स्मॉल कैप फंड में 20% से ज्यादा निवेश रिस्की:इसमें लम्बे समय के लिए डालें पैसा, इन 4 बातों का रखें ध्यान

तीन महीनों में स्मॉल कैप फंड में 21% गिरावट आ चुकी है। कई निवेशक, जो 2023 और 2024 के बुल रन के दौरान इस सेगमेंट को लेकर बहुत उत्साहित थे, आज काफी परेशान हैं। उन्हें इस दौर से बाहर निकलने के लिए एसेट एलोकेशन और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग के मंत्र अपनाने होंगे। लॉन्ग टर्म आउटलुक सकारात्मक
अप्रैल-सितंबर छमाही से छोटी कंपनियों की आय बढ़ने की उम्मीद है। ब्याज दरें घटने से भी इन्हें मदद मिलेगी। इसके चलते लंबी अवधि में स्मॉलकैप सेक्टर में रिकवरी हो सकती है । एक सेगमेंट में ज्यादा निवेश जोखिम भरा
स्मॉलकैप शेयर जैसे हाई बीटा फंड तेजी के दौरान आम रुझान से ज्यादा तेज बढ़ते हैं, लेकिन मंदी के दौरान ये ज्यादा गिरते भी हैं। अभी किसी भी एक सेगमेंट में ज्यादा निवेश से बचें। स्मॉलकैप के मौजूदा निवेशक ये करें
लंबी अवधि के लिए भी स्मॉलकैप में निवेश इक्विटी पोर्टफोलियो के 20% तक ही सीमित रखें। इससे ज्यादा निवेश हो तो कम कर लें। ऐसे शेयरों से पूरी तरह बाहर निकलने में समझदारी नहीं है। नए निवेशक अभी स्मॉलकैप से बचें
पहली बार इक्विटी में निवेश करने वाले लोगों को स्मॉलकैप फंड से बचना चाहिए। इसकी जगह उन्हें लार्जकैप, फ्लेक्सी-कैप या इंडेक्स फंड (लार्जकैप इंडेक्स पर आधारित) में निवेश करना चाहिए। एक बार जब वे बाजार की अस्थिरता अच्छी तरह समझ लें तो स्मॉलकैप फंड पर विचार कर सकते हैं। कम से कम सात साल के नजरिये के साथ इन फंड्स में निवेश करना चाहिए। स्मॉल-कैप फंड क्या हैं?
स्मॉल-कैप म्यूचुअल वैसे फंड होते हैं, जो छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं। यानी ऐसी कंपनियां जिनके शेयरों की वैल्यू काफी कम है। इन्हें हम स्मॉलकैप कंपनियां कहते हैं। हालांकि, शेयर बाजार में लिस्टेड ऐसी कंपनियों के कारोबार में बेहतर ग्रोथ की संभावनाओं का आकलन करने के बाद ही इनकी पहचान की जाती है। मार्केट कैप के लिहाज से शेयर बाजार की शीर्ष 250 कंपनियों को छोड़कर बाकी में स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड निवेश करते हैं। स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड अपने निवेश की रकम का 65% तक छोटी कंपनियों में लगाते हैं। इसके बाद बची 35% रकम को फंड मैनेजर मिड या लार्ज कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं।