प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार 7 जून को नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के संसदीय दल के नेता चुन लिए गए। पुरानी संसद (संविधान सदन) के सेंट्रल हॉल में सुबह 11 बजे शुरू हुई मीटिंग में NDA के 13 दलों के नेता शामिल हुए। मोदी ने अपने 72 मिनट के भाषण में NDA की अहमियत, विकास, डेमोक्रेसी और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। स्पीच में उन्होंने सबसे ज्यादा बार NDA (19) का नाम लिया। 13 बार भारत, 9 बार अलायंस, 6 बार 4 जून (नतीजे की तारीख), 5 बार EVM और 1-1 बार विपक्ष-इंडी गठबंधन का नाम लिया। नरेंद्र मोदी ने भाषण की शुरुआत भारत माता की जय के साथ की। उन्होंने सभागृह में मौजूद NDA घटक दलों के सभी नेताओं का आभार जताया। मोदी ने NDA को न्यू, डेवलप्ड, एस्पिरेशनल इंडिया बताया। कहा कि कुछ लोगों का काम चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना है, लेकिन EVM ने सभी को जवाब दे दिया। मोदी के भाषण की 11 बातें 1. नया दायित्व देने के लिए आभारी हूं, विश्वास का सेतु मजबूत
मेरे लिए खुशी की बात है कि इतने बड़े समूह को आज मुझे स्वागत करने का अवसर मिला है। जो साथी विजय होकर आए हैं, वे अभिनंदन के अधिकारी हैं, लेकिन जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया। न दिन देखा, न रात देखी, मैं संविधान सदन के इस सेंट्रल हॉल से सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम करता हूं। 2019 में जब मैं सदन में बोल रहा था, तब मैंने एक बात पर बल दिया था- विश्वास। आज जब एक बार फिर मुझे ये दायित्व देते हैं तो साबित होता है कि हम दोनों के बीच विश्वास का सेतु इतना मजबूत है कि यह अटूट रिश्ता विश्वास के धरातल पर है। 2. हमारा अलायंस सच्चे अर्थ में भारत की असली स्पिरिट है
यह रिश्ता सबसे बड़ा पूंजी होता है। यह पल भावुक करने वाला है। इसका जितना धन्यवाद करूं, उतना कम है। साथियों बहुत कम लोग इन बातों की चर्चा करते हैं, शायद उनको सूट नहीं करता होगा। लेकिन 22 राज्यों में लोगों ने एनडीए की सरकार बनाकर सेवा का मौका दिया है। हमारा ये अलायंस सच्चे अर्थ में भारत की असली स्पिरिट है, जो भारत का आत्मा है, भारत की जड़ों में जो रचा-बसा है, उसका प्रतिबिंब है। मैं इसलिए कह रहा हूं कि हमारे देश में 10 ऐसे राज्य हैं, जहां हमारे आदिवासी बंधुओं की संख्या निर्णायक रूप से है। इनमें से 7 राज्यों में एनडीए सेवा कर रहा है। 3. हिंदुस्तान की राजनीति में NDA जितना सफल कोई नहीं
हम सर्व पंथ समभाव के संविधान के प्रावधान को समर्पित हैं। गोवा हो या नॉर्थ ईस्ट हों, जहां बहुत बड़ी संख्या में ईसाई भाई-बहन रहते हैं, आज उन राज्यों में भी एनडीए के रूप में सेवा का अवसर हमें मिला है। प्री पोल अलायंस हिंदुस्तान की राजनीति के गठबंधन के इतिहास में इतना सफल कभी नहीं हुआ, जितना NDA हुआ है। यह गठबंधन की विजय है। हमने बहुमत हासिल किया है। कई बार कह चुका हूं, भले शब्द अलग होंगे, लेकिन भाव यह है कि सरकार चलाने के लिए बहुमत चाहिए लेकिन देश चलाने के लिए सर्वमत जरूरी होता है। 4. NDA राष्ट्र प्रथम, नेशन फर्स्ट की भावना से जुड़ा समूह है
एनडीए सत्ता हासिल करने का या सरकार चलाने के कुछ दलों का जमावड़ा नहीं है, यह राष्ट्र प्रथम, नेशन फर्स्ट की भावना से जुड़ा समूह है। यह भारत की राजनीतिक व्यवस्था में एक ऑर्गेनिक अलायंस है। यह मूल्य श्रद्धेय अटल जी, प्रकाश बादल, जॉर्ज फर्नांडीस, बाला साहेब जैसे लोगों ने जो बीज बोया, भारत की जनता ने विश्वास का सिंचन करके इसे वट वृक्ष बना दिया। हम सबके पास ऐसे महान नेताओं की विरासत है। हमने 10 वर्षों में इसे ही लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया है। इसमें कॉमन चीज नजर आती है, वो है गुड गवर्नेंस। सबसे अपने अपने कार्यकाल में देश को गुड गवर्नेंस दिया है। NDA कहते ही गुड गवर्नेंस इसका पर्यायवाची बन जाता है। 5. अगले 10 साल में विकास, क्वालिटी ऑफ लाइफ लाएंगे
चाहे मैं गुजरात में रहा, आंध्र में चंद्रबाबू या नीतीश बाबू ने बिहार में सेवा की, सबके केंद्र में गरीब का कल्याण रहा। देश ने एनडीए के गरीब कल्याण के, गुड गवर्नेंस के 10 साल को देखा है। मैं कह सकता हूं कि देश ने इसे जीया है। एनडीए सरकार के रूप में अगले 10 साल में, मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं। अगले 10 साल में। अगले 10 साल में विकास, क्वालिटी ऑफ लाइफ लाएंगे। सामान्य लोग खासतौर पर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के जीवन में सरकार का दखल जितना कम हो, लोकतंत्र की उतनी मजबूती है। हम विकास का नया अध्याय लिखेंगे। गुड गवर्नेंस का नया अध्याय लिखेंगे। सब मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे। 6. सब मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे
NDA और विस्तार से कहूं तो सदन में किसी भी दल का जनप्रतिनिधि होगा, मेरे लिए सब बराबर है। जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूं तो सदन में भी हमारे लिए सब बराबर हैं। यह भी एक कारण है जिस वजह से एनडीए 30 साल में आगे बढ़ा है। सबको गले लगाने में हमें कोई हिचक नहीं है। ग्रास रूट लेवल तक सबने मिलकर जो काम किया है, उसी ने हमें ऑर्गेनिक अलायंस के तौर पर विकसित किया है। जहां कम, वहां हम- इसे हर कार्यकर्ता ने जीकर दिखाया है। भारत के हर क्षेत्र का, भारत के हर नागरिक का जो एस्पिरेशन है, देश और रीजनल एस्पिरेशन का अटूट नाता होना चाहिए। इसके बीच में हवा तक गुजर न सके, इतना जुड़ाव होना चाहिए, तब देश आगे बढ़ सकता है। 7. दक्षिण भारत, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल का जिक्र, पवन कल्याण को बोले- ये आंधी है
इस चुनाव में जो मैंने देखा कि दक्षिण भारत में NDA ने नई राजनीति की शुरुआत की है। कर्नाटक और तेलंगाना में अभी-अभी सरकारें बनी थीं, लेकिन लोगों का विश्वास भंग हुआ और लोगों ने एनडीए को गले लगा लिया। तमिलनाडु की टीम को बधाई देना चाहूंगा। वहां कोई कैंडिडेट नहीं था, लेकिन कार्यकर्ता अपने झंडे को ऊंचा रखने में जुटे रहे। आज हम सीट नहीं जीत पाए, लेकिन हमारा वोट शेयर बढ़ा है। यह साफ दिखाता है कि कल क्या लिखा है। केरल में जम्मू-कश्मीर से भी ज्यादा कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया। कार्यकर्ताओं ने वहां पीढ़ियां खपा दीं। आज पहली बार संसद से हमारा प्रतिनिधि बनकर आया है। अरुणाचल में हमारी सरकार बनती रही है। सिक्किम में भी क्लीन स्वीप। आंध्र में चंद्रबाबू ने बताया कि हिस्टोरिकली ये हाईएस्ट है। यहां जो दिख रहा है न पवन (पवन कल्याण) यह पवन नहीं हैं, आंधी है। 8. ओडिशा देश के ग्रोथ इंजन में से एक होगा
महाप्रभु जगन्नाथ, मैं हमेशा मानता हूं कि ईश्वर के अनेक रूप होते हैं। लेकिन जब मैं महाप्रभु जगन्नाथ को याद करता हूं तो मानता हूं कि ये गरीबों के देवता हैं। वहां जो रेवोल्यूशन आया, उसे देखकर मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि आने वाले 25 साल महाप्रभु जगन्नाथ जी की कृपा से ओडिशा देश के विकास के ग्रोथ इंजन में से एक होगा। 9. विपक्ष पर तंज- EVM जिंदा है या नहीं
जब 4 जून के नतीजे चल रहे थे, तब मैं अपने काम में व्यस्त था, मुझे लोगों के फोन आए तो मैंने पूछा कि आंकड़े तो ठीक हैं, लेकिन ईवीएम जिंदा है या नहीं। कुछ लोगों का काम है कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल पर उठाते हैं। मुझे तो लग रहा था कि वे ईवीएम की अर्थी निकालेंगे, लेकिन EVM ने सबको जवाब दे दिया। EVM पर नहीं, बल्कि UPI पर भी सवाल उठाए गए। आधार को रोकने के लिए भी लोग सुप्रीम कोर्ट में गए। ये प्रगति के विरोधी, आधुनिकता के विरोधी इंडी अलायंस के लोग हैं। 10. देश को हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश भी हुई
जब 4 जून को नतीजे आए तो इस दौरान देश को हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश हुई। यहां इकट्ठा होना, वहां इकट्ठा होना, तमाम तरह से लोगों को बांटने का प्रयास किया। चुनाव ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए होता है, लेकिन तोड़ने की कोशिश हुई। साथियों मैं मानता हूं कि 2024 के लोकसभा के जो नतीजे हैं, दुनिया ये मानेगी कि यह NDA की महाविजय है। 11. 10 साल बाद भी कांग्रेस 100 के आंकड़े को नहीं छू पाई
देशवासी जानते हैं कि न हम हारे थे, न हारे हैं। 4 तारीख के बाद हमारा जो व्यवहार रहा है, वो दिखाता है कि हम विजय को पचाना जानते हैं। विजय के समय उन्माद पैदा नहीं होता है। हम पराजय का उपहास भी नहीं करते। यह हमारे संस्कार हैं। 10 साल बाद भी कांग्रेस 100 के आंकड़े को नहीं छू पाई। अगर 2014, 19 और 2024 के चुनाव को जोड़कर कहूं तो तीन चुनाव में इन्हें जितनी सीटें मिली हैं, उससे ज्यादा हमें इस चुनाव में मिली हैं।
मेरे लिए खुशी की बात है कि इतने बड़े समूह को आज मुझे स्वागत करने का अवसर मिला है। जो साथी विजय होकर आए हैं, वे अभिनंदन के अधिकारी हैं, लेकिन जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया। न दिन देखा, न रात देखी, मैं संविधान सदन के इस सेंट्रल हॉल से सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम करता हूं। 2019 में जब मैं सदन में बोल रहा था, तब मैंने एक बात पर बल दिया था- विश्वास। आज जब एक बार फिर मुझे ये दायित्व देते हैं तो साबित होता है कि हम दोनों के बीच विश्वास का सेतु इतना मजबूत है कि यह अटूट रिश्ता विश्वास के धरातल पर है। 2. हमारा अलायंस सच्चे अर्थ में भारत की असली स्पिरिट है
यह रिश्ता सबसे बड़ा पूंजी होता है। यह पल भावुक करने वाला है। इसका जितना धन्यवाद करूं, उतना कम है। साथियों बहुत कम लोग इन बातों की चर्चा करते हैं, शायद उनको सूट नहीं करता होगा। लेकिन 22 राज्यों में लोगों ने एनडीए की सरकार बनाकर सेवा का मौका दिया है। हमारा ये अलायंस सच्चे अर्थ में भारत की असली स्पिरिट है, जो भारत का आत्मा है, भारत की जड़ों में जो रचा-बसा है, उसका प्रतिबिंब है। मैं इसलिए कह रहा हूं कि हमारे देश में 10 ऐसे राज्य हैं, जहां हमारे आदिवासी बंधुओं की संख्या निर्णायक रूप से है। इनमें से 7 राज्यों में एनडीए सेवा कर रहा है। 3. हिंदुस्तान की राजनीति में NDA जितना सफल कोई नहीं
