जानें अपने अधिकार- काम एकसमान, लेकिन वेतन में भेदभाव:क्या कहता है कानून, जानें कहां और कैसे करें भेदभाव की शिकायत

हर व्यक्ति अपनी मेहनत के लिए उचित सम्मान और मेहनताना चाहता है। यह सिर्फ आर्थिक जरूरतों को पूरा करने की बात नहीं है, बल्कि ‘समान काम के लिए समान वेतन’ का बुनियादी अधिकार है। इसके बावजूद वर्कप्लेस पर आज भी कई कर्मचारियों के साथ भेदभाव देखने को मिलता है। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलना, अलग-अलग सेक्टर्स में मजदूरों का शोषण और प्राइवेट कंपनियों में जाति या क्षेत्र के आधार पर वेतन में अंतर जैसी विसंगतियां आज भी मौजूद हैं। जबकि भारतीय संविधान और कानून के मुताबिक, लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर किसी कर्मचारी के वेतन में भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अगर कोई कर्मचारी समान जिम्मेदारी और मेहनत के बावजूद कम वेतन पा रहा है तो वह कानून के तहत न्याय पाने का हकदार है। लेकिन आखिर ‘समान काम’ की परिभाषा क्या है? अगर आपके साथ भेदभाव हो रहा है तो आप कहां और कैसे शिकायत कर सकते हैं? इसलिए, ‘जानें अपने अधिकार’ कॉलम में जानेंगे कि समान काम, समान वेतन को लेकर कानूनी अधिकार क्या हैं? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: रुद्र प्रकाश मिश्रा, असिस्टेंट वेलफेयर कमिश्नर, श्रम विभाग, भोपाल सरोज कुमार सिंह, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट सवाल- क्या कोई ऐसा कानून है, जो कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन की गारंटी देता है? जवाब- संविधान के अनुच्छेद 39 (d) के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए। इस सिद्धांत को लागू करने के लिए समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 (Equal Remuneration Act, 1976) बनाया गया है। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि किसी कर्मचारी के लिंग, जाति, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर वेतन में कोई भेदभाव न किया जाए। सवाल- अगर मेरे साथ वेतन को लेकर भेदभाव हो रहा है तो मैं क्या कर सकता हूं? जवाब- ऐसे मामले में बिना किसी डर या झिझक के अपनी आवाज उठानी चाहिए। यह आपका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है कि मेहनत के मुताबिक सही वेतन मिले। असिस्टेंट वेलफेयर कमिश्नर रुद्र प्रकाश मिश्रा बताते हैं कि ऐसे मामलों में कर्मचारी कुछ कदम उठा सकते हैं। जैसेकि- सवाल- क्या प्राइवेट कंपनियों पर भी यह कानून लागू होता है? जवाब- हां, यह कानून प्राइवेट कंपनियों पर भी लागू होता है। ‘समान पारिश्रमिक अधिनियम’ का मकसद है कि सभी कर्मचारियों को बराबर काम के लिए बराबर वेतन मिले। इसलिए यह कानून सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की कंपनियों पर एक जैसा लागू होता है। सवाल- अगर कंपनी वेतन भेदभाव करती है तो उस पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- वेतन भेदभाव का मतलब है कि समान योग्यता, अनुभव और काम के आधार पर किसी कर्मचारी को दूसरे कर्मचारी की तुलना में कम वेतन दिया जाना। अगर कोई कंपनी वेतन में भेदभाव करती है तो यह कानून का उल्लंघन है और उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी इन विकल्पों का सहारा ले सकते हैं। श्रम विभाग में शिकायत कर्मचारी की शिकायत के आधार पर श्रम विभाग मामले की जांच करता है और जरूरत पड़ने पर कंपनी को नियमों का पालन करने का आदेश देता है। श्रम न्यायालय में केस कर्मचारी समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के तहत श्रम न्यायालय (Labour Court) में केस दर्ज कर सकते हैं। अगर कंपनी दोषी पाई जाती है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। मानवाधिकार या महिला आयोग में शिकायत
आयोग मामले की जांच कर सकता है और संबंधित विभाग या संस्था से रिपोर्ट मांग सकता है। अगर शिकायत सही पाई जाती है तो आयोग संबंधित विभाग/कंपनी को मुआवजा देने, न्याय दिलाने या प्रशिक्षण देने की सिफारिश कर सकता है। यह आयोग सीधे सजा नहीं दे सकता है, लेकिन इसकी सिफारिशों को सरकार और अदालतें गंभीरता से लेती हैं। सवाल- क्या कर्मचारी गोपनीय रूप से शिकायत कर सकता है? जवाब- हां, कोई भी कर्मचारी गोपनीय रूप से शिकायत कर सकता है। इसका मतलब है कि आपकी पहचान छुपाकर शिकायत की जा सकती है ताकि आपको किसी तरह का डर या नुकसान न हो। इसके लिए आप ये तरीके अपना सकते हैं। कई कंपनियां व्हिसलब्लोअर पॉलिसी लागू करती हैं, जिसमें कर्मचारी अपनी शिकायत गुप्त रूप से दर्ज कर सकते हैं। सवाल- अगर मैं शिकायत करता हूं तो क्या कंपनी मुझे नौकरी से निकाल सकती है? जवाब- नहीं, अगर आप वेतन भेदभाव या किसी अन्य समस्या की शिकायत करते हैं तो कंपनी आपको नौकरी से नहीं निकाल सकती है। ऐसा करना कानूनी रूप से गलत है। किसी कर्मचारी को केवल इसलिए निकाल देना या प्रताड़ित करना कि उसने शिकायत की है, इसे ‘रिटेलिएशन’ कहा जाता है। यह श्रम कानूनों के तहत एक गंभीर अपराध माना जाता है। अगर कोई कंपनी ऐसा करती है तो आप उसके खिलाफ श्रम न्यायालय में केस दर्ज कर सकते हैं। कोर्ट में आप पुनः नियुक्ति, मुआवजा और दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। ……………………… ये खबर भी पढ़िए… जानें अपने अधिकार- बिना टिकट पकड़े जाने पर घबराएं नहीं:ट्रेन में TTE नहीं कर सकता गिरफ्तार हम सभी ट्रेन से यात्रा करते हैं। सफर के दौरान अक्सर ही हमारा सामना TTE और RPF से होता रहता है। कई बार हम अनजाने में या किसी मजबूरी में बिना टिकट या गलत टिकट लेकर यात्रा करते हैं और पकड़े जाने पर घबरा जाते हैं। जबकि हमारे भी कुछ कानूनी अधिकार होते हैं। पूरी खबर पढ़िए…