19 जुलाई यानी शुक्रवार को विकी कौशल की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘बैड न्यूज’ (Bad Newz) रिलीज हो रही है। फिल्म की कहानी में लीड एक्ट्रेस तृप्ति डिमरी प्रेग्नेंट हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि होने वाले बच्चे का पिता कौन है। यह जानने के लिए वह अपने दोनों सेक्स पार्टनर्स का पेटरनिटी टेस्ट करवाती हैं। टेस्ट रिजल्ट्स के बाद तो मामला और भी पेचीदा हो जाता है। टेस्ट में पता चलता है कि एक्ट्रेस दो बच्चों को जन्म देने वाली है और दोनों बच्चों के पिता अलग-अलग हैं। क्या यह मुमकिन है? बिलकुल मुमकिन है। मेडिसिन में इस रेयर कंडीशन को हेट्रोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन कहते हैं, यह सुपरफेटेशन (Superfetation) का सब टाइप है। इसमें पहले से एक प्रेग्नेंसी होने के बावजूद दूसरी प्रेग्नेंसी भी हो जाती है। आमतौर पर इंसानों में ऐसे मामले रेयर देखने को मिलते हैं, लेकिन जानवरों में यह काफी फ्रीक्वेंट है। आज ‘सेहतनामा’ में बात करेंगे सुपरफेटेशन की। साथ ही जानेंगे कि- क्या है सुपरफेटेशन सुपरफेटेशन एक बहुत रेयर कंडीशन है। जब एक प्रेग्नेंसी होने के बावजूद, दूसरी प्रेग्नेंसी भी हो जाए तो इसे सुपरफेटेशन कहते हैं। अगर कोई महिला प्रेग्नेंट है तो उसका शरीर ऐसे प्राकृतिक परिवर्तनों से गुजरता है कि उसके लिए एक प्रेग्नेंसी के साथ दूसरी प्रेग्नेंसी लगभग असंभव होती है। जब महिला के गर्भाशय में एक फर्टिलाइज्ड एग (भ्रूण) पहले से ही विकसित हो रहा होता है तो फिर से प्रेग्नेंसी का चांस लगभग खत्म हो जाता है। जबकि सुपरफेटेशन में नई प्रेग्नेंसी शरीर की उन प्राकृतिक बाधाओं और सीमाओं को दरकिनार कर देती है, जो प्रेग्नेंट महिला को फिर से प्रेग्नेंट होने से रोकती हैं। एक गर्भ में दो भ्रूण विकसित होने को लोग ट्विन्स प्रेग्नेंसी से कनफ्यूज कर सकते हैं, लेकिन ये दोनों अलग कंडीशंस हैं। सुपरफेटेशन ट्विन्स प्रेग्नेंसी से कितनी अलग कंडीशन है? सुपरफेटेशन प्रेग्नेंसी और ट्विन्स प्रेग्नेंसी दोनों अलग कंडीशन हैं, लेकिन ये कई मामलों में एक जैसी भी हैं। जुड़वां बच्चों की तरह सुपरफेटेशन में भी दो भ्रूण एक ही गर्भ में पल रहे होते हैं और एक-दूसरे के साथ-साथ विकसित हो रहे होते हैं। सुपरफेटेशन होने पर भी अक्सर दोनों बच्चों का जन्म एक ही समय पर होता है। ट्विन्स के मामले में दोनों बच्चे एक ही मेंस्ट्रुअल साइकल के होते हैं। जबकि इसके विपरीत सुपरफेटेशन में दोनों भ्रूण एक ही मेंस्ट्रुअल साइकल के दौरान नहीं बनते हैं। दोनों का साइकल अलग होता है। यही कारण कि सुपरफेटेशन में दोनों भ्रूण की गर्भ आयु अलग-अलग होती है। जो भ्रूण पहले कंसीव हुआ था, वह उस भ्रूण से पहले परिपक्व हो जाएगा, जो दूसरी बार कंसीव हुआ। ट्विन्स के मामले में दोनों भ्रूण एक साथ परिपक्व होते हैं। सुपरफेटेशन कितना आम है? इंसानों में सुपरफेटेशन इतना रेयर है कि पूरी दुनिया में इसके महज 10 मामले ही पुष्ट हुए हैं। ये इतने अनोखे केस हैं कि जब ऐसा कुछ होता है तो अक्सर सुर्खियों में आ जाता है। आपके सुपरफेटेशन होने की संभावना शून्य (Zero) के करीब है। सुपरफेटेशन के मामले मछलियों और छोटे मैमल्स जैसी अन्य प्रजातियों में अधिक आम हैं। सुपरफेटेशन के कारण किस तरह के कॉम्लिकेशन हो सकते हैं? सुपरफेटेशन में सबसे बड़ा कॉम्लिकेशन यह है कि प्रेग्नेंसी के दौरान दोनों बच्चे अलग-अलग स्टेज में बढ़ रहे होंगे। ऐसी कंडीशन भी बन सकती है कि एक बच्चा जन्म लेने वाला है तो वहीं दूसरा भ्रूण अभी तैयार नहीं हुआ है। इस स्थित में छोटे बच्चे का समय से पहले जन्म होने का जोखिम हो सकता है। सुपरफेटेशन में दोनों प्रेग्नेंसी अलग-अलग मेंस्ट्रुअल साइकल की