रिलेशनशिप- रिश्ते में सहमति क्यों जरूरी:सहमति कैसे मांगें और असहमति का सम्मान करना कैसे सीखें, एक्सपर्ट की 5 सलाह

आज के समय में समानता और सम्मान की बात हर जगह होती है। इसी चर्चा में ‘सहमति’ शब्द बार-बार सुनने को मिलता है। हालांकि, क्या हम सच में इसका मतलब समझते हैं? दरअसल, सहमति सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक एहसास है। यह एक-दूसरे की भावनाओं को समझने, सीमाओं का सम्मान करने का नाम है। हर किसी की अपनी सीमाएं होती हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि हम खुलकर बात करें और एक-दूसरे से पूछें कि उन्हें क्या ठीक लगता है और क्या नहीं। ऐसे में आज हम रिलेशनशिप कॉलम में जानेंगे कि- सहमति क्या है? जब हम सहमति की बात करते हैं, तो यह सिर्फ फिजिकल रिलेशंस की बात नहीं है, बल्कि हर उस चीज की बात है, जिसमें दो लोग शामिल हैं। साथ ही हर रिश्ते में सहमति का महत्व होता है। भले ही वह रिश्ता दोस्ती, प्यार या परिवार का हो। हालांकि, आमतौर पर सहमति का अर्थ किसी के साथ फिजिकल रिलेशन के लिए राजी होना होता है। सहमति क्यों जरूरी है? सहमति का मतलब है कि जब आप किसी के साथ कुछ करते हैं, तो दोनों लोगों का ‘हां’ कहना जरूरी है। इसका अर्थ है कि आप दोनों लोग वही करना चाहते हैं। हालांकि, अगर कुछ ऐसा है, जो आपको पसंद नहीं है, तो आपको ‘ना’ कहने का पूरा हक है और दूसरे व्यक्ति को आपकी बात माननी चाहिए। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसन में छपी एक स्टडी के मुताबिक, सहमति को लेकर बात करने से सिर्फ इमोशनल रिलेशन और फिजिकल रिलेशन ही अच्छे नहीं होते, बल्कि दोनों लोग सुरक्षित भी महसूस करते हैं। सहमति कैसे काम करती है? किसी के साथ किसी भी तरह का रिलेशन सहमति पर आधारित होता है। यह सहमति हाथ थामने, छूने, चूमने या सेक्सुअल रिलेशन बनाने तक हो सकती है। भले ही आप दूसरे व्यक्ति के साथ रिश्ते में हैं, लेकिन इसके बावजूद आपको और उन्हें इस बात के लिए एक-दूसरे सहमति लेनी चाहिए। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। आइए ग्राफिक्स को विस्तार से समझते हैं। सहमति बिना किसी दबाव या लालच के दी जाती है: सहमति पूरी तरह से स्वैच्छिक होनी चाहिए। किसी भी तरह का दबाव, धमकी या लालच सहमति को अमान्य बनाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति अपनी नौकरी बचाने के लिए यौन संबंध बनाने के लिए सहमत होता है, तो यह सहमति नहीं मानी जाएगी। यह किसी विशेष एक्टिविटी के लिए दी जा सकती है: किसी एक एक्टिविटी के लिए सहमति का मतलब यह नहीं है कि अन्य गतिविधियों के लिए भी सहमति दी गई है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति चुंबन के लिए सहमति देता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे यौन संबंध के लिए भी सहमत हैं। हर गतिविधि के लिए अलग-अलग सहमति होनी चाहिए। सहमति को कभी भी वापस लिया जा सकता है: कोई भी व्यक्ति किसी भी समय अपनी सहमति वापस ले सकता है, भले ही उन्होंने पहले सहमति दी हो। यदि कोई व्यक्ति कहता है कि वे रुकना चाहते हैं, तो दूसरे व्यक्ति को तुरंत रुक जाना चाहिए। ‘नहीं’ को अनदेखा करना या रुकने के अनुरोध का अनादर