सवाल– क्या खुद को प्यार करना सेल्फिश होना होता है? मेरी उम्र 40 साल है और मैं गाजियाबाद में अपनी मां और भाई-भाभी के साथ रहती हूं। मेरे भाई की कोई परमानेंट सिक्योर जॉब नहीं है। वो इधर-उधर कुछ ऑड जॉब्स करता रहता है। घर की आर्थिक जिम्मेदारी मैं ही उठाती हूं। अपने भाई के बेटे की स्कूल की फीस से लेकर उसके सारे खर्चों की जिम्मेदारी भी मेरे ही ऊपर है। मैं एक सरकारी बैंक में काम करती हूं। 20 साल की उम्र में पिताजी के गुजरने के बाद बड़ी होने के नाते घर की सारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ पड़ी, जिसे मैंने बिना शिकायत निभाया भी। मां और भाई के सारे खर्चे उठाए, भाई की शादी की। लेकिन घरवालों ने मेरी शादी के बारे में कभी नहीं सोचा। कभी बात उठी भी तो मैंने खुद ही मना कर दिया। मुझे लगता था कि अपने बारे में सोचना स्वार्थी होना है। मां भी मुझे यही एहसास करातीं। लेकिन अब धीरे-धीरे लगने लगा है कि मेरे अलावा सब अपनी दुनिया में खुश हैं। मेरी जरूरत उन्हें सिर्फ पैसों के लिए है। मैं कुछ दिन पहले अपने बैंक के लोगों के साथ नैनीताल घूमने जाना चाहती थी, लेकिन मेरी मां को ये बात पसंद नहीं आई। घरवालों को ऑफिस के अलावा मेरा कहीं आना-जाना पसंद नहीं। अब मुझे लगने लगा है कि वो मुझे पूरी तरह कंट्रोल करते हैं। मेरी मेंटल हेल्थ खराब रहने लगी है। मुझे हर वक्त थकान और उदासी महसूस होती है। कई बार मर जाने का ख्याल भी आता है। मैं क्या करूं। एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। जवाब– आपके मामले का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि आप एक टॉक्सिक फैमिली डायनैमिक का हिस्सा हैं, जहां आपके परिवार के सदस्य, विशेष रूप से आपके भाई और मां, आप पर आर्थिक और भावनात्मक रूप से बहुत अधिक निर्भर हैं। संभवतः आपका शोषण भी कर रहे हैं। वे आपकी व्यक्तिगत जरूरतों को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह एक को-डिपेंडेंसी की स्थिति को भी दर्शाता है, जहां आप अपनी जरूरतों से ज्यादा दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में लगी हुई हैं। आपके लक्षण, जैसे लगातार थकान, उदासी और मरने का विचार, ये सभी मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (MDD) के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा, आप में बर्नआउट के लक्षण भी दिख रहे हैं, जो लंबे समय तक अत्यधिक तनाव और जिम्मेदारियों के कारण होता है। आपके परिवार द्वारा आपकी छुट्टियों और बाहर जाने की इच्छा पर नियंत्रण रखना भावनात्मक शोषण का एक रूप है, जिससे आपकी आत्म-पहचान और ऑटोनॉमी पर नेगेटिव असर पड़ रहा है। सबसे पहले तो मैं आपसे ये कहना चाहता हूं कि सेल्फिश होना एक मिथ है, जिसे अक्सर उन लोगों पर थोपा जाता है, जो दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा करने की बजाय अपनी जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं। आपकी स्थिति में अपने लिए सोचना स्वार्थ नहीं है, बल्कि सेल्फ केयर और सेल्फ प्रोटेक्शन है। आपकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए यह बेहद जरूरी है। सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट आप जिस समस्या से गुजर रही हैं, उसकी इंटेंसिटी समझने के लिए आपको नीचे दिया