फास्टैग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड के यूजर्स अब रेकरिंग पेमेंट मैकेनिज्म के जरिए अपने कार्ड में बैलेंस ऐड कर सकेंगे। इस मैकेनिज्म का इस्तेमाल करने पर ग्राहकों का FASTag और NCMC का बैलेंस उनके ओर से तय सीमा से नीचे जाने पर ऑटोमेटिक रूप में पैसा ऐड हो जाएगा। इससे ट्रैवल और मोबिलिटी से जुड़े पेमेंट करने में आसानी होगी। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज यानी 7 मई को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए यह बात कही। UPI लाइट के लिए ऑटोमैटिक वॉलेट रीलोड फीचर शुरू
RBI ई-मैंडेट फ्रेमवर्क के तहत UPI लाइट वॉलेट के लिए भी ऑटो-रिप्लेनिशमेंट फीचर शुरू कर रहा है। इसमें UPI लाइट वॉलेट का पैसा तय सीमा से कम होने पर अपने आप लोड हो जाएगा। वर्तमान में UPI लाइट वॉलेट कस्टमर्स को ₹2000 तक लोड करने और प्रति लेनदेन ₹500 तक पेमेंट करने की अनुमति देता है। अभी हर बार पैसा कम होने पर यूजर्स को मैन्युअल रूप से रीलोड करना पड़ता है। रेकरिंग पेमेंट मैकेनिज्म क्या होता है? रेकरिंग पेमेंट मैकेनिज्म ऐसा मॉडल है, जिसके जरिए किसी प्रोडक्ट या सर्विस के लिए एक निश्चित अवधि में ऑटोमेटिक रूप से पैसा डेबिट करने की सुविधा देता है। इसमें पेमेंट अमाउंट पहले से तय की जाती है। इस मैकेनिज्म के लिए यूजर को एक बार ई-मैंडेट के जरिए पैसे डेबिट करने की परमीशन देनी होती है। डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफार्म स्थापित करेगी RBI
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘रिजर्व बैंक ने सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ सालों कई उपाय किए हैं। इन उपायों से यूजर्स का विश्वास बढ़ा है। हालांकि, डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं इस तरह की फ्रॉड को रोकने और कम करने के लिए एक प्रणाली की आवश्यकता को उजागर करती हैं। इसलिए डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में नेटवर्क स्तर की इंटेलिजेंस जानकारी और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग करने के लिए एक डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफार्म स्थापित करने का प्रस्ताव है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ने इस मंच की स्थापना के विभिन्न पहलुओं की जांच करने के लिए एक समिति का गठन किया है।’
RBI ई-मैंडेट फ्रेमवर्क के तहत UPI लाइट वॉलेट के लिए भी ऑटो-रिप्लेनिशमेंट फीचर शुरू कर रहा है। इसमें UPI लाइट वॉलेट का पैसा तय सीमा से कम होने पर अपने आप लोड हो जाएगा। वर्तमान में UPI लाइट वॉलेट कस्टमर्स को ₹2000 तक लोड करने और प्रति लेनदेन ₹500 तक पेमेंट करने की अनुमति देता है। अभी हर बार पैसा कम होने पर यूजर्स को मैन्युअल रूप से रीलोड करना पड़ता है। रेकरिंग पेमेंट मैकेनिज्म क्या होता है? रेकरिंग पेमेंट मैकेनिज्म ऐसा मॉडल है, जिसके जरिए किसी प्रोडक्ट या सर्विस के लिए एक निश्चित अवधि में ऑटोमेटिक रूप से पैसा डेबिट करने की सुविधा देता है। इसमें पेमेंट अमाउंट पहले से तय की जाती है। इस मैकेनिज्म के लिए यूजर को एक बार ई-मैंडेट के जरिए पैसे डेबिट करने की परमीशन देनी होती है। डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफार्म स्थापित करेगी RBI
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘रिजर्व बैंक ने सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ सालों कई उपाय किए हैं। इन उपायों से यूजर्स का विश्वास बढ़ा है। हालांकि, डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं इस तरह की फ्रॉड को रोकने और कम करने के लिए एक प्रणाली की आवश्यकता को उजागर करती हैं। इसलिए डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में नेटवर्क स्तर की इंटेलिजेंस जानकारी और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग करने के लिए एक डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफार्म स्थापित करने का प्रस्ताव है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ने इस मंच की स्थापना के विभिन्न पहलुओं की जांच करने के लिए एक समिति का गठन किया है।’