किसी भी शुभ मौके पर निमंत्रण लेने और देने की अपने यहां बरसों पुरानी परंपरा है। शादी के कार्ड पर बड़े अरमान से लिखवाया जाता है- “भेज रहा हूं स्नेह निमंत्रण प्रियवर तुम्हें बुलाने को हे मानस के राजहंस तुम भूल न जाना आने को” या फिर कार्ड के नीचे बाल हठ होता है- ‘मेले चाचू की शादी में जलूल-जलूल आना।’ निमंत्रण में सिर्फ कार्ड भेज दिया जाए तो यह रिश्तेदारों की नाराजगी की पर्याप्त वजह हो सकती है। बहुत पुरानी बात नहीं, जब दोस्तों-रिश्तेदारों में घर का कोई आदमी पीले चावल और मिठाइयों के साथ शादी का कार्ड लेकर जाता था। शादी कब, कहां, कैसे और किस परिवार में हो रही है, सबका पूरा ब्यौरा देता था। फिर आग्रहपूर्वक शादी में आने के लिए कहा जाता था। लोग ऐसे न्योते को ठुकरा भी नहीं पाते थे। शादी के कुछ दिन पहले ही दूल्हे या दुल्हन के घर की शोभा बढ़ाने पहुंच जाते थे। शादी के कार्ड के चलन के पहले नाई देता था न्योता देश में शादी के कार्ड का दौर आने से पहले निमंत्रण भेजने के कई देसी तरीके हुआ करते थे। उत्तर भारत के गांवों में यह काम नाई करता था। वह घर-घर जाकर लोगों को शादी का निमंत्रण देता था। साथ ही वह दूल्हा-दुल्हन के खानदान, गांव, उनके चाल-चलन और आर्थिक स्थिति की भी जानकारी देता था। कई बार ये जानकारियां चुगलियों के तौर पर भी होती थीं। आप सोच रहे होंगे कि हम आज आपको न्योते की ये कहानियां क्यों सुना रहे हैं। यह चर्चा हालिया ग्रैंड शादी से जुड़ी है। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट शादी के बंधन में बंध चुके हैं। इस मेगा वेडिंग में देश और दुनिया की बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटीज को भी देखा गया। लेकिन बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू समेत कई बड़े चेहरे इस शादी से गायब नजर आए। हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में जब तापसी पन्नू से पूछा गया कि वो शादी में क्यों नहीं गईं तो उन्होंने वेडिंग न अटेंड करने का कारण बताया। तापसी की तरह ही कई लोग ऐसे हैं, जो यह मानते हैं कि शादी एक बहुत ही निजी कार्यक्रम होता है। जहां शादी वाले घर के लोगों का मेहमानों के साथ अच्छी बातचीत होना जरूरी है। कई लोग तो बिना व्यक्तिगत आमंत्रण के कार्यक्रम में शामिल तक नहीं होते। तो आज ‘रिलेशनशिप’ कॉलम में हम इसी पर बात करेंगे। इनविटेशन के साथ इंटेंशन भी है जरूरी शादी का निमंत्रण कब भेजना है, यह अक्सर कपल द्वारा पूछा जाने वाला पहला सवाल होता है। परंपरागत रूप से, निमंत्रण शादी से छह से आठ सप्ताह पहले भेजे जाते हैं। यह समय-सीमा मेहमानों को अपने शेड्यूल को खाली करने और जरूरत पड़ने पर यात्रा की व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय देती है। आज की डिजिटल दुनिया में ज्यादातर कपल ‘सेव-द-डेट’ कार्ड भी भेजते हैं ताकि उनके मेहमान सबसे पहले कैलेंडर में दिन को याद रख सकें। ‘सेव-द-डेट’ आमतौर पर शादी से छह से आठ महीने पहले भेजे जाते हैं। उसके बाद शादी का कार्ड भेजा जाता है। लेकिन फिर भी जब तक घर जाकर या फोन पर व्यक्ति खुद आमंत्रण न दे दे, कई लोग तब तक शादी में नहीं जाते। इसके साथ कार्ड भेजने वाले का इंटेंशन भी देखा जाता है कि वो कितने दिल से आपको न्योता दे रहा है। रिश्ते के दायरे को समझना है जरूरी दुनिया में तमाम तरह के रिश्ते होते हैं। कुछ अपने होते हैं तो कुछ कहने भर के अपने। कुछ रिश्ते सोशल मीडिया वाले होते हैं तो कुछ प्रोफेशनल। निमंत्रण लेने या देने में इन रिश्तों की सीमा का ख्याल रखना और उसी के अनुसार काम करना जरूरी है। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि हम जिसे निमंत्रण दे रहे हैं, उसके बारे में जानकारी हासिल कर लें। अगर हम किसी को अपने पारिवारिक फंक्शन में बुला रहे हैं तो इसका मतलब यह होना चाहिए कि वह शख्स किसी-न-किसी तरह हमसे या हमारे परिवार से जुड़ा हुआ है और उसका आना हमें थोड़ी खुशियां दे सकता है। अगर सिर्फ थोड़ी भी जान-पहचान हो तो ऐसे में भी उसके घर जाकर न्योता दिया जा सकता है या फोन पर बातचीत की जा सकती है। 1960 में मिलने लगे थे रंगीन शादी के कार्ड भारत में 19वीं सदी तक शादी के कार्ड बेरंग, सादे और आकार में छोटे होते थे। इनका मुख्य उद्देश्य बस शादी से जुड़ी जानकारी देना होता था। उसके बाद 1960 में रंगों का इस्तेमाल किया गया। रंगों का प्रयोग करने से कार्ड और आकर्षक बन गए। 1980 में भारतीय संस्कृति में रचे-बसे चित्रों और संकेतों जैसे भगवान गणेश का चित्र या श्री राधा-कृष्ण का प्रयोग होने लगा। अब तो कार्ड की डिजाइनिंग के साथ उनकी पैकेजिंग भी बहुत भव्य होती है। इनविटेशन देने का सही तरीका क्या है जब आपके कार्यक्रम के लिए निमंत्रण भेजने की बात आती है तो यह विचार करना जरूरी है कि ये आप डिजिटल माध्यम से भेज रहे हैं या खुद पर्सनली घर जाकर दे रहे हैं। डिजिटल इनविटेशन कार्ड अपनी सुविधा और कॉस्ट इफेक्टिवनेस के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। हालांकि, किसी के घर खुद कार्ड लेकर जाना व्यक्तिगत और अपना सा लगता है। आमंत्रण पत्र लिखते समय ध्यान रखने योग्य बातें-