इटली में गुरुवार 13 जून को G7 देशों की बैठक शुरू हो गई है। दुनिया के सबसे अमीर 7 लोकतांत्रिक देश इटली के फसानो शहर में एकजुट हुए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जॉर्जिया मेलोनी के बुलावे पर समिट में शामिल होने के लिए रवाना हो चुके हैं। मोदी प्रधानमंत्री के तौर पहली बार अपने कार्यकाल की शुरुआत पश्चिमी देश के दौरे के साथ कर रहे हैं। उन्होंने रवाना होने से पहले कहा, मुझे खुशी है कि कार्यकाल के पहले दौरे पर मैं इटली जा रहा हूं।’ पिछले 2 कार्यकाल में वे भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत पहले विदेश दौरे पर पड़ोसी देशों में गए थे। 2019 में वे पहले दौरे पर मालदीव गए थे। G7 देशों की बैठक में पहली बार कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप फ्रांसिस भी शामिल होने वाले हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बाइडेन और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन समेत कई देशों के हेड से मुलाकात भी करेंगे। मेजबान मेलोनी नमस्ते से लीडर्स का स्वागत कर रहीं क्या है G7 संगठन
1975 में बना ये संगठन दुनिया के सबसे अमीर देशों का समूह है। इसमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और कनाडा शामिल हैं। ये देश हर साल एक समिट में दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं। पिछली बार G7 समिट जापान में हुआ था। इसमें चीन के कर्ज जाल और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते दबदबे पर चर्चा की गई थी। भारत बतौर गेस्ट 11 साल से इस समिट में शामिल हो रहा है। यूक्रेन से 10 साल का सिक्योरिटी एग्रीमेंट साइन करेगा अमेरिका न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस बार G7 देशों का एजेंडा रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास जंग है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ 10 साल के सिक्योरिटी एग्रीमेंट पर साइन करने वाले हैं। ये एग्रीमेंट रूस के खिलाफ जंग में अहम भूमिका निभाएगा। एक तरफ जहां पश्चिमी देश रूस के खिलाफ इटली में एकजुट हो रहे हैं, वहीं रूस की न्यूक्लियर सबमरीन युद्धाभ्यास के लिए अमेरिका के पड़ोसी देश क्यूबा में हवाना हार्बर पर पहुंच चुकी है। ये जगह अमेरिका के मियामी से सिर्फ 367 किलोमीटर दूर है। पहली बार कार्यकाल की शुरुआत में पड़ोसी देशों की बजाए पश्चिमी देश जा रहे मोदी यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर का लोन देंगे पश्चिमी देश
वहीं, समिट में सबसे ज्यादा फोकस रूस पर रहने वाला है। इसके लिए जेलेंस्की भी इटली पहुंचें हैं। G7 समिट में पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर यानी 41 लाख करोड़ रुपए का लोन देने की घोषणा की है। ये लोन पश्चिमी देशों में जब्त किए गए 200 बिलियन डॉलर की रूसी संपत्ति से चुकाया जाएगा। ब्रिटेन ने रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिसमें मॉस्को के स्टॉक एक्सचेंज भी शामिल है। उसने रूस के जहाजों पर बैन लगा दिया है।
1975 में बना ये संगठन दुनिया के सबसे अमीर देशों का समूह है। इसमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और कनाडा शामिल हैं। ये देश हर साल एक समिट में दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं। पिछली बार G7 समिट जापान में हुआ था। इसमें चीन के कर्ज जाल और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते दबदबे पर चर्चा की गई थी। भारत बतौर गेस्ट 11 साल से इस समिट में शामिल हो रहा है। यूक्रेन से 10 साल का सिक्योरिटी एग्रीमेंट साइन करेगा अमेरिका न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस बार G7 देशों का एजेंडा रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास जंग है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ 10 साल के सिक्योरिटी एग्रीमेंट पर साइन करने वाले हैं। ये एग्रीमेंट रूस के खिलाफ जंग में अहम भूमिका निभाएगा। एक तरफ जहां पश्चिमी देश रूस के खिलाफ इटली में एकजुट हो रहे हैं, वहीं रूस की न्यूक्लियर सबमरीन युद्धाभ्यास के लिए अमेरिका के पड़ोसी देश क्यूबा में हवाना हार्बर पर पहुंच चुकी है। ये जगह अमेरिका के मियामी से सिर्फ 367 किलोमीटर दूर है। पहली बार कार्यकाल की शुरुआत में पड़ोसी देशों की बजाए पश्चिमी देश जा रहे मोदी यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर का लोन देंगे पश्चिमी देश
वहीं, समिट में सबसे ज्यादा फोकस रूस पर रहने वाला है। इसके लिए जेलेंस्की भी इटली पहुंचें हैं। G7 समिट में पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर यानी 41 लाख करोड़ रुपए का लोन देने की घोषणा की है। ये लोन पश्चिमी देशों में जब्त किए गए 200 बिलियन डॉलर की रूसी संपत्ति से चुकाया जाएगा। ब्रिटेन ने रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है, जिसमें मॉस्को के स्टॉक एक्सचेंज भी शामिल है। उसने रूस के जहाजों पर बैन लगा दिया है।