विशाल काव्य – गोष्ठी का हुआ भव्य आगाज और शानदार समापन

सम्मानित हुए रायबरेली के तमाम साहित्यकार

रायबरेली (उ.प्र.)
जगतपुर, राणा बेनी माधो की धरती पर रायबरेली काव्य-रस साहित्य मंच समूह,भारत, जिला शाखा रायबरेली एवं क्षेत्रीय काव्य संस्था लोक साहित्य परिषद, जगतपुर, रायबरेली द्वारा 19 अप्रैल को जगतपुर (सलोन) मार्ग पर स्थित शिक्षक अनिल कुमार सिंह ‘पीपल’ के संयोजन में उन्ही के आवास के सभागार में एक विशाल काव्य- गोष्ठी, अवधी सम्राट डॉ इंद्र बहादुर सिंह भदौरिया ‘इंद्रेश’ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिसका कुशल संचालन श्री अनिल कुमार सिंह ‘पीपल’ द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ से पधारे सुप्रशिद्ध कवि राम सनेही विश्वकर्मा ‘सजल’ रहे। काव्य-गोष्ठी माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित करने के साथ ही माँ सरस्वती वंदना डॉ गीता पांडेय ‘अपराजिता’ द्वारा प्रस्तुति के साथ शुभारंभ हुई। विशिष्ट अतिथि के रूप में रायबरेली काव्य-रस साहित्य मंच रायबरेली के संस्थापक/अध्यक्ष डॉ शिवनाथ सिंह ‘शिव’, कवि एवं रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच के केन्द्रीय मीडिया प्रभारी डॉ राम लखन वर्मा के अलावा दर्जनों की संख्या में कवि एवं साहित्यकार उपस्थित रहे। इस काव्य-गोष्ठी में कवि देवी प्रसाद मिश्र ‘देवेंद्र वेदांती’ ने पढ़ा-
एक मिट्टी से कितने घड़े बन गये,
एक सोने से कितने कड़े बन गये।
रूप मिट मिट कर कारण में बनता रहे,
शाख गिरते रहे जड़ अड़े रहे गये।

डॉ इंद्रेश बहादुर सिंह ‘इंद्रेश’ , अवधी सम्राट,ने कहा-
गायब सनई के फूल भये, गायब तरकारी गुलरी कै।
गायब बेझरा के धंसी भयी, गुरू-राब कहां भै गगरी कै।

कवि एवं केंद्रीय मीडिया प्रभारी डॉ राम लखन वर्मा ने पढ़ा-
मन तड़पत चंहु ओर निहारत, डोर प्रीत की खोल रही है। बाजारों में नही मिलेगी, प्रीति सदा अनमोल रही है।

डॉ शिवनाथ सिंह ” शिव ” ने अपनी प्रसिद्ध गजल पढ़ी …h
” जग ने दिए जो ज़ख्म, वे नासूर हो गए.
बदनाम होकर हम भी, मशहूर हो गए.
मिलना वा बिछड़ना, जीवन के रंग हैं.
हम पास पास होकर, क्यों दूर हो गए.

डॉ गीता पांडेय अपराजिता ने पढ़ा-
लिखा अन्याय हो जिसमें, पृष्ठ वह फाड़ देती हूँ।
जरूरत मंद मिल जाये, मदद की आड़ लेती हूँ।

रायबरेली के प्रसिद्ध हास्य कवि संदीप शरारती ने व्यंग करते हुए कहा..

रिश्ते का कत्ल कर आघात दे रहा।
वो धमकियों पे धमकियां दिन रात दे रहा।
बीबी मुझे इस्राएल सा तंग कर रही।
साला भी ट्रम्प जैसे उसका साथ दे रहा।

कवि राम कुमार ‘पागल’ ने कहा-
जिंदगी उलझी अनसुलझे सवालों की तरह।
ताने-बाने से बुनी मकड़ी के जालों की तरह।

मुख्य अतिथि राम सनेही विश्वकर्मा ‘सजल’ ने पढ़ा-
देश कैसे बना कब गुलामी गयी। यह कारण है क्या कब सलामी गयी।
कवि दुर्गा शंकर वर्मा ‘दुर्गेश’ ने पढ़ा-
सो जा प्यारी बिटिया रानी,
सो- जा, सो – जा।
तुझको सुनाऊं एक कहानी।
सो -जा, सो – जा।
काव्य-गोष्ठी के संयोजक एवं संचालन कर रहे कवि अनिल कुमार सिंह ‘पीपल’ ने पढ़ा- वीरानी सी लगती शाम,पल-पल पग ढूंढते विराम।
प्रदूषण से बिगड़ा दुनिया का मुखड़ा।
किस किस को सुनाए प्रदूषण का दुखड़ा।

इसके अलावा कई तमाम कवियों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। कार्यक्रम में डॉ इंद्र बहादुर सिंह 'इंद्रेश' द्वारा रचित 'सोंधि-सोंधि महकत हवै' पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इसी क्रम में रायबरेली काव्य-रस साहित्य मंच के संस्थापक/अध्यक्ष डॉ शिवनाथ सिंह 'शिव' ने राम सनेही विश्वकर्मा को 'साहित्य शिरोमणि', कवि एवं केंद्रीय मीडिया प्रभारी डॉ राम लखन वर्मा को 'साहित्य गौत्व रत्न', राम कुमार सिंह 'पागल' को  'साहित्य ज्ञानभूषण', अनिल कुमार सिंह 'पिपलाचार्य' को 'साहित्य ज्ञान शिरोमणि', डॉ इंद्र बहादुर सिंह इंद्रेश को 'अवधी साहित्य गौरव रत्न', बृजेश नाथ त्रिपाठी को 'साहित्य ज्ञान भूषण', देवी प्रसाद मिश्र को 'साहित्य शिरोमणि', दुर्गा शंकर 'दुर्गेश' को 'आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी साहित्य गौरव रत्न सम्मान' काव्य-गोष्ठी में उपस्थित सभी कवियों एवं श्रोताओं को भी सम्मानित किया गया। चार घण्टे से ज्यादा देर तक चली इस काव्य-गोष्ठी का समीक्षक उदबोधन डॉ इन्द्र बहादुर सिंह 'इंद्रेश' ने और उपस्थित सभी कवियों एवं श्रोताओं का आभार अनिल कुमार सिंह 'पीपल' ने व्यक्त किया।

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