मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में रहने वाले ललित पाटीदार को वेयरवुल्फ सिंड्रोम (Werewolf Syndrome) है। इसके कारण उनके पूरे शरीर और चेहरे पर लंबे घने बाल हैं। चेहरे पर बालों के चलते कुछ लोग उन्हें हनुमान का अवतार मानते हैं तो कुछ लोग बुली करते हैं। अब इन असामान्य बालों के लिए ही ललित का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। वह ऐसे शख्स हैं, जिनके चेहरे पर पूरी दुनिया में सबसे लंबे बाल हैं। इससे उन्हें एक नई पहचान मिल गई है। वेयरवुल्फ सिंड्रोम बहुत रेयर बीमारी है, जिसके कारण व्यक्ति के चेहरे और शरीर पर असामान्य तरीके से बाल उगने और बढ़ने लगते हैं। पूरी दुनिया में अब तक सिर्फ 50 लोगों को यह बीमारी हुई है। इन सभी लोगों का जीवन हमारी तरह सामान्य नहीं है। इसलिए ‘सेहतनामा’ में आज वेयरवुल्फ सिंड्रोम की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- वेयरवुल्फ सिंड्रोम क्या है? यह बहुत रेयर बीमारी है, जिसमें चेहरे पर असामान्य बाल उग आते हैं। इसके कारण पूरे शरीर पर भी घने बाल हो सकते हैं या शरीर के कुछ हिस्सों पर बालों के पैच हो सकते हैं। इस बारे में बता रही हैं, डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अंजलि धीमान- वेयरवुल्फ सिंड्रोम क्यों होता है? वेयरवुल्फ सिंड्रोम यानी हाइपरट्रिकोसिस की वजह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। हालांकि, कुछ मामलों में देखा गया है कि इस बीमारी से एक ही परिवार के कुछ लोग प्रभावित हुए हैं। इसका मतलब है कि यह जेनेटिक कारणों से हो सकती है। डॉ. अंजलि धीमान के मुताबिक, इसके दो मुख्य कारण हैं- पूर्वजों के शरीर में भी होते थे बाल डॉ. अंजलि धीमान के मुताबिक, अगर किसी को यह समस्या जन्म से ही है तो इसका मतलब है कि इंसान के शरीर में कुछ ऐसे जीन दोबारा सक्रिय हो गए हैं, जो मानव सभ्यता के विकास के पहले हमारे पूर्वजों में होते थे। कभी भी हो सकता है वेयरवुल्फ सिंड्रोम वेयरवुल्फ सिंड्रोम यानी हाइपरट्रिकोसिस किसी भी व्यक्ति को जीवन के किसी भी पड़ाव में हो सकता है और इसके ये कारण हो सकते हैं, ग्राफिक में देखिए- वेयरवुल्फ सिंड्रोम के क्या लक्षण हैं? इसका मुख्य लक्षण है, शरीर और चेहरे पर सामान्य से अधिक बाल उगना। हालांकि, ये शरीर के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से दिख सकते हैं। इसके सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- क्या वेयरवुल्फ सिंड्रोम का इलाज संभव है? इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। इसके लक्षण कम करने के लिए ट्रीटमेंट के कुछ विकल्प हैं। हालांकि, ये इलाज भी इस पर निर्भर करते हैं कि यह बीमारी किसी को जन्मजात है या किसी कारण से बाद में हुई है। डॉ. अंजलि धीमान के मुताबिक, अगर किसी को यह बीमारी जन्मजात है तो इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन लक्षणों को कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। अगर यह समस्या किसी बीमारी के कारण, दवा के साइड इफेक्ट से या हॉर्मोनल असंतुलन के कारण हुई है तो सही ट्रीटमेंट से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। लक्षण कम करने लिए ले सकते हैं ये ट्रीटमेंट- वेयरवुल्फ सिंड्रोम यानी हाइपरट्रिकोसिस से जुड़े कॉमन सवाल और जवाब सवाल: क्या हाइपरट्रिकोसिस जेनेटिक बीमारी है?
