ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख दुनिया को बताकर देश वापस लौटे 7 डेलिगेशन के 59 सदस्य थोड़ी देर में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। सांसदों, नेताओं और अन्य लोगों का प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर पहुंचना शुरू हो गया है। इस मुलाकात में सभी डेलिगेशन ग्रुप अपने विदेश दौरे में हुई बातचीत की जानकारी पीएम मोदी को देंगे। केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अलग-अलग पार्टियों के 59 सदस्य जिनमें 51 नेता और 8 राजदूत शामिल हैं। उन्हें 33 देशों की यात्रा पर भेजा था। सभी को 7 ऑल-पार्टी डेलिगेशन में बांटा गया था। पीएम आवास पहुंचने वाले नेताओं की तस्वीर… शशि थरूर का ग्रुप मंगलवार को भारत लौटा ऑल पार्टी डेलिगेशन का आखिरी ग्रुप भी मंगलवार को भारत लौट आया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में यह डेलिगेशन 5 देशों- अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया गया था। शशि थरूर ने दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की। उन्होंने कहा- जिन पांच देशों में हम गए थे, वहां हमारा स्वागत अच्छे से हुआ। हमनें उन देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और दूसरे सीनियर लीडर्स से हाई लेवल मीटिंग की। उन लोगों ने समझा कि पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर क्यों किया। थरूर ने कहा- केंद्र सरकार ने राजनीतिक सीमाओं से परे भारत की एकता का संदेश देने के लिए सभी दलों के सांसदों को विदेश भेजा था। हमने वह किया जो हमें करने के लिए कहा गया था और हम काफी खुश होकर घर लौट रहे हैं। थरूर ने आज शाम PM मोदी से मिलने को लेकर कहा, ‘हम बहुत खुश हैं कि प्रधानमंत्री हमसे मिलना चाहते हैं। हालांकि, यह कोई फॉर्मल मीटिंग नहीं होगी। जहां तक मुझे पता है कि हाई टी (शाम में चाय के साथ हल्का नाश्ता) होगा। PM सभी डेलिगेशन से अनौपचारिक तौर पर मिलेंगे।’ 7 डेलिगेशन ने दुनिया को 5 संदेश दिए विदेश मंत्री और डेलिगेशन ग्रुप्स के मुलाकात की तस्वीरें… पिछली सरकारों ने भी अपना पक्ष रखने के लिए डेलिगेशन विदेश भेजे- 1994: विपक्ष के नेता वाजपेयी ने UNHRC में भारत का पक्ष रखा था
ये पहली बार नहीं है, जब केंद्र सरकार किसी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए विपक्षी पार्टियों की मदद लेगी। इससे पहले 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय डेलिगेशन को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) भेजा था। उस डेलिगेशन में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और सलमान खुर्शीद जैसे नेता भी शामिल थे। तब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में UNHRC के सामने एक प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में था। हालांकि, भारतीय डेलिगेशन ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया और नतीजतन पाकिस्तान को अपना प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। उस समय UN में भारत के राजदूत हामिद अंसारी ने भी प्रधानमंत्री राव की रणनीति सफल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2008: मुंबई हमलों के बाद मनमोहन सरकार ने डेलिगेशन विदेश भेजा था
2008 में मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी आतंकवादी हमलों में पाकिस्तानी लिंक होने से जुड़े दस्तावेजों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के डेलिगेशन को विदेश भेजने का फैसला किया था। भारत ने पाकिस्तान पर सैन्य हमला न करने का फैसला किया था। हालांकि, मनमोहन सरकार के कूटनीतिक हमले के कारण पाकिस्तान पर लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकी समूहों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ा। यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को पहली बार ग्रे-लिस्ट में भी डाला था। ऑपरेशन सिंदूर क्या है
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने 26 टूरिस्ट्स की हत्या की थी। 7 मई को भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाक में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। सेना ने 100 आतंकियों को मार गिराया था। दोनों देशों के बीच 10 मई की शाम 5 बजे से सीजफायर पर सहमति बनी थी।
ये पहली बार नहीं है, जब केंद्र सरकार किसी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए विपक्षी पार्टियों की मदद लेगी। इससे पहले 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय डेलिगेशन को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) भेजा था। उस डेलिगेशन में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और सलमान खुर्शीद जैसे नेता भी शामिल थे। तब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में UNHRC के सामने एक प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में था। हालांकि, भारतीय डेलिगेशन ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया और नतीजतन पाकिस्तान को अपना प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। उस समय UN में भारत के राजदूत हामिद अंसारी ने भी प्रधानमंत्री राव की रणनीति सफल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2008: मुंबई हमलों के बाद मनमोहन सरकार ने डेलिगेशन विदेश भेजा था
2008 में मुंबई हमलों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी आतंकवादी हमलों में पाकिस्तानी लिंक होने से जुड़े दस्तावेजों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के डेलिगेशन को विदेश भेजने का फैसला किया था। भारत ने पाकिस्तान पर सैन्य हमला न करने का फैसला किया था। हालांकि, मनमोहन सरकार के कूटनीतिक हमले के कारण पाकिस्तान पर लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकी समूहों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ा। यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को पहली बार ग्रे-लिस्ट में भी डाला था। ऑपरेशन सिंदूर क्या है
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों ने 26 टूरिस्ट्स की हत्या की थी। 7 मई को भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाक में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। सेना ने 100 आतंकियों को मार गिराया था। दोनों देशों के बीच 10 मई की शाम 5 बजे से सीजफायर पर सहमति बनी थी।