नवरात्रि के पावन अवसर पर “माँ दुर्गा की उपासना, आराधना, साधना” विषय पर विशेष काव्य गोष्ठी संपन्न, देशभर के जुड़े 30 से अधिक रचनाकार
रायबरेली-उ.प्र.
रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच समूह (भारत) की हरियाणा इकाई के तत्वावधान में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर “माँ दुर्गा की उपासना, आराधना, साधना” विषय पर एक भव्य ऑनलाइन विशेष काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया।
काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. त्रिलोक चंद्र सेन ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ आशा बिसारिया द्वारा प्रस्तुत माँ वीणापाणि की वंदना से हुआ। कुशल संचालन का निर्वहन डॉ. दीपा शर्मा ‘उजाला’ एवं केंद्रीय पटल के संस्थापक तथा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी हिंदी विद्यापीठ रायबरेली के कुलपति डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’ ने संयुक्त रूप से किया।

काव्य-गोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े साहित्यकारों ने माँ दुर्गा की महिमा, शक्ति, भक्ति और नारी शक्ति पर आधारित गीत, गजल, छंद, दोहे और मुक्तकों का सस्वर पाठ कर पूरे पटल को जय माता दी के जयघोष से गुंजायमान कर दिया।
भक्ति रस और वात्सल्य से ओत-प्रोत रचनाओं ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
आभासी काव्य गोष्ठी में जिन रचनाकारों ने किया काव्य पाठ किया उसमे प्रमुख रूप से डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’, डॉ. त्रिलोक चंद्र सेन, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कैप्टन सरोज सिंह, राम बहाल सिंह, संरक्षक एवं प्रशासक डॉ. सुधीर श्रीवास्तव, केंद्रीय मीडिया प्रभारी/पत्रकार डॉ. राम लखन वर्मा, संगठन मंत्री शिवकुमार सिंह शिव, प्रो. सौभाग्य वर्धन बृहस्पति, राम राज भारती लखनऊ, अविनाश खरे, डॉ. मधु गोयल, प्रमोद राणा, आशा रानी, मदन शास्त्री, डॉ. संजय जैन, अवधेश उन्नाव, डॉ. राजेश कुमार अलीगढ़, रामदेव राही, आशा बिसारिया, आर. एम. लाल, किरण अग्रवाल, हिमाद्री मिश्रा, सी. एल. दीवाना, दिवाकर पाठक, राजकुमार, रीतू एवं मीना सहित अनेक साहित्यकारों ने भक्तिपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं।
रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच समूह (भारत) की हरियाणा इकाई अध्यक्षा डॉ. दीपा शर्मा ‘उजाला’ ने सभी रचनाकारों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि व्यस्ततम समय में भी साहित्यकारों ने पटल पर उपस्थित होकर काव्य-गोष्ठी को सफल बनाया, यह माँ के प्रति सच्ची उपासना और साधना है।

मंच के संस्थापक शिवनाथ सिंह “शिव” एवं संरक्षक डॉ. त्रिलोक चंद सेन ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए हरियाणा इकाई के प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।कार्यक्रम का समापन जय माता दी के उद्घोष और सभी के मंगल की कामना के साथ हुआ।