आज (9 अगस्त) नागों की पूजा का महापर्व नाग पंचमी है। इस दिन नाग देव की प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए, जीवित सांप की पूजा करने से बचें। सांप दूध पचा नहीं सकते हैं, इसलिए सांपों को दूध नहीं पिलाना चाहिए। शिवलिंग पर स्थापित नाग देव की प्रतिमा का दूध से अभिषेक करना चाहिए। भारत में सांपों की 328 तरह की प्रजातियां हैं और मध्य प्रदेश में 48 तरह के सांप हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पौराणिक कथाओं के अनुसार नागों की उत्पत्ति कश्यप ऋषि और कद्रु से हुई है। महाभारत में बताया गया है कि ऋषि कश्यप और दक्ष पुत्री कद्रु से नागों का जन्म हुआ है। कद्रू और कश्यप से एक हजार नाग प्रजातियों का जन्म हुआ था। इनमें से आठ नाग प्रमुख थे। वासुकि, तक्षक, कुलक, कर्कोटक, पद्म, शंख, चूड़, महापद्म और धनंजय। वासुकि सभी नागों के बड़े भाई माने जाते हैं। वासुकि के अलावा तक्षक नाग का भी जिक्र भी शास्त्रों में कई जगह मिलता है। तक्षक नाग ने ही राजा परीक्षित को डंसा था। भारत में सांपों की 328 और मध्य प्रदेश में 48 प्रजातियां उज्जैन के सर्प अनुसंधान संस्थान के डायरेक्टर मुकेश इंगले ने बताया कि सांपों को दूध नहीं पिलाना चाहिए, क्योंकि ये एक मांसाहारी जीव है। सांप दूध पचा नहीं सकते। दूध की वजह से सांप को निमोनिया हो जाता है, जिससे वो मर सकता है। मुकेश इंगले 30 सालों से ज्यादा समय से सांपों पर रिसर्च कर रहे हैं। मुकेश बताते हैं कि दुनियाभर में सांपों की 3000 से अधिक प्रजातियां हैं। भारत में करीब 328 और मध्य प्रदेश में करीब 48 प्रजातियों के सांप हैं।