हम सर्व पंथ समभाव के संविधान के प्रावधान को समर्पित हैं। गोवा हो या नॉर्थ ईस्ट हों, जहां बहुत बड़ी संख्या में ईसाई भाई-बहन रहते हैं, आज उन राज्यों में भी एनडीए के रूप में सेवा का अवसर हमें मिला है। प्री पोल अलायंस हिंदुस्तान की राजनीति के गठबंधन के इतिहास में इतना सफल कभी नहीं हुआ, जितना NDA हुआ है। यह गठबंधन की विजय है। हमने बहुमत हासिल किया है। कई बार कह चुका हूं, भले शब्द अलग होंगे, लेकिन भाव यह है कि सरकार चलाने के लिए बहुमत चाहिए लेकिन देश चलाने के लिए सर्वमत जरूरी होता है। 4. NDA राष्ट्र प्रथम, नेशन फर्स्ट की भावना से जुड़ा समूह है
एनडीए सत्ता हासिल करने का या सरकार चलाने के कुछ दलों का जमावड़ा नहीं है, यह राष्ट्र प्रथम, नेशन फर्स्ट की भावना से जुड़ा समूह है। यह भारत की राजनीतिक व्यवस्था में एक ऑर्गेनिक अलायंस है। यह मूल्य श्रद्धेय अटल जी, प्रकाश बादल, जॉर्ज फर्नांडीस, बाला साहेब जैसे लोगों ने जो बीज बोया, भारत की जनता ने विश्वास का सिंचन करके इसे वट वृक्ष बना दिया। हम सबके पास ऐसे महान नेताओं की विरासत है। हमने 10 वर्षों में इसे ही लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया है। इसमें कॉमन चीज नजर आती है, वो है गुड गवर्नेंस। सबसे अपने अपने कार्यकाल में देश को गुड गवर्नेंस दिया है। NDA कहते ही गुड गवर्नेंस इसका पर्यायवाची बन जाता है। 5. अगले 10 साल में विकास, क्वालिटी ऑफ लाइफ लाएंगे
चाहे मैं गुजरात में रहा, आंध्र में चंद्रबाबू या नीतीश बाबू ने बिहार में सेवा की, सबके केंद्र में गरीब का कल्याण रहा। देश ने एनडीए के गरीब कल्याण के, गुड गवर्नेंस के 10 साल को देखा है। मैं कह सकता हूं कि देश ने इसे जीया है। एनडीए सरकार के रूप में अगले 10 साल में, मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं। अगले 10 साल में। अगले 10 साल में विकास, क्वालिटी ऑफ लाइफ लाएंगे। सामान्य लोग खासतौर पर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के जीवन में सरकार का दखल जितना कम हो, लोकतंत्र की उतनी मजबूती है। हम विकास का नया अध्याय लिखेंगे। गुड गवर्नेंस का नया अध्याय लिखेंगे। सब मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे। 6. सब मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे
NDA और विस्तार से कहूं तो सदन में किसी भी दल का जनप्रतिनिधि होगा, मेरे लिए सब बराबर है। जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूं तो सदन में भी हमारे लिए सब बराबर हैं। यह भी एक कारण है जिस वजह से एनडीए 30 साल में आगे बढ़ा है। सबको गले लगाने में हमें कोई हिचक नहीं है। ग्रास रूट लेवल तक सबने मिलकर जो काम किया है, उसी ने हमें ऑर्गेनिक अलायंस के तौर पर विकसित किया है। जहां कम, वहां हम- इसे हर कार्यकर्ता ने जीकर दिखाया है। भारत के हर क्षेत्र का, भारत के हर नागरिक का जो एस्पिरेशन है, देश और रीजनल एस्पिरेशन का अटूट नाता होना चाहिए। इसके बीच में हवा तक गुजर न सके, इतना जुड़ाव होना चाहिए, तब देश आगे बढ़ सकता है। 7. दक्षिण भारत, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल का जिक्र, पवन कल्याण को बोले- ये आंधी है
