उत्तर प्रदेश पुलिस, CAPF, रक्षा, शिक्षा जगत और उद्योग को किया गया शामिल
लखनऊ
10 सितंबर 2026 दिन गुरुवार को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय RRU द्वारा एआईसी, आरआरयू एवं इनक्यूबेशन फाउंडेशन के सहयोग से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की तकनीक, प्रशिक्षण, संस्थागत सुर और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना को आगे बढ़ाने हेतु डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के अटल सभागार में 3rd पुलिस प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया।

प्रधानमंत्री की स्मार्ट पुलिसिंग की परिकल्पना ऐसी पुलिसिंग की कल्पना करती है जो दृढ़ता को संवेदनशीलता के साथ, रणनीतिक क्षमता को प्रतिक्रियाशीलता के साथ-साथ तकनीक को पारदर्शिता और जनविश्वास के साथ जोड़ती है। इस शिखर सम्मेलन ने इस परिकल्पना को एक ऐसे मंच में बदल दिया जो पुलिसिंग संस्थानों को शिक्षा-जगत, नवाचारकर्ताओं और उद्योग से जोड़ता है।
केंद्रीय गृह मंत्री एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के मार्गदर्शन में यह पहल पुलिसिंग क्षमताओं को सुदृढ़ करती है और सुगठित, प्रभावी तथा तकनीक-सक्षम संस्थानों का निर्माण भी करती है। इस ढांचे के अंतर्गत पुलिस, प्रौद्योगिकी मिशन, इंडिया परिचालन पुलिसिंग की आवश्यकताओं को अनुसंधान, तकनीक और स्वदेशी नवाचार से जोड़ता है।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश में तीसरा संस्करण आयोजित करने से इस शिखर सम्मेलन को विशेष प्रासंगिकता मिली। राज्य में पुलिसिंग के स्तर और जटिलता ने तकनीक अपनाने, संस्थागत क्षमता और पुलिस-समुदाय की सहभागिता का परीक्षण करने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान किया। उत्तर प्रदेश पुलिस और उत्तर प्रदेश कारागार विभाग की सशक्त भागीदारी ने चर्चाओं को परिचालन वास्तविकताओं में और अधिक स्थापित किया।
पुलिसिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा को समर्पित एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में, RRU नीति, परिचालन अनुभव, अनुसंधान एवं तकनीक के बीच एक सेतु का कार्य करता है। इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से RRU ने स्मार्ट पुलिसिंग के दो पूरक आयामों-तकनीकी क्षमता और सामुदायिक विश्वास-को संबोधित करने के लिए इन क्षेत्रों को एक साथ सम्मिलित किया है।
“स्मार्ट पुलिसिंग में तकनीक को आकार देने की पहल” विषय ने इसी दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित किया है। विचार-विमर्श, निर्णय-प्रक्रिया, परिचालन प्रभावशीलता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को बेहतर बनाने हेतु तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर केंद्रित रहा।

शिखर सम्मेलन का वर्चुअल उद्घाटन राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. बिमल एन पटेल ने किया। राष्ट्रीय रक्षा विश्विद्यालय लखनऊ परिसर की निदेशक डॉ. मंजरी चंद्रा ने शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं नवाचार के माध्यम से पुलिसिंग और सुरक्षा में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का समर्थन करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि के रूप में श्री भगवान एस. श्रीवास्तव ADG, तकनीकी सेवाएं, उत्तर प्रदेश पुलिस एवं विशिष्ट, सम्मानित अतिथि श्री अनिल कुमार महानिरीक्षक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल उपस्थित रहे।

RRU के 3rd शिखर सम्मेलन में 400 से अधिक संख्या में प्रतिभागी शामिल हुए जिनमें उत्तर प्रदेश पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, रक्षा और सुरक्षा संगठनों के 200 से अधिक कर्मियों के साथ-साथ शिक्षाविद, शोधकर्ता, नवाचारकर्ता, तकनीक विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल थे।
इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले संगठनों में उत्तर प्रदेश पुलिस, उत्तर प्रदेश कारागार विभाग, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), असम राइफल्स, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), पंजाब पुलिस, उत्तराखंड पुलिस, केंद्रीय कमान और एनसीसी शामिल थे। शैक्षणिक भागीदारी में IIT कानपुर और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। उत्तर प्रदेश पुलिस और उत्तर प्रदेश कारागार विभाग की सबसे बड़ी टुकड़ियां एवं प्रांतीय रक्षक दल के सदस्य विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

शिखर सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता तकनीक प्रदर्शनी और लाइव प्रदर्शन भी रहा जिसमें संस्थानों, स्टार्ट-अप्स और तकनीक प्रदाताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भविष्यसूचक पुलिसिंग, डेटा एनालिटिक्स, ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन प्रणालियों, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, स्मार्ट निगरानी, सीसीटीवी तकनीकों और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) में अपने अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया।
इस शिखर सम्मेलन ने संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, तकनीक सत्यापन और पुलिस, शिक्षा-जगत, उद्योग जगत के सहयोग के लिए भी नए मार्ग खोले, जिससे पुलिसिंग चुनौतियों को अनुसंधान और तकनीकी समाधानों में बदलने के लिए एक संस्थागत मंच के रूप में राष्ट्रीय रक्षा विश्विद्यालय की भूमिका और ज्यादा सुदृढ़ हुई।
इस प्रकार तीसरा पुलिस प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 2026 केवल तकनीक के प्रदर्शन से आगे बढ़कर एक ऐसे सहयोगात्मक मॉडल को आगे बढ़ाया, जो राष्ट्रीय परिकल्पना को संस्थागत कार्रवाई से, पुलिसिंग को शिक्षा-जगत से, तकनीक को परिचालन आवश्यकता से और कानून प्रवर्तन को समुदाय से जोड़ता है।पुलिस प्रौद्योगिकी मिशन, इंडिया के माध्यम से, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप एक सक्षम-तकनीक और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग पारिस्थितिकी तंत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखेगा।