माल्या बोले- जेटली को बताया था जा रहा हूं:मैं भगोड़ा नहीं, मुझे चोर कहना गलत; 6200 करोड़ के बदले बैंकों ने 14000 करोड़ वसूले

2 मार्च 2016 को जेनेवा में FIA मीटिंग के लिए लंदन जा रहा था। मैंने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को बताया कि मैं जा रहा हूं। लेकिन पासपोर्ट रद्द होने से मैं लंदन में ही अटक गया। मैं भगोड़ा नहीं, यह कोई एस्केप प्लान नहीं था। मुझे चोर कहना गलत है। यह कहना है कारोबारी विजय माल्या का जो 6,200 करोड़ रुपए के बैंक लोन फ्रॉड मामले में घिरे हैं। हालांकि ब्याज और अन्य शुल्क के साथ ये रकम करीब 9000 करोड़ रुपए होती है। इसके अलावा IDBI बैंक से 900 करोड़ रुपए के लोन डिफॉल्ट का मामला भी दर्ज है। नौ साल तक मीडिया से दूरी बनाने के बाद, माल्या ने हाल ही में यूट्यूबर राज शमानी के पॉडकास्ट में अपनी चुप्पी तोड़ी। इस चार घंटे की बातचीत में उन्होंने अपनी जिंदगी, बिजनेस, किंगफिशर एयरलाइंस के पतन, कर्मचारियों की बकाया सैलरी, और कानूनी लड़ाई पर खुलकर बात की। सवाल 1: विजय माल्या का बचपन और शुरुआती करियर कैसा था? जवाब: मेरा जन्म कोलकाता में हुआ, जहां मेरे पिता विट्ठल माल्या UB ग्रुप के चेयरमैन थे। बचपन सख्त अनुशासन में बीता। पिता ने कहा, “अगर मेहनत नहीं करोगे, तो मेरे बिजनेस में जगह नहीं।” सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीकॉम करने के बाद, मैं 400 रुपए महीने की तनख्वाह पर UB ग्रुप में ट्रेनी बना। 18 साल की उम्र में मुझे एक छोटी कंपनी का CEO बनाया गया। सवाल 2: माल्या ने UB ग्रुप और किंगफिशर को कैसे कामयाब बनाया? जवाब: ये रातोंरात नहीं हुआ। 1983 में 27 साल की उम्र में, पिता के निधन के बाद मैंने UB ग्रुप संभाला। किंगफिशर की पैकेजिंग को और आकर्षक किया, म्यूजिक और फैशन इवेंट्स को स्पॉन्सर किया, जिससे ब्रांड को खूब फोकस मिला। धीरे-धीरे सेल्स बढ़ने लगी। ये कोई जादू नहीं था। हमने मार्केटिंग सही की, और सेल्स अपने आप बढ़ गई। आज किंगफिशर बीयर 52% मार्केट शेयर रखती है। मैकडॉवेल्स नंबर 1 व्हिस्की को भी दुनिया का नंबर 1 व्हिस्की ब्रांड बनाया। 1988 में बर्जर पेंट्स खरीदकर उसे 25 देशों में फैलाया और मुनाफे में बेचा। सवाल 3: किंगफिशर एयरलाइंस की शुरुआत और पतन की वजह क्या थी? जवाब: 2005 में बेटे सिद्धार्थ के 18वें जन्मदिन पर किंगफिशर एयरलाइंस शुरू की, ताकि प्रीमियम फ्लाइंग अनुभव दे सकें। 2008 तक यह भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन बनी। लेकिन 2008 में ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस ने सब बिगाड़ दिया। इससे भारत में भी पैसों की तंगी हो गई। एविएशन सेक्टर को भारी नुकसान हुआ। मैंने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से कहा कि किंगफिशर को छोटा करना पड़ेगा, कुछ प्लेन और कर्मचारी कम करने होंगे, क्योंकि हम इतने मुश्किल हालात में काम नहीं कर सकते। लेकिन मुखर्जी ने कहा, नहीं, कनेक्टिविटी और नौकरियां जरूरी हैं। बैंकों से सपोर्ट मिलेगा, तुम एयरलाइन चलाओ। यहीं से मुश्किलें शुरू हुईं। किंगफिशर की नाकामी की सबसे बड़ी वजह सरकार थी। 2008 में क्रूड ऑयल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 140 डॉलर हो गई, जिससे एविएशन फ्यूल (ATF) बहुत महंगा हो गया। स्टेट गवर्नमेंट्स ने इस पर भारी सेल्स टैक्स लगाया, जिससे एयरलाइंस का खर्चा और बढ़ गया। हमनें सरकार से ATF को डिक्लेयर्ड गुड्स का दर्जा देने की मांग की, ताकि टैक्स कम हो, लेकिन सरकार ने नहीं माना। सरकार ने विदेशी निवेश की इजाजत नहीं दी। हमनें एतिहाद एयरलाइंस के CEO से किंगफिशर में निवेश की बात पक्की कर ली थी, लेकिन सरकार ने मंजूरी नहीं दी। 