ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक अपने पूर्व सहयोगी वीके पांडियन के सपोर्ट में आए हैं। उन्होंने उन दावों को खारिज किया है, जिनके मुताबिक पांडियन ने राज्य में BJD को विधानसभा चुनाव में हार दिलाने के लिए BJP से डील की थी। दरअसल ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 78 सीटें जीतकर पांच बार के सीएम पटनायक को सत्ता से बाहर किया था। बीजेडी को केवल 51 सीटें मिलीं। नवीन पटनायक ने सोमवार को सोशल मीडिया साइट X पर एक पोस्ट में कहा कि पूर्व ब्यूरोक्रेट पांडियन के बारे में मीडिया में जो भी बातें कहीं जा रही हैं, वे सभी गलत और निराधार हैं। इसके साथ उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट भी शेयर की, जिसमें पांडियन पर भाजपा से डील करने का दावा किया गया था। पटनायक बोले- पांडियन ने ईमानदारी से राज्य और पार्टी के लिए काम किया
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पंडियन ओडिशा में बीजेडी को कमजोर करने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सौदा करने की कोशिश कर रहे थे। इस रिपोर्ट को लेकर पंडियन ने तो कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन नवीन पटनायक उनके उनके बचाव में आ गए। नवीन पटनायक ने लिखा कि यह पूरी तरह से झूठ, प्रेरित, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण है। मैंने पहले भी कहा है कि पंडियन ने पूरी निष्ठा, कुशलता और ईमानदारी के साथ राज्य और पार्टी की सेवा की है। उन्हें इन्हीं गुणों के लिए जाना और सम्मानित किया जाता है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद पांडियन ने इस्तीफा दिया था
विधानसभा और लोकसभा चुनावों में राज्य में पार्टी की हार के लिए बीजेडी समर्थक पांडियन को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इसके चलते 8 जून को भी नवीन पटनायक ने सार्वजनिक तौर पर पंडियन का बचाव किया था। हालांकि इसके अगले ही दिन पंडियन ने सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया था। उन्होंने एक वीडियो जारी करते हुए संन्यास का ऐलान किया था। वीडियो में उन्होंने कहा, ”… मैंने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग करने का फैसला किया है। अगर मैंने इस यात्रा में किसी को ठेस पहुंचाई है तो मुझे खेद है। यदि मेरे खिलाफ चले अभियान के कारण BJD की हार हुई है तो मुझे खेद है।” पूरी खबर यहां पढ़ें… तमिलनाडु के पांडियन को बाहरी कहती आई है भाजपा
तमिलनाडु में जन्मे वीके पांडियन ने दिल्ली में अपनी पढ़ाई की थी। उन्होंने पंजाब कैडर के IAS अधिकारी के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। बाद में उड़िया महिला से शादी करने के बाद ओडिशा कैडर में ट्रांसफर ले लिया था। तमिलनाडु में होने के कारण भाजपा उन्हें ओडिशा की राजनीति में ‘बाहरी’ कहती रही है। ये खबरें भी पढ़ें… बीजेडी -भाजपा के बीच अंदरखाने कोई समझौता हुआ है?:पांडियन बोले- ऐसा होता तो भाजपा नेताओं की फौज क्यों उतारती, बीजेडी लड़ रही है और जीतेगी ओडिशा के चुनाव में जिस ‘शख्सियत’ की सबसे ज्यादा चर्चा थी, वे वी. कार्तिकेयन पांडियन थे। आईएएस की नौकरी से वीआरएस लेकर बीजेडी में शामिल हुए पांडियन पार्टी में पटनायक के बाद नंबर-2 थे। चुनाव में पांडियन ने बीजेडी की ओर से प्रचार की कमान संभाल रखी थी। इसके चलते भाजपा और कांग्रेस के सबसे ज्यादा निशाने पर भी वही रहे। चुनाव के दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से बीजेडी (बीजू जनता दल) और भाजपा के रिश्तों से लेकर पार्टी की योजनाओं और चुनौतियां पर खुलकर बात की थी। इस दौरान उन्होंने बीजेडी और भाजपा के बीच समझौता होने के दावों पर भी अपना पक्ष रखा था। पूरा इंटरव्यू यहां पढें… नवीन पटनायक बोले- पांडियन मेरे उत्तराधिकारी नहीं:उत्तराधिकारी का फैसला ओडिशा की जनता करेगी; पूर्व IAS पर सरकार के फैसले लेने का आरोप ओडिशा के पूर्व CM नवीन पटनायक ने विधानसभा चुनाव से पहले कहा कि वीके पांडियन मेरे उत्तराधिकारी नहीं हैं। बीजेडी में पटनायक का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसका फैसला ओडिशा की जनता करेगी। ANI को दिए इंटरव्यू में पटनायक ने कहा कि आपने