सेहतनामा- विश्व में 30% लोग एलर्जी से परेशान:डॉक्टर भी नहीं जानते यह होती क्यों है, बेहतर इम्यूनिटी और सावधानी ही है बचाव

क्या आपको कभी एलर्जी हुई है? शायद हम सब को कभी-न-कभी किसी-न-किसी चीज से एलर्जी तो हुई ही होगी। हो सकता है किसी को धूल-मिट्टी से एलर्जी हो, जिससे बार-बार छीकें आती हों, किसी को फूड एलर्जी हो, जिससे स्किन में रैशेज हो जाते हों। ऐसी ही कई सारी एलर्जी हैं, जिनके बारे में आज हम जानेंगे। यह पूरा सप्ताह वर्ल्ड एलर्जी वीक के तौर पर मनाया गया। ये 23 जून से शुरु हुआ और 29 जून यानी आज इसका समापन है। वर्ल्ड एलर्जी वीक का मुख्य उद्देश्य एलर्जी के बारे में लोगों में जागरुकता फैलाना है। आज ‘सेहतनामा’ में बात करेंगे एलर्जी और उसके निदान के बारे में। एलर्जी क्या है और ये कैसे होती है आजकल एलर्जी एक आम समस्या बन गई है। जैसे ही मौसम में थोड़ा बदलाव होता है, लोगों को एलर्जी होने लगती है। इसके कई और कारण भी हो सकते हैं जैसे कमजोर इम्यूनिटी, प्रदूषण, गलत खान-पान वगैरह। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, किसी भी फॉरेन सब्सटेंस यानी बाहरी पदार्थ के प्रति हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम का सक्रिय हो जाना एलर्जी है। मेडिसिन की भाषा में इन विदेशी पदार्थों को एलर्जेन कहते हैं। अब जानें एलर्जी कैसे होती है- शरीर के अंदर एलर्जेन कैसे अटैक करते हैं शरीर में एलर्जेन श्वास, त्वचा और खाने की नली के द्वारा प्रवेश कर सकते हैं, जिससे इसके अलग-अलग लक्षण देखने को मिलते हैं। जब एलर्जेन शरीर में प्रवेश करता है तो यह एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देता है। जिससे इसका असर त्वचा, आंखों और नाक-गले में नजर आने लगता है। एलर्जी एक ही समय में शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। जैसे- जब एलर्जी पैदा करने वाले तत्व सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं तो नाक बहने लगती है और इसमें बलगम बनने लगता है। साथ ही वह सूज जाती है। उसमें जलन और खुजली भी होने लगती है। फिर सर्दी, खांसी, छींकें आना, आंखों से पानी आना और गले में खराश होना भी इसके कुछ लक्षण हो सकते हैं। त्वचा एलर्जी का सबसे ज्यादा असर त्वचा पर ही पड़ता है। एलर्जी के कारण होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं में एटोपिक डर्माटाइटिस (एक्जिमा) और अर्टिकेरिया (पित्ती) शामिल हैं। इसमें स्किन में रैशेज और दाने हो जाते हैं। लंग्स और छाती एलर्जी के कारण अस्थमा हो सकता है। कई बार लोगों को अस्थमा का पता भी नहीं चल पाता है कि उन्हें ये बीमारी है। जब कोई एलर्जेन सांस के जरिए अंदर जाता है तो श्वास नली में सूजन आ जाती है और इससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। पेट और आंत आमतौर पर एलर्जी पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों में मूंगफली, सी फूड, डेयरी प्रोडक्ट और अंडे शामिल हैं। बच्चों में गाय के दूध से एलर्जी होने की संभावना रहती है और इससे एक्जिमा, अस्थमा, पेट दर्द हो सकता है। कुछ लोग लैक्टोज (दूध में मौजूद शुगर) को पचा नहीं पाते हैं, जिससे पेट खराब हो जाता है। इसे लैक्टोज इंटॉलरेंस कहा जाता है और ये एलर्जी से काफी अलग है। ज्यादातर मामलों में शरीर का वह हिस्सा जिसे एलर्जेन छूता है, वहीं एलर्जी के लक्षण उभर आते हैं। नीचे ग्राफिक में देखें एलर्जी होने के क्या-क्या लक्षण होते हैं- अगर आपको भी ये लक्षण दिखें तो कैसे लगाएं पता कि ये एलर्जी है या नहीं। नीचे पॉइंटर्स में देखें- इसके अलावा कुछ ब्लड टेस्ट किए जाते हैं- -इम्युनोग्लोबुलिन ई (IGE)- यह एलर्जी से संबंधित पदार्थों के स्तर को मापता है। -कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)- इसमें ईसिनोफिल व्हाइट ब्लड सेल (WBC) की मात्रा का पता लगाया जाता है। ऐलिमिनेशन टेस्ट- इस टेस्ट का इस्तेमाल अक्सर भोजन या दवा से एलर्जी की जांच के लिए किया जाता है। एलर्जी से कैसे करें बचाव एलर्जी के लक्षणों को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उन चीजों से दूर रहें, जो आपकी एलर्जी का कारण बनती हैं। एलर्जी को रोकने और उसका इलाज करने के लिए कई तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं। नोट- कोई भी दवाई लेने से पहले आपको डॉक्टर से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। बाकी आप कुछ सावधानियां अपने स्तर पर भी बरत सकते हैं। नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- इससे आप काफी हद तक अपने और अपने परिवार को एलर्जी और इंफेक्शंस से बचा सकते हैं।