुट) एक तरह का स्किन इंफेक्शन है, जिससे बहुत से लोग मानसून के मौसम में पीड़ित होते हैं। एथलीट फुट की वजह से पैरों में खुजली, जलन के साथ दाने हो जाते हैं या स्किन पपड़ीदार हो जाती है। इसमें पैरों से स्मेल आ सकती है। अगर इन्फेक्शन पैर के नाखूनों तक फैल जाए तो नाखूनों के आसपास सूजन आ सकती है। पैर में इन्फेक्शन होने पर शुरुआत में दर्द और सूजन होती है, लेकिन अगर समय पर इलाज न किया जाए तो ये गंभीर समस्या बन सकती है। नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि पैरों में इन्फेक्शन होने के क्या लक्षण हैं। सवाल- बारिश के मौसम में पैरों में इन्फेक्शन का कारण क्या है? जवाब- मानसून के मौसम में इन्फेक्शन की वजह से पैरों में गलन, खुजली, लाल दाने और फोड़े-फुंसी होने लगते हैं। इसके कई कारण हैं। जैसेकि- फंगल इन्फेक्शन मानसून में फंगस के पनपने का एक बड़ा कारण है- वातावरण में मौजूद नमी और पानी। ऐसे मौसम में एथलीट फुट और फंगल नाखून इन्फेक्शन (ऑनिकोमाइकोसिस) होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके लक्षणों में नाखूनों का भूरा, पीला या सफेद पड़ना, कमजोर होकर टूटना या नाखूनों की नेचुरल चमक का खो जाना शामिल है। बैक्टीरियल इन्फेक्शन मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी से बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। ऐसे में पैरों पर खुले घाव, कट या छाले होने पर बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गंदा और दूषित पानी मानसून के दौरान सड़कों के आसपास जलभराव की समस्या आम बात है। यह पानी दूषित होता है। इसमें हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी हो सकते हैं। ऐसे पानी में पैर के भीगने से पैर पर बैक्टीरिया आ सकते हैं, जो इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं। पैरों की उचित देखभाल न करना हवा में नमी बढ़ने के कारण मानसून के दौरान पैरों की उचित देखभाल करना जरूरी है। बारिश में भीगने के बाद पैरों को अच्छी तरह से न सुखाना बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का कारण बन सकता है। पैरों का लंबे समय तक गीला रहना जब पैर लंबे समय तक गीले मोजे या जूते के संपर्क में रहते हैं तो पैरों की स्किन बहुत मुलायम हो जाती है, जो इन्फेक्शन के प्रति अधिक सेंसिटिव हो सकती है। इससे मैक्रेशन भी हो सकता है यानी पैरों की स्किन झुर्रीदार हो सकती है या पीली पड़ सकती है या कमजोर होकर टूटने लग सकती है। इससे बैक्टीरिया और फंगल का खतरा बढ़ जाता है। सवाल- बरसात के मौसम में अपने पैरों को इन्फेक्शन से कैसे बचा सकते हैं? जवाब- बारिश के मौसम में पैरों में इन्फेक्शन या फंगस होने पर आमतौर पर शुरूआती लक्षणों में खुजली या स्किन लाल पड़ना शामिल है। अगर समय पर देखभाल न की जाए तो एड़ियां फट सकती हैं या स्किन छिल सकती है। गंभीर स्थिति होने पर ब्लीडिंग भी हो सकती है। ऐसे में पैरों को फंगल इन्फेक्शन से बचाने के लिए ये उपाय अपना सकते हैं। आइए, ऊपर ग्राफिक में दिए कुछ पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं। सवाल- बारिश के मौसम में पैरों के इन्फेक्शन को लेकर किन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है? जवाब- बारिश के मौसम में डायबिटिक लोगों को अपने पैरों के प्रति अधिक सावधान रहना चाहिए क्योंकि डायबिटिक लोगों के घाव को सूखने या भरने में सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा समय लगता है। दरअसल डायबिटीज की वजह से चोट या घाव वाले स्थान पर ऑक्सीजन की सप्लाई स्लो हो जाती है और रेड ब्लड सेल्स घाव तक तेजी से नहीं पहुंच पाती हैं। इसलिए पैर की उंगलियों में घाव या चोट लगने पर गंभीर समस्याएं हो सकती है।