सावन में कौन-कौन से 8 शुभ काम कर सकते हैं:पूजा-पाठ के साथ ही नकारात्मक विचारों का भी करें व्रत, बुरी बातों से दूर रहें और शिव मंत्र जपें-लिखें

अभी सावन महीना चल रहा है, इस महीने में शिव पूजा करने की परंपरा है। भक्त भगवान शिव का पूजन, अभिषेक करते हैं, व्रत करते हैं। ये महीना न केवल धार्मिक अनुष्ठान करने का है, बल्कि आत्मशुद्धि करने का संदेश भी देता है। आयुर्वेद के अनुसार, मानसून में वात दोष की वृद्धि होती है, जिससे बेचैनी, थकावट और विचारों में अस्थिरता पैदा होती है। इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए सावन में पूजा-पाठ के साथ ही ध्यान करने का भी महत्व है। जानिए सावन में कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं… सावन में व्रत सिर्फ खाने से नहीं, बल्कि विचारों से भी करना चाहिए। इन दिनों में नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर मन को शांत रखें। ध्यान करें। ऐसा करने से सकारात्मकता बढ़ेगी और विचार पवित्र होंगे। अभी बारिश का समय है, कभी-कभी पूरे दिन धूप नहीं निकलती है, मौसम में नमी रहती है, ऐसे में हमारा पाचन अव्यवस्थित हो जाता है। इसलिए इन दिनों में सात्त्विक भोजन करना चाहिए। सावन में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, तले-भुने और मांसाहारी खाने का त्याग करें। इनकी जगह फल, नारियल, गाय का दूध और गाय के दूध से बने घी से बनी चीजें, घर के संतुलित खाने को प्राथमिकता दें। ये भोजन आसानी से पचता है। ये समय भावनाओं की शुद्धि का भी है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा है। शिवलिंग पर जल चढ़ाकर क्रोध, लालच, ईर्ष्या जैसे बुरे विचारों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। इन दिनों में पूजा-पाठ के साथ ही मंत्र जप और ध्यान करने का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ के लिए समय न हो तब भी कम से कम मंत्र जप तो जरूर करना चाहिए। ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जप कभी भी कर सकते हैं। सुबह टहलते-टहलते भी मंत्र जप कर सकते हैं। पूजा-पाठ और मंत्र जप के साथ ही कुछ देर शिव के नाम या शिव मंत्र लिखने का शुभ काम भी कर सकते हैं। मंत्र लिखते समय भगवान का ध्यान करें और बुरे विचारों को छोड़ने का संकल्प लें, ऐसा करने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है। घर-परिवार हो या समाज किसी भी बात के लिए तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देनीा चाहिए, पहले सोच-विचार करें और फिर कोई प्रतिक्रिया दें। सावन में पूजा-पाठ कर रहे हैं, भक्ति कर रहे हैं तो मौन को जीवन में उतारना चाहिए। विवाद के समय मौन रहेंगे तो नकारात्मक बातों से बच सकते हैं। भगवान शिव ऐसे भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं जो दूसरों की नि:स्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। अपने घर के आसपास दुखी लोगों की मदद करें। पेड़ को पानी दें, सार्वजनिक जगहों पर पौधे लगाएं और उनकी देखभाल करने का संकल्प लें। पूजा-पाठ के नजरिए से भक्त को सुबह ब्रह्ममुहूर्त में बिस्तर छोड़ देना चाहिए। सुबह जल्दी जागें और स्नान के बाद उगते सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद भगवान की पूजा करें। ऐसा करने से दिनभर सकारात्मकता बनी रहती है। जल्दी जागने से आलस भी दूर होता है और काम करने की ऊर्जा बनी रहती है।