लखनऊ
हिन्दी दिवस के अवसर पर 24 ग्रंथों के रचनाकार, चिंतक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो कृतियों ‘संक्रान्ति का संहार’ और ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ का लोकार्पण एवं साहित्यिक परिचर्चा 14 सितंबर को उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग में आयोजित होगी।
कार्यक्रम दोपहर एक बजे से शुरू होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा होंगे। वह महापराक्रमी अजेय पेशवा बाजीराव बल्लाल भट्ट के वंशज हैं। कार्यक्रम में शिक्षाविद्, प्रशासनिक अधिकारी और साहित्यकार भी उपस्थित रहेंगे। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की कृति ‘संक्रान्ति का संहार’ पानीपत के तृतीय युद्ध पर आधारित ऐतिहासिक उपन्यास है।
14 जनवरी 1761 को हुए इस निर्णायक युद्ध की पृष्ठभूमि में रचित उपन्यास में इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय को मानवीय संवेदना, राजनीतिक अंतर्दृष्टि और साहित्यिक कल्पना के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का प्रकाशन अद्विक प्रकाशन, नई दिल्ली ने किया है। वहीं, ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ कहानी-संग्रह है। इसमें वेद से आधुनिक विश्व तक की वैचारिक और सांस्कृतिक यात्रा को कथा के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।
भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृति, इतिहास और आधुनिक वैश्विक चेतना के विविध आयामों को केंद्र में रखने वाली इस कृति का प्रकाशन बेंजाई प्रकाशन, सुल्तानपुर ने किया है।
कार्यक्रम में कैप्टन संतोष कुमार द्विवेदी (आइएएस, सेवानिवृत्त), आचार्य धर्मेंद्र, पूर्व कुलपति, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा, डॉ. अनिल मिश्र, पूर्व सीएमओ एवं साहित्यकार, श्री महेंद्र भीष्म, पूर्व निबंधक सह प्रधान न्यायपीठ सचिव, उच्च न्यायालय खंडपीठ, लखनऊ एवं उपन्यासकार तथा डॉ. नरेन्द्र भूषण अध्यक्ष, आदर्श साहित्य परिषद, लखनऊ एवं साहित्यकार प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद, लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. निर्भय नारायण गुप्त करेंगे। मुख्य वक्ता आलोचक डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ दोनों कृतियों के साहित्यिक, ऐतिहासिक और वैचारिक पक्षों पर विचार रखेंगी।
मंचीय समन्वय अखिल भारतीय साहित्य परिषद, लखनऊ की महामंत्री डॉ. ममता पंकज करेंगी।स्वागताध्यक्ष सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती सीमा मधुरिमा होंगी। प्रमुख अभ्यागत डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय, संपादक ग्राम टुडे, डॉ विजय प्रताप आर्य, राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दू जागरण मंच, डॉ अनिल कुमार तिवारी असिस्टेंट प्रोफेसर, इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक सुप्रसिद्ध कवि, राजीव वत्सल सुप्रसिद्ध कवि, करुणानिधि तिवारी राष्ट्रवादी चिंतक, वेद प्रकाश द्विवेदी पत्रकार, डॉ जयप्रकाश तिवारी सुप्रसिद्ध साहित्यकार, डॉ आशा शैली ख्यातिलब्ध कवयित्री, कवि, साहित्यकार एवं मीडिया प्रभारी/पत्रकार डॉ राम लखन वर्मा सहित भारी संख्या में बौद्धिक जन उपस्थित रहेंगे।
आयोजकों के अनुसार हिन्दी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल पुस्तक- लोकार्पण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इतिहास-बोध, साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परंपरा के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श का मंच बनेगा।