राज्यसभा की 12 सीटों के लिए 3 सितंबर को चुनाव:NDA के पास 101 सीटें, यह बहुमत के आंकड़े से 13 कम

राज्यसभा की 12 खाली सीटों के लिए 3 सितंबर को चुनाव होगा। चुनाव आयोग ने बुधवार को इसका ऐलान किया है। इन 12 सीटों में 2-2 सीटें असम, बिहार, महाराष्ट्र की हैं, जबकि 1-1 सीट हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, त्रिपुरा, तेलंगाना और ओडिशा की है। चुनाव के नतीजे 3 सितंबर शाम 5 बजे सामने आएंगे। राज्यसभा में सांसदों की कुल संख्या 245 है। फिलहाल राज्यसभा में 225 सांसद हैं, जबकि 20 सीटें खाली हैं। लिहाजा बहुमत का आंकड़ा 114 है। खाली सीट में जम्मू-कश्मीर से 4 और नामित सदस्यों की 4 सीटें हैं। इन सीट्स को छोड़कर बाकी 12 सीट पर चुनाव होगा। राज्यसभा में भाजपा के पास 86 सीटें और सहयोगी दलों को मिलाकर यानी NDA के पास 101 सीटें हैं। NDA की बहुमत के आंकड़े से 13 सीटें कम हैं। वहीं I.N.D.I.A गुट के पास 87 सीटें हैं। इंडिया ब्लॉक और NDA के इतर पार्टियों के पास 28 सीटें हैं। राज्यसभा में भाजपा की सीटें चार साल बाद 90 से कम
राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 114 है। NDA के पास जो 101 सीटें हैं, वह बहुमत के आंकड़े से 13 सीटें कम हैं। इस लिहाज से देखें तो सरकार को बिल पास कराने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 13 जुलाई को राज्यसभा में पार्टी के 4 मनोनीत सदस्य सेवानिवृत्त हो गए। इसके चलते चार साल बाद राज्यसभा में भाजपा की स्ट्रेंथ 90 से नीचे से चली गई है। 10 साल में 55 से 101 तक पहुंची भाजपा
राज्यसभा में भाजपा 10 साल में 55 से 101 तक पहुंच गई। भाजपा के 2014 में 55 और 2019 में 78 सांसद थे। जून 2020 में यह संख्या 90 हो गई। इसके बाद पार्टी ने 11 सीटें जीतीं। इससे सदस्यों की संख्या 101 तक पहुंच गई। 1990 के ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी पार्टी ने 100 का आंकड़ा पार किया था। कैसे खाली हुई हैं राज्यसभा की सीटें
राज्यसभा की कुल 20 खाली सीट में से जम्मू-कश्मीर से 4 और नामित सदस्यों की 4 सीटें हैं। 10 सीटें राज्यसभा सांसदों के लोकसभा चुनाव लड़ने और जीतने के कारण खाली हुई हैं। इसके अलावा एक सीट भारत राष्ट्र समिति (BRS) नेता के. केशव राव के कांग्रेस में जाने से खाली हुई है। दूसरी सीट ओडिशा से BJD सांसद ममता मोहंता के इस्तीफे के बाद खाली हुई। उन्होंने 31 जुलाई को पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दिया और भाजपा में शामिल हो गईं। NDA को 7 राज्यों से राज्यसभा सीट मिलने की उम्मीद
इन 12 सीट में से भाजपा और सहयोगी दलों को 7 राज्यों से सीटें मिलने की उम्मीद है। NDA के गणित के मुताबिक, उन्हें बिहार, महाराष्ट्र और असम से 2-2 और हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और त्रिपुरा से 1-1 राज्यसभा सीट मिल सकती है। वहीं माना जा रहा है कि जिन 4 लोगों को राज्यसभा में नॉमिनेट किया गया है, वे भी सरकार का समर्थन करेंगे, क्योंकि उन्हें उच्च सदन में सरकार ही लेकर आई है। सामान्य रूप से राज्यसभा में नामित सदस्य स्वतंत्र होते हैं, लेकिन परंपरागत रूप से वे उसी का समर्थन करते हैं, जिस दल ने उन्हें नॉमिनेट किया है। राज्यसभा में किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत होने का फायदा और नुकसान क्या है?
भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा का चुनाव इस तरह से होता है कि लोकसभा और राज्यसभा में किसी एक दल को एक समय पर स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल होता है। अगर किसी बड़े दल के पास स्पष्ट बहुमत होता है तो इसका फायदा यह है कि छोटे-छोटे क्षेत्रीय दलों या निर्दलीय सांसदों की अपने समर्थन के बदले अनुचित मांगों को लेकर सरकार से मोलभाव करने की स्थिति खत्म हो जाती है। हालांकि इसका नकारात्मक पहलू भी है। जब किसी एक दल के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगहों पर बहुमत हो तो संसदीय कामकाज में आम सहमति बनाने की स्थिति कम हो जाती है। बड़ी पार्टी अपने मन से फैसला लेती है। वह छोटे और दूसरे दलों से सलाह नहीं लेती है। यह लोकतंत्र के लिए सेहतमंद स्थिति नहीं है। 1989 तक कांग्रेस पार्टी के पास राज्यसभा में स्पष्ट बहुमत हुआ करता था। इस समय अधिकांश राज्यों में कांग्रेस की सरकार होती थी। 1989 से लेकर आज तक सभी सरकारों को राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधेयकों पारित कराने में छोटे-छोटे दलों को साधना पड़ा है या विपक्षी दलों के साथ मिलकर आम सहमति बनानी पड़ी है। ये खबर भी पढ़ें… अबकी बार NDA 300 से नीचे, क्या मुश्किलें आएंगी:संसद में कौन से बिल अटक सकते हैं; क्या-क्या नहीं कर पाएगी मोदी सरकार 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 3 जुलाई को खत्म हुआ। इस बार की लोकसभा थोड़ी बदली-सी दिखी। PM नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में पहली बार BJP बहुमत से नीचे सिमट गई। सहयोगी दलों को मिलाकर भी संख्या 293 ही पहुंची। दूसरी तरफ विपक्ष इस बार 234 सीटों के साथ काफी मजबूत है। पूरी खबर पढ़ें…