गया सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट करना है। नीचे ग्राफिक में 10 सवाल हैं। इन सवालों को आपको 0 से 4 तक के स्केल पर रेट करना है और अंत में अपना टोटल स्कोर चेक करना है। आपके टोटल स्कोर से यह पता चलेगा कि आपके लिए सेल्फ हेल्प काफी होगी या आपको प्रोफेशनल मदद की जरूरत है। स्कोर का इंटरप्रिटेशन भी नीचे ग्राफिक में दिया है। सवालों को ध्यान से पढ़ें और अपना एसेसमेंट करें। सेल्फ हेल्प प्लान यह एक सेल्फ हेल्प प्लान है। इससे आपको खुद को प्रिऑरिटी देने, अपनी मेंटल हेल्थ का ख्याल रखने और अपनी फैमिली के साथ बेहतर बाउंड्री बनाने में मदद मिलेगी। सेल्फ केयर फैमिली के साथ संवाद शुरू करने, बाउंड्री बनाने से पहले आपको खुद पर काम करने की जरूरत है। अपना ख्याल रखने, अपनी फिजिकल-मेंटल हेल्थ के साथ अपनी खुशियों का ख्याल रखने की जरूरत है। पर्सनल सेल्फ मैनेजमेंट प्लान 1. खुद को प्राथमिकता देना 1. रेगुलर एक्सरसाइज: रोजाना कम-से-कम 30 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करें। जैसे रनिंग, वॉकिंग या योगा। इससे मूड को बेहतर करने और तनाव कम करने में मदद मिलेगी। 2. हेल्दी ईटिंग हैबिट: हेल्दी डाइट लें। प्रोसेस्ड फूड और शुगर का सेवन कम करें। 3. पर्याप्त नींद: हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद लेने की कोशिश करें। नींद की कमी मानसिक स्वास्थ्य को और खराब करती है। 4. शौक और रुचियां: उन गतिविधियों में समय बिताएं, जो आपको खुशी देती हैं। जैसे पढ़ना, संगीत सुनना, पेंटिंग करना या जो भी आपको पसंद हो। 5. माइंडफुलनेस और मेडिटेशन: ये आपको वर्तमान में रहने और नकारात्मक विचारों को कम करने में मदद करते हैं। आप ऑनलाइन गाइड या ऐप्स का उपयोग कर सकती हैं। 6. अपनी भावनाओं को स्वीकार करना: यह समझना महत्वपूर्ण है कि आपकी भावनाएं बिल्कुल वैलिड हैं। गुस्सा, निराशा और उदासी महसूस करना स्वाभाविक है। अपनी फीलिंग्स को एक डायरी में लिखें। उसे दबाएं नहीं बल्कि एक्सप्रेस करें। 7. सपोर्ट ग्रुप: अपना एक सपोर्ट ग्रुप बनाएं। समान अनुभवों से गुजर रहे लोगों के साथ जुड़ना आपको अकेला महसूस नहीं कराएगा। यह आपको नया नजरिया भी दे सकता है। 2. फैमिली के साथ बातचीत और बाउंड्री डिफेंस यह सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा हो सकता है, लेकिन आपकी मेंटल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है। बाउंड्री तय करें: यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है। सीमाएं यानी बाउंड्री वे नियम हैं, जो हम दूसरों के साथ अपने संबंधों में निर्धारित करते हैं। 1. फाइनेंशियल बाउंड्री: धीरे-धीरे अपने भाई और उसके परिवार पर होने वाले खर्चों को कम करने की योजना बनाएं। साफ बताएं कि आप किस हद तक मदद कर सकती हैं और क्या नहीं कर सकती हैं। उदाहरण के लिए आप कह सकती हैं, “मैं बच्चे की स्कूल फीस नहीं दे पाऊंगी। मैं सिर्फ उसकी ट्यूशन फीस दे सकती हूं।” शुरू में यह करना कठिन होगा, लेकिन ये करना बहुत जरूरी है। 2. टाइम बाउंड्री: अपने पर्सनल समय को प्राथमिकता दें। अगर आपकी मां या भाई आपसे कोई काम करने के लिए कहते हैं, जो आपके व्यक्तिगत काम या समय में बाधा डालता है, तो आप कह सकती हैं, “मैं अभी व्यस्त हूं, लेकिन बाद में इस बारे में बात कर सकती हूं” या “आज मेरे पास इसके लिए समय नहीं है।” 