ज्येष्ठ पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं:पूर्णिमा पर पूजा-पाठ और दान-पुण्य के साथ ही पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की भी है परंपरा

आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है। इस बार ये तिथि दो दिन (21-22 जून) रहेगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर संत कबीर दास जी की जयंती (22 जून) भी मनाई जाती है। ये पूर्णिमा धर्म-कर्म के नजरिए से बहुत खास है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ ही पितरों के लिए धूप-ध्यान भी जरूर करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर किए गए पितरों के लिए किए गए धूप-ध्यान से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनकी कृपा से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस तिथि पर देवी-देवताओं की पूजा के साथ ही नदी स्नान और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। जानिए ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…