सेहतनामा- ईशान किशन को क्यों हुआ ट्रैवल फटीग:क्या है ये हेल्थ कंडीशन, क्यों होता है जेट लैग, इससे कैसे उबर सकते हैं

स्टार इंडियन क्रिकेटर ईशान किशन लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। उनका पिछला IPL सीजन भी अच्छा नहीं गुजरा। इसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए क्रिकेट से ब्रेक ले लिया। अब उन्होंने अपने ब्रेक और खराब परफॉर्मेंस के पीछे कारण बताया है। ईशान ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में कहा कि वह ट्रैवल फटीग से जूझ रहे थे। ईशान किशन ने 16 अगस्त, 2022 को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट की, जिसका कैप्शन था, ‘फाइटिंग विद जेट लैग।’ हालांकि तब किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया था। ट्रैवल फटीग का मतलब है, यात्राओं के कारण हुई थकान। इसका एपिसोड बढ़ा दिया जाए, लक्षण थोड़े और गंभीर हो जाएं तो यह जेट लैग के लक्षणों में बदल जाता है। लंबी फ्लाइट ट्रैवलिंग के कारण हमारी बॉडी की नेचुरल क्लॉक (सकार्डियन रिद्म) डिस्टर्ब हो जाती है तो इसके परिणामस्वरूप थकान और सिरदर्द घेर लेते हैं। बॉडी के बायोलॉजिकल फंक्शन बिगड़ जाते हैं। इसका सबसे अधिक असर नींद पर पड़ता है और पूरी हेल्थ इससे प्रभावित होती है। आज ‘सेहतनामा’ में बात करेंगे ट्रैवल फटीग की। साथ ही जानेंगे कि- क्या होता है ट्रैवल फटीग? ट्रैवल फटीग का सीधा मतलब यात्रा के बाद हुई थकान से है। इसके चलते सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित न कर पाने की समस्या हो सकती है। ट्रैवल फटीग और जेट लैग दोनों अलग चीजें हैं और एक दूसरे से बहुत मेल भी खाती हैं। ईशान किशन और दूसरे एथलीट्स के मामले में ट्रैवल फटीग अक्सर जेट लैग के रूप में बदल जाते हैं, क्योंकि इन्हें खेल के लिए न सिर्फ दूसरे देश, बल्कि दूसरे महाद्वीप तक ट्रैवल करना पड़ता है। क्या होता है जेट लैग एक दिन में कुल 24 घंटे होते हैं। हमारा शरीर जलवायु और हमारे सोने-जागने के पैटर्न के हिसाब से इन 24 घंटों में एक सकार्डियन लय बना लेता है। इसे नेचुरल क्लॉक कह सकते हैं, जैसे हम रोज रात को 10 बजे सो रहे हैं तो उससे कुछ घंटे पहले तेजी से मेलाटोनिन बनना शुरू हो जाएगा ताकि नींद अच्छी आए। इसी तरह हमारे शरीर का तापमान, हार्मोनल लेवल और अन्य बायोलॉजिकल फंक्शन भी इसी नेचुरल घड़ी के हिसाब से बढ़ते और घटते हैं। जब हम फ्लाइट से कोई लंबी यात्रा करते हैं तो हमारी सकार्डियन लय बिगड़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इतनी लंबी ट्रैवलिंग से टाइम जोन और जलवायु बदल जाते हैं। इससे हमारी नींद प्रभावित होती है। इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है और मानसिक थकान भी बढ़ जाती है। ट्रैवल फटीग के क्या लक्षण हैं ट्रैवल फटीग में आमतौर पर गंभीर लक्षण देखने को नहीं मिलते हैं, लेकिन अगर कोई मेडिकल कंडीशन है तो ट्रैवल फटीग के कारण ट्रिगर हो सकते हैं। ईशान किशन लगातार बेंच पर थे। उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल रही थी। इसलिए उनकी एंग्जायटी बढ़ती गई। आइए ग्राफिक में देखते हैं ट्रैवल फटीग होने पर किस तरह के लक्षण दिखते हैं: क्यों होता है ट्रैवल फटीग हमें आमतौर पर किसी भी यात्रा के बाद थकान महसूस होती है। अगर लगातार यात्राएं कर रहे हैं तो इसका मन और शरीर पर भारी असर पड़ सकता है। वहीं अगर फ्लाइट से जाना है तो इसके लिए अक्सर सुबह की फ्लाइट पकड़ने के लिए बहुत जल्दी उठना पड़ता है। देर रात की फ्लाइट पकड़नी है तो देर तक जागना पड़ता है। इससे स्लीप साइकल डिस्टर्ब हो जाता है। नींद पूरी नहीं हो पाती है। अगर बार-बार इस तरह की यात्राएं करनी पड़ रही हैं तो इसका मतलब कई रातों की नींद गंवानी पड़ सकती