रविवार, 6 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन है, इस दिन श्रीराम का प्रकट उत्सव भी मनाया जाएगा। त्रेतायुग में चैत्र शुक्ल नवमी पर भगवान विष्णु अयोध्या में राजा दशरथ के यहां पुत्र बनकर राम अवतार के रूप में प्रकट हुए थे। श्रीराम ने अपने जीवन से हमें संदेश दिया है कि हमें हर स्थिति में अपनी मर्यादाएं बनाए रखनी चाहिए। कभी भी अधर्म का रास्ता नहीं चुनना चाहिए। श्रीराम ने एक प्रसंग में संदेश दिया है कि हालाता कभी भी बदल सकते हैं, हमें हर स्थिति को सकारात्मक सोच के साथ अपनाना चाहिए। प्रसंग के अनुसार राजा दशरथ ये तय कर चुके थे कि राम को अयोध्या का राजपाठ सौंपना है, राम को राजा बनाना है। अयोध्या में राम जी के रात तिलक की तैयारियां शुरू हो गई थीं। सभी लोग बहुत प्रसन्न थे। कैकयी राम से बहुत स्नेह रखती थीं और वह राजा दशरथ से हमेशा कहती भी थीं कि राम को राजा बना देना चाहिए। राज तिलक से पहले वाली रात दासी मंथरा ने कैकयी की बुद्धि फेर दी। जब राज तिलक से पहले राजा दशरथ रानी कैकयी के महल में गए तो कैकयी ने अपने दो पुराने वरदान में पहला, भरत को राज्य और दूसरा, राम को वनवास मांग लिया। दशरथ ने कैकयी को समझाने की कोशिश की कि राम बहुत सहज है, वह भरत को राजा बनाने से वैसे ही प्रसन्न हो जाएगा तो उसे वन क्यों भेज रही हो? कैकयी ने दशरथ की एक बात नहीं सुनी और अपनी जिद पर अड़ी रही। इसके बाद दशरथ ने राम को बुलाया। जब राम दशरथ और कैकयी के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि पिता बदहाल से हैं और मां कैकयी गुस्से में हैं। राम ने इसकी वजह पूछी तो कैकयी ने कहा कि तुम्हारे पिता को मेरे दो वचन पूरे करने हैं। ये वचन तुमसे संबंधित हैं। तुम्हारे पिता इसी वजह से दुखी हैं। राम ने कहा कि मेरी वजह से मेरे माता-पिता दुखी हो हैं तो ये मेरे लिए अच्छी बात नहीं है। आप बताइए मुझे क्या करना है? कैकयी ने कहा कि पहली बात तो ये है कि भरत को राजा बनाना है और दूसरी बात ये है कि तुम्हें 14 वर्षों के लिए तपस्वी बनकर वनवास जाना होगा। ये बात सुनकर राम ने मुस्कान के साथ कहा कि इतनी सी बात पर मेरे पिता दुखी हो गए। भरत राजा बनेगा ये तो बहुत अच्छी बात है। अगर मुझे मेरे माता-पिता की आज्ञा का पालन करने का अवसर मिल जाए तो ये मेरा सौभाग्य होगा। वन में मुझे कई ऋषि-मुनियों के दर्शन मिलेंगे। अलग-अलग लोगों से मुलाकात होगी। मैं आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए तैयार हूं। उस समय दशरथ ने कहा था कि ये राम है, किसी भी स्थिति में विचलित नहीं होता है। श्रीराम की सीख भगवान राम ने हमें सीख दी है कि हालात कभी भी बदल सकते हैं। हालात अच्छे हों या बुरे, हमें हर स्थिति में सकारात्मक रहना चाहिए। हमें भी विपरीत परिस्थितियों में भी ये देखना चाहिए कि इसमें हमारे लिए अच्छा क्या है, तभी जीवन में सुख-शांति और सफलता मिल सकती है।