आज (15 जुलाई, आषाढ़ शुक्ल दशमी) सुबह पुरी के गुंडिचा मंदिर से बहुड़ा यात्रा शुरू होगी। इस यात्रा में गुंडिचा से जगन्नाथ मंदिर तक महाप्रभु, बलभद्र और सुभद्रा के रथ वापस लौट आते हैं। इस साल जगन्नाथ रथयात्रा दो दिन चली थी। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से दशमी तिथि तक भगवान अपनी मौसी के यहां गुंडिचा मंदिर में ठहरते हैं। इस साल रथ यात्रा दो दिन क्यों चली थी? 7 जुलाई को यात्रा शुरू हुई और 8 जुलाई को भगवान के तीनों रथ गुंडिचा मंदिर पहुंचे थे। जगन्नाथ मंदिर के पंचांगकर्ता डॉ. ज्योति प्रसाद के मुताबिक, हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा एक दिन की होती है, लेकिन इस बार दो दिन की थी। इससे पहले 1971 में यह यात्रा दो दिन की थी। तिथियां घटने की वजह से ऐसा हुआ था। दरअसल, हर साल ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ को स्नान करवाया जाता है। इसके बाद वे बीमार हो जाते हैं और आषाढ़ कृष्ण पक्ष के 15 दिनों तक बीमार रहते हैं, इस दौरान वे दर्शन नहीं देते। 16वें दिन भगवान का श्रृंगार किया जाता है और नवयौवन के दर्शन होते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से रथ यात्रा शुरू होती है। इस साल तिथियां घटने से आषाढ़ कृष्ण पक्ष में 15 नहीं, 13 ही दिन थे। इस वजह से भगवान के ठीक होने का 16वां दिन द्वितीया पर था। इसी तिथि पर रथ यात्रा भी निकाली जाती है। 7 जुलाई को भगवान के ठीक होने के बाद की पूजन विधियां दिनभर चलीं। इसी दिन रथ यात्रा निकलना जरूरी था। इस वजह से 7 जुलाई की शाम को ही रथ यात्रा शुरू की गई। यात्रा सूर्यास्त तक ही निकाली जाती है। इसलिए रविवार को रथ सिर्फ 5 मीटर ही खींचा गया था। फिर 8 जुलाई को शेष यात्रा हुई और तीनों रथ गुंडिचा मंदिर पहुंचे थे। जानिए रथयात्रा से जुड़ी खास बातें…