बोधगया (बिहार)
16 दिसम्बर से 18 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय आचार्यकुल सम्मेलन और काव्य महाकुम्भ की तैयारियां जोरों पर

इस सम्मेलन में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विचारकों, शिक्षाविदों, कवियों/कवियत्रियों का होगा जमावड़ा।
महाकुंभ सम्मेलन में शामिल होने को लेकर उत्साहित गोण्डा उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कवि साहित्यकार यमराज मित्र सुधीर श्रीवास्तव (संरक्षक/प्रशासक- रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच भारत) ने सम्मेलन की विशेषताओं के बारे में बताया कि तीन दिन तक शैक्षिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक बयार बहेंगी। बोधगया की पावन धरती आचार्य विनोबा भावे के दिव्य विचारों और साहित्यिक काव्य धारा की विभिन्न विधाओं से गूंजेंगी।
महाकुंभ को आचार्य डॉ धर्मेंद्र देव तिवारी राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्यकुल, पूर्व कुलपति आरा विश्वविद्यालय एवं वर्तमान मे कुलाधिपति आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय रायबरेली, उत्तरप्रदेश (भारत), भारत सरकार से पंजीकृत संस्थान, और डॉ शिवनाथ सिंह "शिव" रायबरेली संस्थापक रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच समूह (भारत), कुलपति आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय रायबरेली उत्तर प्रदेश (भारत), राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ इंद्र बहादुर सिंह "इन्द्रेश भदौरिया, कई राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शिव कुमार सिंह 'शिव' दुसौती, कुलसचिव आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय रायबरेली उत्तर प्रदेश,(भारत), कई सम्मानों से सम्मानित डॉ राम लखन वर्मा कवि, मीडिया प्रभारी/पत्रकार तथा अन्य पदाधिकारियों एवं आचार्यकुल प्रबन्धन द्वारा कार्यक्रम की पूरी तैयारी को अंतिम रूप प्रदान किया जा रहा है।
सम्मेलन के विचारणीय विषयों में आध्यात्मिकता और व्यक्तिगत विकास, सामाजिक न्याय और समानता, पर्यावरण और सतत विकास, शिक्षा और नवाचार, भारतीय दर्शन और आधुनिक चुनौतियाँ, महिला सशक्तिकरण और लिंग समानता, महिला स्वास्थ्य और कल्याण के अलावा आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय प्रमुख हैं।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में देश विदेश के बहुत सारे मूर्धन्य विद्वानों द्वारा इन विषयों और लोकहित के अन्य मुद्दों पर विस्तृत शोधपत्र प्रस्तुत किये जा सकते हैं।
कार्यक्रम का उदघाटन माननीय राज्यपाल (बिहार) द्वारा किए जाने की सम्भावना है। उक्त वैचारिक और साहत्यिक कार्यक्रम में देश विदेश के शिक्षाविद, वर्तमान और पूर्व कुलपति और उपकुलपति तथा शासन प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हों सकते हैं।
जय हिन्द,जय हिंदी,जय बिहार!