मणिपुर में सुरक्षाबलों के काफिले पर हमला, CRPF जवान शहीद:जिरीबाम में कुकी उग्रवादियों ने फायरिंग की, जवान के सिर में गोली लगी

मणिपुर के जिरीबाम में CRPF और पुलिस टीम के काफिले पर कुकी उग्रवादियों ने रविवार (14 जुलाई) को हमला कर दिया। इसमें CRPF का एक जवान शहीद हो गया। पुलिस का एक अधिकारी भी घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि मोंगबुंग में कुकी उग्रवादियों ने पहाड़ी इलाके से गोलीबारी की। गोली CRPF जवान अजय कुमार झा के सिर पर लगी। इसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मोंगबुंग में गोलीबारी शनिवार देर रात से ही शुरू हो गई थी। रविवार सुबह CRPF और पुलिस ने उग्रवादियों पर जवाबी कार्रवाई की। इसमें उग्रवादियों को कितना नुकसान पहुंचा, अभी जानकारी सामने नहीं आई है। हमले से जुड़ी तीन तस्वीरें… कांग्रेस ने कहा- मोदी अपनी दुनिया में मस्त
मणिपुर की हिंसा को लेकर कांग्रेस दुख जताया है। पार्टी की ओर से X पर जारी पोस्ट की गई। इसमें लिखा, ‘1 साल से ज्यादा हो गए, मणिपुर आज भी हिंसा की आग में झुलस रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इससे फर्क नहीं पड़ता। वो अपनी दुनिया में मस्त हैं। इस साल मणिपुर में सुरक्षाबलों पर हमले की 3 अन्य घटनाएं… 26 अप्रैल: मणिपुर में CRPF के 2 जवान शहीद, कुकी उग्रवादियों ने बम फेंका था मणिपुर में 26 अप्रैल को कुकी उग्रवादियों ने सेंट्रल फोर्स की चौकी पर बम फेंका था। इसमें 2 जवान शहीद और 2 अन्य जवान जख्मी हुए थे। यह हमला मणिपुर में लोकसभा की वोटिंग के ठीक 6 घंटे बाद विष्णुपुर जिले में हुआ था। पूरी खबर पढ़ें… 15 फरवरी: ​​​​​भीड़ ने SP ऑफिस पर हमला किया, 2 नागरिकों की मौत मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में 15 फरवरी को हिंसा हुआ थी, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई थी। एक पुलिस कॉन्स्टेबल को सस्पेंड करने के विरोध में 300-400 लोगों की भीड़ ने देर रात SP और DC ऑफिस पर हमला कर दिया था। भीड़ ने पथराव और आगजनी की। घटना में 40 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। चुराचांदपुर कुकी-जो जनजाति बहुल क्षेत्र है। पूरी खबर पढ़ें… 17 जनवरी: मोरेह में सुरक्षाबलों की गाड़ी पर हमला, 2 जवान सहित 3 की मौत
मणिपुर के मोरेह इलाके में 17 जनवरी को उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों की गाड़ी पर हमला कर दिया। इसमें दो जवानों की मौत हो गई। इसके अलावा एक कुकी समुदाय की महिला की जान चली गई। हमलावर कुकी समुदाय के बता गए थे। उपद्रवियों ने मोरेह SBI के पास सुरक्षाबलों की एक चौकी पर बम फेंके और गोलीबारी की थी। पूरी खबर पढ़ें… मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा जारी, अब तक 200 से ज्यादा मौतें
मणिपुर में पिछले साल 3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसा चल रही है। राज्य में अब तक हुई हिंसा की घटनाओं में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। 4 पॉइंट्स में जानिए क्या है मणिपुर हिंसा की वजह… मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए। मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया। नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा। सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।