होती हैं तो इनके बीच 3-4 हफ्तों का फर्क हो सकता है। ऐसे में बहुत संभावना होती है कि छोटे बच्चे का पूर्ण विकास नहीं हुआ होगा। प्रीमैच्योर बर्थ होने के कारण बच्चे को कुछ मेडिकल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं, आइए ग्राफिक में देखते हैं: इसके अलावा जो महिला एक से अधिक बच्चों को जन्म देने वाली है, उसे भी कुछ कॉम्प्लिकेशन होने का खतरा बढ़ जाता है। सुपरफेटेशन कैसे होता है? इंसानों में प्रेग्नेंसी के लिए महिला का एग स्पर्म द्वारा निषेचित (फर्टिलाइज्ड) होता है। इसके बाद निषेचित एग महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित हो जाता है। ऐसी ही स्थिति में अगर एक और पूरी तरह से अलग एग निषेचित होकर गर्भ में प्रत्यारोपित हो जाए तो सुपरफेटेशन की कंडीशन बन जाएगी। बैड न्यूज फिल्म में जिस तरह से नेचुरल इंटरकोर्स से सुपरफेटेशन की स्थित दिखाई गई है, वह लगभग असंभव है, क्योंकि नेचुरल इंटरकोर्स से सुपरफेटेशन के लिए तीन रेयर कंडीशंस का होना जरूरी है: गर्भावस्था के दौरान ओव्यूलेशन (अंडाशय से एग का बाहर निकलना): यह कंडीशन लगभग असंभव है क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान हो रही हार्मोनल प्रक्रिया ओव्यूलेशन नहीं होने देती है। एग स्पर्म द्वारा निषेचित होना चाहिए: इसकी भी संभावना नहीं के बराबर है क्योंकि एक बार जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उसकी ओवरी में सुरक्षा कवच की तरह एक म्यूकस प्लग बन जाता है। यह स्पर्म को एग तक पहुंचने के रास्ते में ही रोक देता है। निषेचित एग को पहले से गर्भवती महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित करने की आवश्यकता होती है: यह कंडीशन भी कठिन है क्योंकि प्रत्यारोपण के लिए कुछ हार्मोन्स का रिलीज होना आवश्यक है। जबकि अगर महिला पहले से ही गर्भवती है तो ये रिलीज नहीं होंगे। दूसरा सवाल दूसरे भ्रूण के लिए ओवरी में पर्याप्त जगह होने का भी है। इन तीन रेयर कंडीशंस का एक साथ घटित होना लगभग असंभव लगता है। हम सुपरफेटेशन से कैसे बच सकते हैं? पहली बात तो सुपरफेटेशन इतना रेयर है कि अगर कोई पहले से प्रेग्नेंट है तो इंटरकोर्स करने पर फिर से प्रेग्नेंट होने की संभावना लगभग न के बराबर होती है। फिर भी इस रेयर कंडीशन से बचना है तो इसका सबसे आसान उपाय है कि प्रेग्नेंसी के बाद इंटरकोर्स न किया जाए। अभी तक सुपरफेटेशन के जो मामले सामने आए हैं, उनमें ऐसा हुआ है कि किसी महिला ने IVF के जरिए कंसीव किया। जबकि वह उसके पहले ही नेचुरल इंटरकोर्स में प्रेग्नेंट हो चुकी थी। यह स्थिति भी सुपरफेटेशन का कारण बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि जब भी IVF के जरिए कंसीव करें, उससे पहले प्रेग्नेंसी की जांच जरूर करवा लें। इसके अलावा डॉक्टर ने जो परहेज बताए हैं, उनका पालन जरूर करें। सुपरफेटेशन और सुपरफेकंडेशन के बीच क्या अंतर है? असल में सुपरफेकंडेशन सुपरफेटेशन की ही एक सब कंडीशन है। इनके बीच फर्क ये हैं कि सुपरफेटेशन में दो अलग एंब्रियो एक गर्भ में पल रहे होते हैं, जो दो अलग-अलग मेंस्ट्रुअल साइकल के दौरान बने हैं। जबकि सुपरफेकंडेशन में एक ही मेंस्ट्रुअल साइकल के दौरान दो या दो से अधिक एग्स रिलीज हो जाते है। दोनों एग्स स्पर्म द्वारा निषेचित हो जाते हैं। ये स्पर्म एक ही सेक्स पार्टनर या दो अलग पार्टनर्स के हो सकते हैं। फिल्म में दिखाई गई कंडीशन सुपरफेकंडेशन से ज्यादा मेल खाती है। अगर फिल्म जैसी कंडीशन बनती है कि दोनों बच्चों के पिता अलग हैं तो दोनों बच्चों के स्किन कलर, बाल और चेहरे की बनावट एक-दूसरे से बहुत अलग हो सकते हैं। इसे हेट्रोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन कहते हैं।