इस चुनाव में जो मैंने देखा कि दक्षिण भारत में NDA ने नई राजनीति की शुरुआत की है। कर्नाटक और तेलंगाना में अभी-अभी सरकारें बनी थीं, लेकिन लोगों का विश्वास भंग हुआ और लोगों ने एनडीए को गले लगा लिया। तमिलनाडु की टीम को बधाई देना चाहूंगा। वहां कोई कैंडिडेट नहीं था, लेकिन कार्यकर्ता अपने झंडे को ऊंचा रखने में जुटे रहे। आज हम सीट नहीं जीत पाए, लेकिन हमारा वोट शेयर बढ़ा है। यह साफ दिखाता है कि कल क्या लिखा है। केरल में जम्मू-कश्मीर से भी ज्यादा कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया। कार्यकर्ताओं ने वहां पीढ़ियां खपा दीं। आज पहली बार संसद से हमारा प्रतिनिधि बनकर आया है। अरुणाचल में हमारी सरकार बनती रही है। सिक्किम में भी क्लीन स्वीप। आंध्र में चंद्रबाबू ने बताया कि हिस्टोरिकली ये हाईएस्ट है। यहां जो दिख रहा है न पवन (पवन कल्याण) यह पवन नहीं हैं, आंधी है। 8. ओडिशा देश के ग्रोथ इंजन में से एक होगा
महाप्रभु जगन्नाथ, मैं हमेशा मानता हूं कि ईश्वर के अनेक रूप होते हैं। लेकिन जब मैं महाप्रभु जगन्नाथ को याद करता हूं तो मानता हूं कि ये गरीबों के देवता हैं। वहां जो रेवोल्यूशन आया, उसे देखकर मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि आने वाले 25 साल महाप्रभु जगन्नाथ जी की कृपा से ओडिशा देश के विकास के ग्रोथ इंजन में से एक होगा। 9. विपक्ष पर तंज- EVM जिंदा है या नहीं
जब 4 जून के नतीजे चल रहे थे, तब मैं अपने काम में व्यस्त था, मुझे लोगों के फोन आए तो मैंने पूछा कि आंकड़े तो ठीक हैं, लेकिन ईवीएम जिंदा है या नहीं। कुछ लोगों का काम है कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल पर उठाते हैं। मुझे तो लग रहा था कि वे ईवीएम की अर्थी निकालेंगे, लेकिन EVM ने सबको जवाब दे दिया। EVM पर नहीं, बल्कि UPI पर भी सवाल उठाए गए। आधार को रोकने के लिए भी लोग सुप्रीम कोर्ट में गए। ये प्रगति के विरोधी, आधुनिकता के विरोधी इंडी अलायंस के लोग हैं। 10. देश को हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश भी हुई
जब 4 जून को नतीजे आए तो इस दौरान देश को हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश हुई। यहां इकट्ठा होना, वहां इकट्ठा होना, तमाम तरह से लोगों को बांटने का प्रयास किया। चुनाव ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए होता है, लेकिन तोड़ने की कोशिश हुई। साथियों मैं मानता हूं कि 2024 के लोकसभा के जो नतीजे हैं, दुनिया ये मानेगी कि यह NDA की महाविजय है। 11. 10 साल बाद भी कांग्रेस 100 के आंकड़े को नहीं छू पाई
देशवासी जानते हैं कि न हम हारे थे, न हारे हैं। 4 तारीख के बाद हमारा जो व्यवहार रहा है, वो दिखाता है कि हम विजय को पचाना जानते हैं। विजय के समय उन्माद पैदा नहीं होता है। हम पराजय का उपहास भी नहीं करते। यह हमारे संस्कार हैं। 10 साल बाद भी कांग्रेस 100 के आंकड़े को नहीं छू पाई। अगर 2014, 19 और 2024 के चुनाव को जोड़कर कहूं तो तीन चुनाव में इन्हें जितनी सीटें मिली हैं, उससे ज्यादा हमें इस चुनाव में मिली हैं।