3. इमोशनल बाउंड्री: अपने आप को उनके भावनात्मक बोझ से बचाएं। यदि वे आपकी भावनाओं को कम आंकते हैं या आपको दोषी महसूस कराते हैं, तो तुरंत वहां से चली जाएं, बातचीत से पीछे हट जाएं। जो बात आपको दुख पहुंचाए या गलत लगे, उसमें शामिल न हों। सुनने से इनकार कर दें। स्पष्ट और सीधी बातचीत 1. तुम नहीं, मैं कहें: बातचीत में हमेशा “मैं” शब्द का इस्तेमाल करें। सीधे-सीधे अपनी बात कहें। भाषा में आरोप न हो। “तुम ये करते हो” या “तुमने ये किया” की जगह यह बताएं कि आप क्या करेंगी, आपको क्या महसूस हुआ। इसका एक उदाहरण नीचे ग्राफिक में दिया है। इससे आपको अपनी बात को स्पष्ट ढंग से फर्स्ट पर्सन में कहने में मदद मिलेगी। 2. दृढ़ रहें, आक्रामक न हों: अपनी जरूरतों को स्पष्ट और शांत तरीके से बताएं। चिल्लाने या बहस करने की जरूरत नहीं है। अपनी बात कहें। अगर वे नहीं मानते हैं, तो भी अपनी बात पर शांति से अड़ी रहें। 3. गिल्ट महसूस न करें : आपने अपने परिवार के लिए बहुत कुछ किया है। अब अपनी जरूरतों को प्रिऑरिटी देना आपका अधिकार है। याद रखें, यह स्वार्थ नहीं है। इससे आप मेंटली-फिजिकली बेहतर होंगी। भविष्य में आप दूसरों की मदद भी कर सकती हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। 4. फैमिली कंट्रोल से धीरे-धीरे बाहर आएं: यदि परिवार के सदस्य आपको कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं, तो धीरे-धीरे इसे अस्वीकार करना शुरू करें। जब आपकी मां ने नैनीताल जाने से मना किया, तो आप कह सकती थीं, “मां, मैं समझती हूं आपकी चिंता, लेकिन यह मेरी व्यक्तिगत यात्रा है और मैं जाना चाहती हूं।” इस तरह के छोटे कदम आपको अपनी स्वायत्तता वापस पाने में मदद करेंगे। 5. इमोशनल डिस्टेंस बनाएं: यदि परिवार के सदस्य आपकी सीमाओं का सम्मान नहीं करते या आपको लगातार नेगेटिव महसूस कराते हैं, तो उनके साथ बिताए समय को धीरे-धीरे कम करें। 3. जिम्मेदारियों के बोझ से बाहर निकलना यह एक लंबी प्रक्रिया होगी, लेकिन ऐसा करना संभव है। निष्कर्ष शुरू में यह बदलाव कठिन होगा, और आपके परिवार वाले इसका विरोध भी कर सकते हैं। वे आपको दोषी महसूस करा सकते हैं या आपको इमोशनली ब्लैकमेल करने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन आपको मजबूत और अपने प्रति ईमानदार और वफादार रहना होगा। आपका जीवन सबसे कीमती है। खुद को प्रिऑरिटी दें। एक मनुष्य के रूप में हम सबकी पहली जिम्मेदारी अपने प्रति है। यह स्वार्थ नहीं है। ये बात हमेशा याद रखें।
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ये खबर भी पढ़िए… मेंटल हेल्थ- बचपन में मम्मी–पापा ने मुझे छोड़ दिया:नाना–नानी ने पाला, नानी के जाने के बाद से मैं गहरे डिप्रेशन में हूं, मैं क्या करूं मैं 29 साल का हूं। जब मैं डेढ़ साल का था, तब मम्मी-पापा का तलाक हो गया। मम्मी ने दूसरी शादी कर ली और मुझे नानी के पास छोड़ दिया। पापा को मैंने 19 साल की उम्र तक देखा भी नहीं। दोनों ने कभी मुझसे संपर्क नहीं किया। मुझे नाना-नानी ने पाला, और नानी से मेरी गहरी भावनात्मक जुड़ाव था। दो साल पहले नाना की और छह महीने पहले नानी की मौत हो गई। तब से मैं गहरे डिप्रेशन में चला गया हूं। मैं क्या करूं? पूरी खबर पढ़िए…