करना सहमति का उल्लंघन है। सहमति उदासीन नहीं होनी चाहिए: सहमति सिर्फ ‘हां’ या ‘नहीं’ से कहीं अधिक है। यह उत्साहपूर्वक होनी चाहिए, जिसमें दोनों पक्ष सहज और इच्छुक हों। एक अनिच्छुक ‘ठीक है’ या ‘मुझे नहीं पता’ को सहमति नहीं माना जा सकता है। सहमति को स्पष्ट रूप से और आत्मविश्वास से व्यक्त किया जाना चाहिए। सहमति मांगने का सही तरीका क्या है? सहमति मांगना भी एक रिलेशनशिप स्किल है, इससे हेल्दी रिलेशनशिप को बढ़ावा मिलता है। सहमति मांगते समय अपनी बात खुलकर संवेदनशीलता के साथ कहनी चाहिए। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। स्पष्ट रूप से पूछें: अस्पष्ट संकेतों या अनुमान पर भरोसा न करें। सीधे और स्पष्ट रूप से पूछें कि ‘क्या आप इसके साथ कंफर्टेबल हैं?’ साथी को ध्यान से सुनें: अपने साथी की प्रतिक्रिया को ध्यान से सुनें। उनकी बॉडी लैंग्वेज और फिजिकल संकेतों पर ध्यान दें। यदि वे असहज दिखते हैं, तो रुक जाएं। सम्मानजनक व्यवहार करें: यदि आपका साथी ‘नहीं’ कहता है, तो उनके निर्णय का सम्मान करें। दबाव न डालें या बहस न करें। याद रखें, ‘नहीं’ का मतलब ‘नहीं’ होता है। कभी भी ‘हां’ मान न लें: कभी भी यह न मान लें कि आपके साथी की पिछली सहमति भविष्य की सहमति को दर्शाती है। हर बार सहमति के बारे में पूछें। एक्शंस भी पहचानें: सहमति सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि प्रतिक्रियाओं से भी दिखनी चाहिए। अपने साथी की सीमाओं का सम्मान करें। उनकी भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहें। सहमति के बारे में बातचीत करें: सहमति के बारे में खुलकर और ईमानदारी से बात करें। अपनी सीमाओं और इच्छाओं को पार्टनर के साथ शेयर करें। अपने साथी की सीमाओं और इच्छाओं को भी सुनें और समझें। हमेशा सहमति लें: सहमति एक बार का सौदा नहीं है। हर बार जब आप फिजिकल रिलेशन में शामिल हो, तो साथी से सहमति लें। सहमति वापस लेने का अधिकार: याद रखें कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समय अपनी सहमति वापस ले सकता है। यदि आपका साथी कहता है कि वे रुकना चाहते हैं, तो तुरंत रुक जाएं। सहमति के लिए सुरक्षित वातावरण बनाएं: अपने साथी को सहज महसूस कराएं। उन्हें बताएं कि वे किसी भी समय ‘नहीं’ कह सकते हैं। उन्हें बताएं कि आप उनके निर्णय का सम्मान करेंगे। असहमति का सम्मान करना कैसे सीखें? समझौता करना सीखें: हर समय सब कुछ आपकी तरह नहीं हो सकता है। अपने साथी की जरूरतों को पूरा करने के लिए समझौता करने के लिए तैयार रहें। भावनाओं का ध्यान रखें: फिजिकल रिलेशन सिर्फ शारीरिक नहीं होता है, इसमें भावनाएं भी शामिल होती हैं। अपने साथी की भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहें। इगो पर न लें: अपने पार्टनर की ना को अपने इगो से जोड़कर देखने के बजाय उनकी भावनाओं से जोड़कर देखने की कोशिश करें। उनकी भावनाओं को समझें और सपोर्ट करें। एक्सपर्ट की मदद लें: यदि आपको फिजिकल रिलेशन में असहमति का सम्मान करने में कठिनाई हो रही है, तो पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें। थेरेपिस्ट या काउंसलर आपको और आपके साथी को हेल्दी रिलेशनशिप रखने में मदद कर सकते हैं।