जवाब: हां, हाइपरट्रिकोसिस आनुवंशिक (Genetic) बीमारी हो सकती है। अगर किसी को यह बीमारी जन्मजात है तो बहुत संभव है कि यह आनुवंशिक कारणों से हुई है। सवाल: क्या यह समस्या उम्र के साथ बढ़ती या घटती है?
जवाब: आमतौर पर यह बीमारी लोगों को जन्मजात होती है। ऐसे सभी मामलों में उम्र बढ़ने के साथ पूरे शरीर के बाल लंबे और घने होते जाते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे बुढ़ापा आता है बाल पतले होकर कम होने लगते हैं। अगर यह बीमारी आनुवंशिक कारणों से नहीं हुई है तो इस पर उम्र का बहुत प्रभाव नहीं पड़ता है। सवाल: हाइपरट्रिकोसिस और हिर्सुटिज्म (Hirsutism) में क्या अंतर है?
जवाब: हाइपरट्रिकोसिस में शरीर के किसी भी हिस्से पर असामान्य रूप से अधिक बाल हो सकते हैं। यह बीमारी किसी भी जेंडर को हो सकती है। वहीं हिर्सुटिज्म विशेष रूप से महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन के कारण होती है। इसमें उन्हें पुरुषों की तरह दाढ़ी-मूंछ उग आती है। यह समस्या पूरी दुनिया में लगभग 5-10% महिलाओं को होती है। सवाल: क्या हाइपरट्रिकोसिस संक्रामक बीमारी है?
जवाब: नहीं, यह किसी वायरस या बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी नहीं है। इसलिए यह संक्रामक नहीं होती है। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह आनुवंशिक है। सवाल: क्या यह बीमारी सिर्फ पुरुषों को होती है?
जवाब: नहीं, यह महिलाओं और बच्चों में भी हो सकती है। हालांकि पुरुषों में वयस्कता आने के साथ बाल ज्यादा बड़े और घने हो जाते हैं। इसलिए पुरुषों में इसके लक्षण अधिक स्पष्ट नजर आते हैं।
जवाब: हां, हाइपरट्रिकोसिस आनुवंशिक (Genetic) बीमारी हो सकती है। अगर किसी को यह बीमारी जन्मजात है तो बहुत संभव है कि यह आनुवंशिक कारणों से हुई है। सवाल: क्या यह समस्या उम्र के साथ बढ़ती या घटती है?
जवाब: आमतौर पर यह बीमारी लोगों को जन्मजात होती है। ऐसे सभी मामलों में उम्र बढ़ने के साथ पूरे शरीर के बाल लंबे और घने होते जाते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे बुढ़ापा आता है बाल पतले होकर कम होने लगते हैं। अगर यह बीमारी आनुवंशिक कारणों से नहीं हुई है तो इस पर उम्र का बहुत प्रभाव नहीं पड़ता है। सवाल: हाइपरट्रिकोसिस और हिर्सुटिज्म (Hirsutism) में क्या अंतर है?
जवाब: हाइपरट्रिकोसिस में शरीर के किसी भी हिस्से पर असामान्य रूप से अधिक बाल हो सकते हैं। यह बीमारी किसी भी जेंडर को हो सकती है। वहीं हिर्सुटिज्म विशेष रूप से महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन के कारण होती है। इसमें उन्हें पुरुषों की तरह दाढ़ी-मूंछ उग आती है। यह समस्या पूरी दुनिया में लगभग 5-10% महिलाओं को होती है। सवाल: क्या हाइपरट्रिकोसिस संक्रामक बीमारी है?
जवाब: नहीं, यह किसी वायरस या बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी नहीं है। इसलिए यह संक्रामक नहीं होती है। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह आनुवंशिक है। सवाल: क्या यह बीमारी सिर्फ पुरुषों को होती है?
जवाब: नहीं, यह महिलाओं और बच्चों में भी हो सकती है। हालांकि पुरुषों में वयस्कता आने के साथ बाल ज्यादा बड़े और घने हो जाते हैं। इसलिए पुरुषों में इसके लक्षण अधिक स्पष्ट नजर आते हैं।
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