6 महीने बाद सरकार ने जेट एयरवेज को एतिहाद से निवेश की इजाजत दी, लेकिन हमें नहीं। इन सबने मिलकर किंगफिशर के लिए “परफेक्ट स्टॉर्म” बना दिया। ग्लोबल क्राइसिस, महंगा फ्यूल, और सरकारी नीतियों ने एयरलाइन को डुबो दिया। अगर हालात हमारे खिलाफ न होते, तो किंगफिशर आज इंडिगो और एयर इंडिया की तरह बड़ा होता। लेकिन बिजनेस में कभी जीत होती है, कभी हार।” सवाल 4: कर्मचारियों की बकाया सैलरी पर क्या कहेंगे? जवाब: मैं कर्मचारियों से दिल से माफी मांगता हूं, जिन्होंने किंगफिशर के बंद होने की वजह से अपनी नौकरी गंवाई या जिन्हें सैलरी नहीं मिली। मुझे बहुत दुख है कि ऐसा हुआ। मेरे पास कोई बहाना नहीं है, मैं पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। मेरे कर्नाटक हाई कोर्ट में कुछ पैसे जमा थे, और मैं चाहता था कि उससे कर्मचारियों की सैलरी दी जाए। लेकिन बैंकों ने इसका विरोध किया, और कोर्ट ने इजाजत नहीं दी। मैंने हर कोशिश की, लेकिन पैसे फ्रीज थे, मैं कुछ कर नहीं सका। सवाल 5: आपके 60वें जन्मदिन की पार्टी पर विवाद क्यों हुआ? जवाब: कुछ कर्मचारियों को गुस्सा था कि जब वो मुश्किल में थे, तब मैंने शानदार पार्टी की। देखो, एयरलाइन 2012 में बंद हो गई थी, और मेरा 60वां जन्मदिन दिसंबर 2015 में था। इन तीन सालों में मैं कर्मचारियों को पैसे देने के लिए कुछ नहीं कर सका, क्योंकि सारी संपत्ति फ्रीज थी। कर्मचारियों को देने के लिए जो भी पैसा मैं इंफ्यूज करता वो शायद बैंक ले लेते। मेरे वकीलों ने हर रास्ता ढूंढा, पर कुछ हो नहीं सका। सवाल 6: 2012 से 2015 के बीच क्या क्या हुआ? जवाब: मैंने कभी नहीं कहा कि मैं पैसे नहीं दूंगा। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में मेरे ऑफर दर्ज हैं। मैंने 2012 से 2015 तक बैंकों को चार बार सेटलमेंट का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। बैंकों ने मेरे 5,000 करोड़ के ऑफर को ठुकराया, क्योंकि वो 14,100 करोड़ वसूलना चाहते थे। अगर वो मेरा ऑफर मान लेते, तो उन्हें 5,000 करोड़ मिलते। अब उन्होंने मेरी संपत्ति बेचकर 14,100 करोड़ ले लिए। सवाल 7: बैंकों के लोन और रिकवरी पर क्या कहा? जवाब: माल्या ने डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) का सर्टिफिकेट दिखाया, जिसमें उनका कर्ज 6,203 करोड़ रुपए बताया गया। इसमें 11.5% ब्याज भी शामिल है। वो कहते हैं, “ये आधिकारिक कर्ज की रकम है। लोग 9,000 करोड़ की बात करते हैं, पर मुझे नहीं पता ये नंबर कहां से आया। 2019 में PM मोदी ने कहा कि 9000 करोड़ रुपए के कर्ज के बदले माल्या से 14,000 करोड़ रुपए वसूल किए गए। बैंकों ने मुझे कभी अकाउंट का स्टेटमेंट नहीं दिया। ये दुनिया में शायद पहला मामला है कि बैंक लोन लेने वाले को हिसाब नहीं देता। 