केजरीवाल बोले- जमानत रद्द करना न्याय की विफलता के समान:हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में कहा- परेशान और अपमानित करने के लिए गिरफ्तारी हुई

दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार (10 जुलाई) को हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में कहा है कि उनकी जमानत रद्द करना न्याय की विफलता के समान है। मैं विच हंट का शिकार हुआ हूं। दरअसल, केजरीवाल पर शराब नीति केस से मुख्य रूप में दो केस चल रहे हैं। शराब नीति को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें ED ने 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। मामले में ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल को 20 जून को जमानत मिल गई थी। इसके खिलाफ ED ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने 25 जून को ट्रायल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। बुधवार को हुई सुनवाई में केजरीवाल ने मामले को लेकर जवाब दाखिल किया है। जिसमें उन्होंने कहा- ED ने के अन्य सह आरोपियों पर दबाव बनाया और उनसे ऐसे बयान दिलवाए, जिससे केस में ED को फायदा हुआ। ट्रायल कोर्ट का जमानत ऑर्डर न केवल तर्कपूर्ण था, बल्कि यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों की ओर से दी गई दलीलों पर विवेक के आधार पर फैसला सुनाया गया था। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने अब ED से जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी। केजरीवाल पर ED के अलावा CBI का केस भी चल रहा है। शराब नीति में भ्रष्टाचार को लेकर CBI ने उन्हें 26 जून को गिरफ्तार किया था। केजरीवाल ने कहा कि ED की दलीलें कानून के हिसाब से ठीक नहीं थीं। ED की दलीलें असंवेदनशीलता के रवैये को दर्शाती हैं। PMLA की धारा 3 के तहत मेरे खिलाफ कोई केस नहीं बनता है। और मेरे जीवन और स्वतंत्रता को झूठे और दुर्भावनापूर्ण मामले से बचाया जाना चाहिए। केजरीवाल ने कहा- ED कस्टडी के दौरान जांच अधिकारी ने कोई खास इन्टेरोगेशन नहीं की। एक राजनीतिक विरोधी को परेशान और अपमानित करने के लिए अवैध रूप से गिरफ्तारी की गई है। ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि AAP को साउथ ग्रुप से रिश्वत मिली है। इस रिश्वत का गोवा चुनाव में इस्तेमाल तो दूर की बात है। AAP के पास एक भी रुपया नहीं मिला है। इस संबंध में लगाए गए आरोप को साबित करने के कोई भी ठोस सबूत नहीं है। बेल पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल कोर्ट ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया
दलीलों पर सही ढंग से बहस नहीं हुई थी, इसलिए राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को रद्द करते हैं। फैसले को देखकर ऐसा लगता है कि केजरीवाल को जमानत देते समय विवेक का इस्तेमाल नहीं किया। 1.ट्रायल कोर्ट की टिप्पणी पर विचार नहीं किया जा सकता, पूरी तरह से अनुचित है। यह दर्शाता है कि ट्रायल कोर्ट ने सामग्री पर अपना दिमाग नहीं लगाया है। इस बात पर मजबूत तर्क दिया गया कि जज ने धारा 45 PMLA की दोहरी शर्त पर विचार-विमर्श नहीं किया। ​​​​​​​ट्रायल कोर्ट को ऐसा कोई निर्णय नहीं देना चाहिए जो हाईकोर्ट के फैसले से उलट हो। ​​​​​​​ट्रायल कोर्ट ने धारा 70 PMLA के तर्क पर भी विचार नहीं किया है। ​​​​​​​ राऊज एवेन्यू कोर्ट के बेल ऑर्डर की 5 बातें…