कोरोना महामारी के पहले फेज में भारत में करीब 1 लाख 48 हजार लोगों की मौत हुई थी। लेकिन अब नई रिपोर्ट्स ने सरकार के इन आंकड़ों को गलत साबित कर दिया है। अलजजीरा ने दुनियाभर के 10 बड़े डेमोग्राफर्स और इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि साल 2020 में भारत में 8 गुना ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के पहले फेज में भारत में करीब 12 लाख लोगों ने जान गंवाई थी। शुक्रवार को साइंस एडवांस पब्लिकेशन में यह रिपोर्ट छापी गई। इसे भारत सरकार की 2019-21 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आधार पर तैयार किया गया है। रिपोर्ट में जारी किए गए आंकड़े WHO के आंकड़ों से भी डेढ़ गुना ज्यादा हैं। रिसर्च के मुताबिक, 2020 में उच्च-जाति के हिंदुओं की औसत जीवन दर में 1.3 साल की गिरावट दर्ज की गई। वहीं अनुसूचित जाति के लोगों की औसत जीवन दर में 2.7 सालों की गिरावट आई। इसके अलावा भारत के मुस्लिम नागरिकों की जीवन दर पहले की तुलना में 5.4 साल घट गई। पुरुषों से ज्यादा महिलाओं पर असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना का असर पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में देखा गया। जहां एक तरफ पुरुषों की औसत जीवन दर 2.1 साल कम हो गई, वहीं महिलाओं में 3 साल की गिरावट दर्ज की गई। जबकि अगर पूरी दुनिया के आंकड़े देखे जाएं तो पुरुषों की जीवन दर में महिलाओं की तुलना में ज्यादा गिरावट आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में कोरोना के पहले फेज और 2021 में डेल्टा वेव के साथ आए दूसरे फेज के बाद देश में महामारी की वजह से 4.81 लाख लोगों की मौत हुई। WHO ने अपनी रिपोर्ट में इन आंकड़ों को गलत बताते हुए दावा किया कि भारत में असल में 20-65 लाख लोगों की मौत हुई थी, जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा था। सरकार ने WHO के डेटा को खारिज किया
मोदी सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज कर दिया थ। सरकार ने कहा था कि डेटा हासिल करने का UN का मॉडल गलत है और यह भारत पर सही तरह से लागू नहीं हो सकता। लेकिन खास बात यह है कि ये आंकड़े सिर्फ WHO के नहीं हैं। कई पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स ने भी लगातार भारत सरकार के डेटा को गलत बताया है। सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्ट के डायरेक्टर प्रभात झा के ने भी WHO के आंकड़ों को सही ठहराया। उन्होंने कहा, “हमने जो डेटा हासिल किया था, उसके मुताबिक भारत में कोविड-19 की वजह से करीब 40 लाख लोगों की मौत हुई थी। इनमें से 30 लाख की मौत डेल्टा वेव की वजह से हुई।” नई रिपोर्ट पर भारत सरकार की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इसके बाद सरकारी के आंकड़ों पर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। भारत में 27 जनवरी 2020 को मिला था पहला कोरोना केस
कोविड से दुनिया में करीब 70 लाख लोग मारे गए। 30 जनवरी 2020 को इसे ग्लोबल इमरजेंसी डिक्लेयर किया गया था। कोविड से सबसे ज्यादा लोग अमेरिका में मारे गए थे। भारत में इसका पहला केस केरल में 27 जनवरी 2020 को मिला था। देश में कोरोना मामलों की कुल संख्या 4.50 करोड़ के पार हो गई। वहीं वायरस से रिकवर होने वालों की संख्या बढ़कर 4.45 करोड़ (4,45,03,660) हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में रिकवरी रेट 98.81 प्रतिशत है। अब तक भारत में कोविड-19 से 5 लाख 33 हजार 596 लोगों की मौत हो चुकी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना का असर पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में देखा गया। जहां एक तरफ पुरुषों की औसत जीवन दर 2.1 साल कम हो गई, वहीं महिलाओं में 3 साल की गिरावट दर्ज की गई। जबकि अगर पूरी दुनिया के आंकड़े देखे जाएं तो पुरुषों की जीवन दर में महिलाओं की तुलना में ज्यादा गिरावट आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में कोरोना के पहले फेज और 2021 में डेल्टा वेव के साथ आए दूसरे फेज के बाद देश में महामारी की वजह से 4.81 लाख लोगों की मौत हुई। WHO ने अपनी रिपोर्ट में इन आंकड़ों को गलत बताते हुए दावा किया कि भारत में असल में 20-65 लाख लोगों की मौत हुई थी, जो पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा था। सरकार ने WHO के डेटा को खारिज किया
मोदी सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज कर दिया थ। सरकार ने कहा था कि डेटा हासिल करने का UN का मॉडल गलत है और यह भारत पर सही तरह से लागू नहीं हो सकता। लेकिन खास बात यह है कि ये आंकड़े सिर्फ WHO के नहीं हैं। कई पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स ने भी लगातार भारत सरकार के डेटा को गलत बताया है। सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्ट के डायरेक्टर प्रभात झा के ने भी WHO के आंकड़ों को सही ठहराया। उन्होंने कहा, “हमने जो डेटा हासिल किया था, उसके मुताबिक भारत में कोविड-19 की वजह से करीब 40 लाख लोगों की मौत हुई थी। इनमें से 30 लाख की मौत डेल्टा वेव की वजह से हुई।” नई रिपोर्ट पर भारत सरकार की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इसके बाद सरकारी के आंकड़ों पर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। भारत में 27 जनवरी 2020 को मिला था पहला कोरोना केस
कोविड से दुनिया में करीब 70 लाख लोग मारे गए। 30 जनवरी 2020 को इसे ग्लोबल इमरजेंसी डिक्लेयर किया गया था। कोविड से सबसे ज्यादा लोग अमेरिका में मारे गए थे। भारत में इसका पहला केस केरल में 27 जनवरी 2020 को मिला था। देश में कोरोना मामलों की कुल संख्या 4.50 करोड़ के पार हो गई। वहीं वायरस से रिकवर होने वालों की संख्या बढ़कर 4.45 करोड़ (4,45,03,660) हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में रिकवरी रेट 98.81 प्रतिशत है। अब तक भारत में कोविड-19 से 5 लाख 33 हजार 596 लोगों की मौत हो चुकी है।