आज महाशिवरात्रि है। हम आपको 5 आसान स्टेप्स में शिव पूजा की विधि बता रहे हैं। ये पूजा दो मिनट में हो जाएगी। पूजा विधि उज्जैन, काशी और केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के मुख्य पुजारियों ने बताई है। जानिए शिव पुराण के अनुसार शिवरात्रि व्रत कैसे रखें, कैसे प्रकट हुआ शिवलिंग, किसने बनाया महामृत्युंजय मंत्र और इस मंत्र से जुड़ी रिसर्च। शिवरात्रि व्रत में अन्न नहीं खाया जाता, जानिए कैसे व्रत करें शिव विवाह नहीं, शिवलिंग के प्रकट होने का दिन है महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि को लेकर मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, लेकिन शिव पुराण सहित किसी भी ग्रंथ में इस बात का कोई जिक्र ही नहीं है। शिव पुराण में लिखा है कि फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष के चौदहवें दिन यानी चतुर्दशी तिथि पर पहली बार शिवलिंग प्रकट हुआ था। तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने शिवलिंग की पूजा की। इसी दिन को शिवरात्रि कहा गया। शिव पुराण के 35वें अध्याय में लिखा है कि शिव विवाह अगहन महीने के कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन हुआ था। ये तिथि इस साल 7 नवंबर को आएगी। शिवरात्रि पर शिव विवाह मनाने की परंपरा कब से शुरू हुई, इस बारे में लिखित जानकारी नहीं है। काशी और उज्जैन के विद्वानों का कहना है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में पार्वती का भी स्थान होता है। शिवरात्रि पर महादेव की पूजा रात में होती है। पार्वती के बिना शिव पूजन अधूरा रहता है, इसलिए इस रात को शिव-शक्ति मिलन के पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा। महामृत्युंजय मंत्र का विज्ञान: इस मंत्र के जाप से मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है
महाशिवरात्रि को लेकर मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, लेकिन शिव पुराण सहित किसी भी ग्रंथ में इस बात का कोई जिक्र ही नहीं है। शिव पुराण में लिखा है कि फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष के चौदहवें दिन यानी चतुर्दशी तिथि पर पहली बार शिवलिंग प्रकट हुआ था। तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने शिवलिंग की पूजा की। इसी दिन को शिवरात्रि कहा गया। शिव पुराण के 35वें अध्याय में लिखा है कि शिव विवाह अगहन महीने के कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन हुआ था। ये तिथि इस साल 7 नवंबर को आएगी। शिवरात्रि पर शिव विवाह मनाने की परंपरा कब से शुरू हुई, इस बारे में लिखित जानकारी नहीं है। काशी और उज्जैन के विद्वानों का कहना है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में पार्वती का भी स्थान होता है। शिवरात्रि पर महादेव की पूजा रात में होती है। पार्वती के बिना शिव पूजन अधूरा रहता है, इसलिए इस रात को शिव-शक्ति मिलन के पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा। महामृत्युंजय मंत्र का विज्ञान: इस मंत्र के जाप से मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है