देखा होगा कि पांडियन चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। वह मेरे उत्तराधिकारी नहीं हैं। दरअसल, राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच आरोप लगे थे कि पूर्व आईएएस और पार्टी नेता वीके पांडियन ही सरकार चला रहे हैं और सरकार से जुड़े फैसले ले रहे हैं। उन्हें नवीन का उत्तराधिकारी भी कहा गया। अगर बीजेडी जीतती है तो वे सीएम हो सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पंडियन ओडिशा में बीजेडी को कमजोर करने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सौदा करने की कोशिश कर रहे थे। इस रिपोर्ट को लेकर पंडियन ने तो कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन नवीन पटनायक उनके उनके बचाव में आ गए। नवीन पटनायक ने लिखा कि यह पूरी तरह से झूठ, प्रेरित, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण है। मैंने पहले भी कहा है कि पंडियन ने पूरी निष्ठा, कुशलता और ईमानदारी के साथ राज्य और पार्टी की सेवा की है। उन्हें इन्हीं गुणों के लिए जाना और सम्मानित किया जाता है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद पांडियन ने इस्तीफा दिया था
विधानसभा और लोकसभा चुनावों में राज्य में पार्टी की हार के लिए बीजेडी समर्थक पांडियन को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। इसके चलते 8 जून को भी नवीन पटनायक ने सार्वजनिक तौर पर पंडियन का बचाव किया था। हालांकि इसके अगले ही दिन पंडियन ने सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया था। उन्होंने एक वीडियो जारी करते हुए संन्यास का ऐलान किया था। वीडियो में उन्होंने कहा, ”… मैंने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग करने का फैसला किया है। अगर मैंने इस यात्रा में किसी को ठेस पहुंचाई है तो मुझे खेद है। यदि मेरे खिलाफ चले अभियान के कारण BJD की हार हुई है तो मुझे खेद है।” पूरी खबर यहां पढ़ें… तमिलनाडु के पांडियन को बाहरी कहती आई है भाजपा
तमिलनाडु में जन्मे वीके पांडियन ने दिल्ली में अपनी पढ़ाई की थी। उन्होंने पंजाब कैडर के IAS अधिकारी के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। बाद में उड़िया महिला से शादी करने के बाद ओडिशा कैडर में ट्रांसफर ले लिया था। तमिलनाडु में होने के कारण भाजपा उन्हें ओडिशा की राजनीति में ‘बाहरी’ कहती रही है। ये खबरें भी पढ़ें… बीजेडी -भाजपा के बीच अंदरखाने कोई समझौता हुआ है?:पांडियन बोले- ऐसा होता तो भाजपा नेताओं की फौज क्यों उतारती, बीजेडी लड़ रही है और जीतेगी ओडिशा के चुनाव में जिस ‘शख्सियत’ की सबसे ज्यादा चर्चा थी, वे वी. कार्तिकेयन पांडियन थे। आईएएस की नौकरी से वीआरएस लेकर बीजेडी में शामिल हुए पांडियन पार्टी में पटनायक के बाद नंबर-2 थे। चुनाव में पांडियन ने बीजेडी की ओर से प्रचार की कमान संभाल रखी थी। इसके चलते भाजपा और कांग्रेस के सबसे ज्यादा निशाने पर भी वही रहे। चुनाव के दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से बीजेडी (बीजू जनता दल) और भाजपा के रिश्तों से लेकर पार्टी की योजनाओं और चुनौतियां पर खुलकर बात की थी। इस दौरान उन्होंने बीजेडी और भाजपा के बीच समझौता होने के दावों पर भी अपना पक्ष रखा था। पूरा इंटरव्यू यहां पढें… नवीन पटनायक बोले- पांडियन मेरे उत्तराधिकारी नहीं:उत्तराधिकारी का फैसला ओडिशा की जनता करेगी; पूर्व IAS पर सरकार के फैसले लेने का आरोप ओडिशा के पूर्व CM नवीन पटनायक ने विधानसभा चुनाव से पहले कहा कि वीके पांडियन मेरे उत्तराधिकारी नहीं हैं। बीजेडी में पटनायक का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसका फैसला ओडिशा की जनता करेगी। ANI को दिए इंटरव्यू में पटनायक ने कहा कि आपने देखा होगा कि पांडियन चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। वह मेरे उत्तराधिकारी नहीं हैं। दरअसल, राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच आरोप लगे थे कि पूर्व आईएएस और पार्टी नेता वीके पांडियन ही सरकार चला रहे हैं और सरकार से जुड़े फैसले ले रहे हैं। उन्हें नवीन का उत्तराधिकारी भी कहा गया। अगर बीजेडी जीतती है तो वे सीएम हो सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…