सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी को घरों की तोड़फोड़ पर फटकार लगाई। यह मकान कानून की प्रक्रिया का पालन किए बगैर गिराए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कार्रवाई ने हमारी अंतरआत्मा हिला दी। डेवलपमेंट अधिकारियों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि आश्रय स्थल का अधिकार भी संविधान का अभिन्न हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपमेंट अथॉरिटी को आदेश दिया कि जिनके मकान गिराए गए हैं, उन्हें 6 हफ्तों के भीतर 10 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। प्रयागराज प्रशासन ने 2021 में गैंगस्टर अतीक की प्रापर्टी समझकर एक वकील, प्रोफेसर और 3 अन्य के मकान गिरा दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राइट टू शेल्टर नाम भी कोई चीज होती है। उचित प्रक्रिया नाम की भी कोई चीज होती है। इस तरह की कार्रवाई किसी तरह से भी ठीक नहीं है। इस खबर को अपडेट किया जा रहा है….