2024 में वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया कि ED ने माल्या से 14,131.66 करोड़ की संपत्ति बैंकों को लौटाई। माल्या पूछते हैं, “उन्होंने कौन सी संपत्ति बेची? मुझे कुछ पता नहीं। मेरे वकीलों ने कई बार स्टेटमेंट मांगा, SBI के चेयरमैन को चिट्ठी लिखी, पर कोई जवाब नहीं।” सवाल 8: CBI और ED के आरोपों पर क्या कहना चाहेंगे? जवाब: CBI ने ब्रांड वैल्यूएशन और प्राइवेट जेट के “मिसयूज” का आरोप लगाया। ED ने 3,547 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का इल्ज़ाम लगाया। लेकिन एयरलाइन के 50% खर्चे विदेशी मुद्रा में थे, इसे मनी लॉन्ड्रिंग कहना बकवास है। IDBI को भी मैंने 900 करोड़ का लोन चुका दिया। सवाल 9: भारत क्यों छोड़ा और “भगोड़ा” टैग पर क्या कहेंगे? जवाब: लोग मुझे “भगोड़ा” कहते हैं, लेकिन ये सब गलत है। मैं 1988 से इंग्लैंड में रह रहा हूं और 1992 से मेरे पास वहां की परमानेंट रेजिडेंसी (ILR) है। नियमों के हिसाब से मैं भारत में सिर्फ 180 दिन ही रुक सकता हूं, इसलिए बार-बार बाहर आता-जाता था। मैं कोई भगोड़ा नहीं हूं, मैं तो 32 साल से यूके का रेजिडेंट हूं। मैंने फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली को बताया कि मैं लंदन जा रहा हूं। मैं संसद से एयरपोर्ट गया। मुझे जेनेवा में FIA वर्ल्ड काउंसिल की मीटिंग के लिए जाना था, जो महीनों पहले तय थी। मैंने जेटली से कहा कि बैंकों से मेरी सेटलमेंट की बात करवाओ, मैं वापस आऊंगा। लेकिन मीडिया में हंगामा मच गया। जेटली ने पहले मुलाकात से इनकार किया, फिर एक कांग्रेसी MP ने कहा, मैंने उन्हें साथ देखा। तब जेटली ने माना कि हां, एक छोटी-सी मुलाकात हुई। मैंने विदेशी पार्टनर्स के साथ शेयर बेचने की बात की ताकि बैंकों का कर्जा चुकाऊं। मैं ED को लिखा कि मुझे वक्त दो, मैं CBI के सामने पेश हो चुका हूं, आपके सामने भी आऊंगा। लेकिन तभी मेरा पासपोर्ट रद्द कर दिया गया। पासपोर्ट रद्द होने से मैं लंदन में ही अटक गया। मैंने कोई चोरी नहीं की। मैंने कभी पर्सनल लोन नहीं लिया, न ही किसी को धोखा दिया। बैंकों ने मेरी 14,100 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली, फिर भी चोर कहते हैं। एक तरफ मेरी संपत्ति जब्त करो, दूसरी तरफ चोर कहो, ये कैसे चलेगा? सवाल 10: भारत में बिजनेस की चुनौतियों पर आपकी क्या राय है? जवाब: मैं भारत की नौकरशाही को बिजनेस की बड़ी रुकावट मानता हूं। 29 राज्यों की अलग-अलग नीतियों से निपटना पड़ता था। राजनेता चुनाव में शराब, नकदी मांगते थे। मैंने सिर्फ शराब दी, क्योंकि मेरी कंपनी सबसे बड़ी थी। मैंने रिश्वत नहीं दी। सवाल 11: माल्या की आज की जिंदगी और भविष्य की योजनाएं क्या हैं? जवाब: मैं लंदन में छह कुत्तों के साथ समय बिताता हूं। मुझे कुत्ते बहुत पसंद हैं, मैं उनके साथ खूब खेलता हूं। मेरे पास कुछ क्लासिक कारें हैं, जिन्हें ठीक करने में मजा आता हैं। पास प्रॉपर्टी के बगल में एक ऑफिस भी है, जहां स्टाफ काम करता है। यहां मैं अपने चल रहे बिजनेस पर नजर रखता हूं। कोर बिजनेस अभी भी शराब और ब्रूअरी से जुड़ा है। मैं कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं। निष्पक्ष सुनवाई मिले, तो भारत लौटने पर विचार करूंगा। अगर जेल नसीब है, तो सामना करूंगा। सवाल 12: माल्या अपनी विरासत को कैसे देखते हैं? जवाब: मैं चाहता हूं कि लोग मुझे मेरे अच्छे कामों के लिए याद रखें, न कि किसी चोर के तौर पर। सवाल 13: माल्या के आध्यात्मिक विश्वास क्या हैं? जवाब: मैंने सबरीमाला और तिरुपति मंदिरों में सोना दान किया। मैं भगवान पर भरोसा करता हूं। अगर यह कठिन समय उनकी मर्जी है, तो मैं स्वीकार करता हूं। नोट: ये सवाल-जवाब राज शमानी के पॉडकास्ट पर आधारित है। माल्या के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई। पाठक सभी पक्षों को देखकर अपनी राय बनाएं।