म्यांमार भूकंप- मरने वालों का आंकड़ा 2700 के पास:441 लोग अब भी लापता; 40 टन राहत सामग्री लेकर पहुंचे तीन भारतीय जहाज

म्यांमार में आए भीषण भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,719 हो गई है। सैन्य सरकार के मुताबिक ये आंकड़ा 3000 के पास जाने की आशंका है। वहीं, घायलों की संख्या 4500 से ज्यादा हो गई है। 441 लोग अब भी लापता हैं। आपदा के बाद सोमवार को 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। सैन्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए 6 अप्रैल तक देशभर में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। म्यांमार और थाईलैंड में 28 मार्च को 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था। यह 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप था। यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने यह आशंका जताई है कि मौत का आंकड़ा 10 हजार से ज्यादा हो सकता है। मंगलवार को भारतीय नौसेना के जहाज INS सतपुड़ा और INS सावित्री लगभग 40 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुंचे। इससे पहले 30 मार्च को INS कर्मुक और LCU 52 श्रीविजयपुरम से 30 टन राहत सामग्री के साथ रवाना हुए थे। ये भी आज यांगून पहुंच गए। राहत कार्यों को और मजबूत करते हुए, भारतीय नौसेना का जहाज INS घड़ियाल लगभग 440 टन राहत सामग्री लेकर भेजा जा रहा है, जिसमें चावल, खाद्य तेल और दवाइयां शामिल हैं। लोगों ने सड़कों पर रात गुजारी म्यांमार में सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित इलाका मांडले है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जहां 17 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर लोगों ने लगातार तीसरी रात घर सड़कों पर रात गुजारी, क्योंकि ज्यादातर लोगों के घर टूट चुके हैं। लोग भूकंप के बाद आ रहे आफ्टर शॉक्स से घबराए हुए हैं। चीनी मीडिया और पेरिस विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भूकंप में मारे गए लोगों में 3 चीनी और 2 फ्रांसीसी नागरिक भी शामिल हैं। अभी भी म्यांमार के ज्यादातर हिस्से में कम्युनिकेशन ठप रहने की वजह से नुकसान की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। भारत ने 5 खेप में भेजी राहत सामग्री
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारतीय नौसेना के जहाज INS सतपुड़ा और INS सावित्री ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत 30 टन रिलीफ सामग्री म्यांमार के यांगून बंदरगाह भेजे गए। इसके अलावा 118 सदस्यीय फील्ड हॉस्पिटल यूनिट आगरा से म्यांमार के मांडले शहर पहुंची। इससे पहले ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत ही भारत ने 5 खेप में मदद के लिए 85 टन से ज्यादा राहत सामग्री में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, सोलर लैंप, जनरेटर सेट और आवश्यक दवाएं भेजीं। UN ने म्यांमार को 43 करोड़ रुपए की मदद दी भीड़भाड़ और ट्रैफिक की वजह से रेस्क्यू में दिक्कत
सड़कों पर भीड़भाड़ और ट्रैफिक जाम की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किल आ रही है। कई मेडिकल इक्विपमेंट जैसे ट्रॉमा किट, ब्लड बैग, एनेस्थेटिक्स और जरूरी दवाओं के ट्रांसपोर्ट में बाधा हो रही है। यूरोपीय यूनियन (EU) ने म्यांमार को इमरजेंसी सहायता के तौर पर 2.7 मिलियन डॉलर (23 करोड़ रुपए) की मदद भेजी है। EU ने कहा कि इस मुश्किल हालात में हम म्यांमार के लोगों के साथ खड़े हैं। तस्वीरों में देखिए तबाही… भूकंप में नेपीदा एयरपोर्ट का एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर गिरा
म्यांमार भूकंप के चलते नेपीदा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर गिर गया। सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रहा है कि टावर जमीन से उखड़े हुए पेड़ की तरह गिरा हुआ है। भूकंप के समय टावर में मौजूद सभी लोगों का निधन हो गया। म्यांमार में 2 दिन में आए 3 भूकंप
म्यांमार में 2 दिन में 3 भूकंप आए। पहला भूकंप 28 मार्च को सुबह 7.7 तीव्रता, दूसरा 28 मार्च की ही रात 11.56 बजे 4.2 तीव्रता का और तीसरा भूकंप 29 मार्च को दोपहर 3:30 एक 5.1 की तीव्रता का आया। म्यांमार में ऐतिहासिक शाही महल मांडले पैलेस के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं, सागाइंग क्षेत्र के सागाइंग टाउनशिप में एक पुल भूकंप में पूरी तरह नष्ट हो गया। राजधानी नेपीता के अलावा क्यौकसे, प्यिन ऊ ल्विन और श्वेबो में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इन शहरों की आबादी 50 हजार से ज्यादा है। सागाइंग फॉल्ट की वजह से म्यांमार में आया भूकंप
म्यांमार में धरती की सतह के नीचे की चट्टानों में मौजूद एक बहुत बड़ी दरार है, जो देश के कई हिस्सों से होकर गुजरती है। यह दरार म्यांमार के सागाइंग शहर के पास से गुजरती है इसलिए इसका नाम सागाइंग फॉल्ट पड़ा। यह म्यांमार में उत्तर से दक्षिण की तरफ 1200 किमी तक फैली हुई है। इसे ‘स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट’ कहते हैं, जिसका मतलब है कि इसके दोनों तरफ की चट्टानें एक-दूसरे के बगल से हॉरिजॉन्टल दिशा में खिसकती हैं, ऊपर-नीचे नहीं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे दो किताबें टेबल पर रखी हों और उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ स्लाइड किया जाए। यह दरार अंडमान सागर से लेकर हिमालय की तलहटी तक जाती है और पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेट्स के हिलने-डुलने से बनी है। भारतीय प्लेट उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रही है, जिससे सागाइंग फॉल्ट पर दबाव पड़ता है और चट्टानें बगल में सरकती हैं। म्यांमार में कई बड़े भूकंप इसी सागाइंग ​​​​​​फॉल्ट की वजह से आए हैं। इससे पहले 2012 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आ चुका है। सागाइंग फॉल्ट के पास 1930 से 1956 के बीच 7 तीव्रता वाले 6 से ज्यादा भूकंप आए थे। भूकंप से जुड़ी ये 5 खबरें भी पढ़ें..