इस साल मानसून अच्छा है। उम्मीद से बेहतर बारिश हो रही है। किसान खुश हैं कि फसल अच्छी होगी। गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिल गई है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी जारी कर दी है। WHO ने कहा है कि बारिश के मौसम में मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। यह समय मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए सबसे मुफीद होता है। इस दौरान इनके बिहेवियर और सर्वाइवल दोनों में तेजी से बदलाव आते हैं। इसलिए जरूरी है कि सावधानी बरती जाए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल लगभग 30 से 50 करोड़ मलेरिया के केस दर्ज होते हैं। इनमें करीब 6 से 8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। दर्ज किए गए कुल मामलों में लगभग 90% केस अकेले अफ्रीकी देशों के होते हैं। अगर सिर्फ दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत की स्थिति भी कमोबेश अफ्रीकी देशों जैसी है। दक्षिण एशिया में दर्ज मलेरिया के कुल मामलों में 77% तो सिर्फ भारत के होते हैं। रिकॉर्ड्स के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 20 लाख लोग मलेरिया से बीमार पड़ते हैं और इनमें 1000 लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन इन आंकड़ों से सहमत नहीं है। इनके साउथ ईस्ट एशिया रीजनल ऑफिस का अनुमान है कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1.5 करोड़ लोग मलेरिया से बीमार पड़ते हैं और इनमें 20 हजार लोगों की मौत हो जाती है। आज ‘सेहतनामा’ में मलेरिया की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- मलेरिया क्या है? मलेरिया एक गंभीर बीमारी है। यह पैरासाइट से संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। इस पैरासाइट को सभी मच्छर नहीं फैला सकते हैं। इसके लिए सिर्फ मादा एनाफिलिस मच्छर जिम्मेदार है। जब ये मच्छर हमें काटते हैं तो हमारे शरीर में पैरासाइट छोड़ देते हैं। दिल्ली के सीनियर फिजिशियन डॉ. बॉबी दीवान कहते हैं कि पैरासाइट हमारे शरीर में जाने के बाद लिवर में पहुंच जाते हैं, जहां वे मैच्योर हो जाते हैं। कुछ दिन बाद ये मैच्योर पैरासाइट ब्लड स्ट्रीम में प्रवेश कर जाते हैं और रेड ब्लड सेल्स को संक्रमित करना शुरू कर देते हैं। मलेरिया के लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के पहले हफ्ते से लेकर एक महीने के भीतर मलेरिया के सिंप्टम्स समाने आ सकते हैं। लेकिन कुछ मामलों में किसी भी तरह के सिंप्टम्स नजर नहीं आते हैं और ये पैरासाइट उस दौरान भी हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। सीवियर मलेरिया से बन सकती है लाइफ थ्रेटनिंग कंडीशन बदलते वक्त के साथ मलेरिया का इलाज बेहद आसान हो गया है, लेकिन कई बार समय पर इसकी पहचान और इलाज न हो तो लाइफ थ्रेटनिंग कंडीशन भी बन सकती है। कितने तरह का होता है मलेरिया? विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 5 तरह के पैरासाइट इंसानों में मलेरिया का कारण बनते हैं। इनमें प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम और प्लाज्मोडियम विवैक्स ज्यादा खतरनाक होते हैं। अगर मलेरिया के लिए इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाएंगे तो वे अक्सर इसे शॉर्ट फॉर्म में PV मलेरिया, PF मलेरिया बोलते हैं। अगर प्लाज्मोडियम विवैक्स या प्लाज्मोडियम ओवले के कारण मलेरिया हुआ है तो इसका असर तुरंत नहीं दिखता है। ये हमारे लिवर में जाकर आराम से रहते हैं। वहां मैच्योर हो जाते हैं, तब शरीर पर हमला करते हैं। हालांकि ऐसे मलेरिया के केस कम ही मिलते हैं। क्या है मलेरिया का इलाज? मलेरिया के लिए कोई भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इससे या तो बचाव किया जा सकता है या बीमार होने पर इलाज। इलाज में मलेरिया की कुछ दवाओं (एंटी मलेरिया ड्रग) के साथ बुखार की दवा दी जाती है। मलेरिया के इलाज में एंटी मलेरिया ड्रग लेने जरूरी होते हैं, लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं। अगर दवा खाने के बाद इस तरह के साइड इफेक्ट्स दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जैसे- क्या हैं मलेरिया से बचने के उपाय? मलेरिया में सबसे बड़ा रिस्क ये है कि आप यह नहीं पहचान सकते हैं कि कौन सा मच्छर मलेरिया फैलाने वाला पैरासाइट लेकर आ रहा है। अगर किसी ऐसी जगह पर हैं, जहां मच्छर ज्यादा हैं तो जरूरी है कि हम इनसे बचाव करें। ये उपाय कर सकते हैं: