रिलेशनशिप- कुछ लोग हमेशा हर जगह लेट क्यों होते हैं:लेटलतीफी सिर्फ आलस नहीं, मनोवैज्ञानिक समस्या है, कैसे पाएं इस आदत से छुटकारा

किसी भी रेलवे स्टेशन पर जाएं तो कुछ लोग सिर पर बैग रखे सरपट दौड़ते नजर आ जाएंगे। चेकिंग काउंटर पर लाइन में आगे जाने के लिए लड़ते या फिर समय से ट्रेन तक पहुंचने के लिए कुली को एक्ट्रा पैसे देते भी मिल जाएंगे। इतनी कवायद के बाद भी उनकी ट्रेन छूट ही जाती है। लेकिन क्यों? क्या ट्रेन समय से पहले आकर चली गई या लोगों को ट्रेन की सही टाइमिंग मालूम नहीं थी। अपने देश में ट्रेन समय पर आ जाए, यही गनीमत है। समय से पहले पहुंचने और निकल जाने का तो सवाल ही नहीं उठता। दूसरी ओर, टिकट पर ट्रेन की टाइमिंग भी साफ-साफ अक्षरों में लिखी होती है। तमाम ऐसे ऐप हैं, जो ट्रेन का रियल टाइम लोकेशन बताते हैं। बावजूद इसके लोगों की ट्रेन छूट जाती है। दरअसल, ट्रेन किसी की नहीं छूटती। वे खुद लेट होकर पीछे छूट जाते हैं। ट्रेन आगे निकल जाती है। मुनीर नियाजी का वो एक प्रसिद्ध शेर है- ‘हमेशा देर कर देता हूं मैं।’ वो लिखते हैं, “ज़रूरी बात कहनी हो कोई वादा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूं मैं।” कुछ ऐसा ही हाल जिंदगी में लोगों का होता है। किसी से मिलने जाना हो या दफ्तर में जरूरी मीटिंग हो, सुबह वक्त पर उठना हो या रात में समय पर सोना, कुछ लोग हमेशा देर कर ही देते हैं। उन्हें अंग्रेजी में कहा जाता है- ‘लेट कमर्स।’ आज रिलेशनशिप कॉलम में देर होने की मनोवैज्ञानिक वजह और इससे बाहर निकलने के तरीके की बात करेंगे। किस्मत नहीं, खराब मैनेजमेंट से होती है देरी सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि लेट होना खराब किस्मत की बात नहीं। हमेशा लेट होने की आदत खराब मैनेजमेंट या जीवनशैली की ओर इशारा करती है। आमतौर पर यह भी देखा जाता है कि लेट होना लोगों के स्वभाव का हिस्सा बन जाता है। यानी एक ही शख्स ट्रेन पकड़ने में, दफ्तर जाने में, उठने या सोने में हर जगह देर कर देता है। यह एक तरह की मनोवैज्ञानिक समस्या बन जाती है। एक समय बाद यही लेटलतीफी जिंदगी का हिस्सा बन जाती है। फिर लोग चाहकर भी कहीं टाइम से नहीं पहुंच पाते। इससे फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें 10 बजे बुलाया गया है या 12 बजे, उनको देर हो ही जाती है। लेटलतीफी का एक कारण ADHD बीमारी जो इंसान लगातार लेट होने को आदत बना लेता है, काम को टालता है और वक्त पर काम पूरा नहीं कर पाता है तो उसे ADHD की शिकायत हो सकती है। अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) खराब एकाग्रता या अति सक्रियता या आवेगपूर्ण बर्ताव है, जो कामकाज या विकास में बाधक बनता है। यदि किसी को ADHD है तो उसे किसी जगह समय पर पहुंचने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सामान्य ADHD लक्षण, जैसे अव्यवस्था, असावधानी और समय की धारणा के साथ कठिनाइयां यानी टाइम ब्लाइंडनेस, ये सभी उसकी देरी का कारण बन सकते हैं। लेकिन लोगों में समय की पाबंदी की समस्या का एकमात्र कारण ADHD नहीं है। इसकी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। जिंदगी में टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी जिंदगी में टाइम मैनेजमेंट का बहुत बड़ा रोल है। इसे हम उस वक्त तो नहीं समझ पाते, जब हम लेट पर लेट हो रहे होते हैं और इसे आदत बना लेते हैं। लेकिन बाद में इसकी कीमत समझ आती है। डॉ. गाबोर माते अपनी किताब ‘स्कैटर्ड माइंड’ से में लिखते हैं कि देर होना असल में समय की कमी नहीं बल्कि गलत मैनेजमेंट का नतीजा है। अगर कोई हमेशा देर करता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी घड़ी तेज भाग रही है। असल समस्या उस शख्स के दिमाग में है, जिसमें देर करने, काम को टालने की आदत घर कर गई है। डायना डेलंजर अपनी किताब ‘नेवर बी लेट अगेन’ में लेटलतीफी दूर करने के लिए ये उपाय बताती हैं-