अभी हिन्दी पंचांग का तीसरा महीना ज्येष्ठ चल रहा है और आज (7 जून) से इस महीने का दूसरा पक्ष शुक्ल शुरू हो हुआ है। ये महीना 22 जून तक रहेगा। ज्येष्ठ मास में अब गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे बड़े व्रत-पर्व मनाए जाएंगे। इस महीने में जल और छाते का दान करना चाहिए। जानिए ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं… उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्येष्ठ मास में रोज सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर दिन की शुरुआत करनी चाहिए। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। ज्येष्ठ मास में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत-पर्व मनाए जाते हैं। इस माह में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा करने की परंपरा है। घर में विष्णु जी के अवतार श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप बालगोपाल की प्रतिमा है तो ज्येष्ठ मास में बालगोपाल का विशेष अभिषेक करना चाहिए। रोज सुबह जल्दी उठें और घर के मंदिर में सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र और हार-फूल से श्रृंगार करें। दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। लड्डू का भोग लगाएं। गणेश पूजा के बाद श्रीकृष्ण की पूजा करें। श्रीकृष्ण को स्नान कराएं। पहले शुद्ध जल से फिर पंचामृत से और फिर शुद्ध जल से बालगोपाल को स्नान कराएं। इसके बाद वस्त्र, हार-फूल अर्पित करें। फल, मिठाई, जनेऊ, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, पान, दक्षिणा और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। चंदन का तिलक करें। धूप-दीप जलाएं। तुलसी के पत्ते डालकर माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। आप चाहें तो ऊँ नमो भगवते गोविन्दाय, ऊँ नमो भगवते नन्दपुत्राय या ऊँ कृष्णाय गोविन्दाय नमो नम: मंत्र का जप भी कर सकते हैं। कर्पूर जलाएं। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें। पूजा में हुई अनजानी भूल के लिए क्षमा याचना करें। इसके बाद अन्य भक्तों को प्रसाद बांट दें और खुद भी प्रसाद ग्रहण करें। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में कर सकते हैं ये शुभ काम भी