है। एथलीट्स के साथ ऐसा अक्सर होता है। यही कारण है कि उन्हें कम नींद लेने के कारण मानसिक और शारीरिक थकान हो जाती है। इससे बचने के लिए अब कई टीमें अपने साथ स्लीप एक्सपर्ट लेकर जाती हैं। जेट लैग या ट्रैवल फटीग कैसे दूर करें जेट लैग या ट्रैवल फटीग का सबसे अधिक असर एथलीट्स और बिजनेसमैन पर पड़ता है। दोनों को ही अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस देनी होती है। दोनों ही लोगों के लिए बेस्ट एडवाइस है कि वे इस तरह फ्लाइट बुक करें कि डेस्टिनेशन प्लेस में शाम को पहुंचें। फिर रात में नींद पूरी करके सकार्डियन लय हासिल कर लें और अगले दिन फ्रेश मूड से अपने काम में जुट जाएं। इसके अलावा क्या कर सकते हैं, आइए ग्राफिक में देखते हैं: आइए ग्राफिक में दिए इन पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं: ट्रैवलिंग से पहले क्या करना है ट्रैवलिंग प्लान कुछ दिन पहले ही कर लें: जिस काम के लिए ट्रैवल कर रहे हैं, सुनिश्चित करें कि उससे पहले पर्याप्त नींद लें। इसलिए डेस्टिनेशन पर एक दिन पहले पहुंचें और अपनी नींद पूरी करें। इसके बाद जरूरी मीटिंग या मैच अटेंड करें, ताकि आप वहां पूरा फोकस रख पाएं। समय को बफर में लेकर चलें। ट्रैवलिंग स्ट्रेस कम करें: ट्रैवलिंग के लिए बैग पैक करने या हवाई अड्डे जाने के लिए आखिरी मिनट तक इंतजार न करें। जल्दबाजी करने से स्ट्रेस बढ़ सकता है और यह ट्रैवलिंग फटीग का कारण बन सकता है। साउंड स्लीप लें: जब कभी लंबे ट्रैवल पर निकल रहे हैं तो उससे पहले कम-से-कम कुछ रातों में साउंड स्लीप लें, ताकि ट्रैवलिंग से पहले ही नींद से वंचित न रहें। किसी भी ट्रैवल से पहले नींद को प्राथमिकता दें ताकि जब आप डेस्टिनेशन पर पहुंचें तो वहां अपना बेस्ट दे सकें। फ्लाइट में क्या करें हाइड्रेटेड बने रहें: फ्लाइट में अक्सर डिहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है, इससे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में लिक्विड्स और पानी पीते रहें। शराब और कैफीन का सेवन न करें: फ्लाइट में शराब और कैफीन का सेवन कम करें या उन्हें पूरी तरह अवॉइड करें। इससे डिहाइड्रेशन का जोखिम होता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। स्मार्टली खाएं: अगर यात्रा लंबी है और भूख लग रही है तो फ्लाइट में हेल्दी और हल्का खाना खाएं। इससे पाचन समस्याओं का खतरा कम होगा। बहुत भारी और हाई कैलोरी फूड, फैटी स्नैक्स की बजाय फ्रूट्स और वेजिटेबल्स बेहतर विकल्प हैं। कुछ देर खड़े होकर स्ट्रेच कर लें: अगर हम बहुत देर तक एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं तो ब्लड क्लॉटिंग का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए फ्लाइट के दौरान कुछ बार खड़े होकर धीरे से स्ट्रेचिंग करने से ये जोखिम कम हो सकते हैं। फ्लाइट से उतरने के बाद क्या करें एक्सरसाइज करें: फ्लाइट में सबसे बड़ी समस्या एक ही स्थिति में बहुत देर तक बैठे रहने की है। डेस्टिनेशन पर पहुंचकर कुछ देर टहलें या हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी के लिए समय निकालें। अगर दिन का समय है तो कुछ देर सूरज की रोशनी का आनंद लें, इससे सकार्डियन लय को पुन: व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। शराब, कैफीन और भारी भोजन से बचें: फ्लाइट में फिजिकल एक्टिविटी रुकने और नींद कम होने से हमारा पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है। इसे बेहतर करने के लिए अधिक कैफीन, शराब या भारी और कैलोरीयुक्त भोजन से बचें। छोटी नैप ले सकते हैं: नींद की कमी पूरी करने के लिए दिन में सोना अच्छा नहीं है। इससे सकार्डियन लय वापस हासिल करने में मुश्किल आएगी। इसलिए बेहतर है कि छोटी नैप लें। कोशिश करें कि यह 30 मिनट से कम ही रहे।