महाराष्ट्र कैडर की प्रशिक्षु IAS अफसर पूजा खेड़कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में अपने सिलेक्शन को लेकर सुर्खियों में हैं। उन पर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगाने का आरोप है। पुणे के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल (YCM) अस्पताल से 24 अगस्त, 2022 को उनका दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया था। YCM के डीन राजेंद्र वाबले ने इसे लेकर कहा है कि इस प्रमाण पत्र में उन्हें 7% दिव्यांग बताया गया है। इसका मतलब है कि शरीर में कोई बड़ी दिव्यांगता नहीं है। दरअसल UPSC की परीक्षा में पूजा ने PwBD (पर्सन विद बेंचमार्क डिसेबिलिटी) अभ्यर्थी के तौर पर हिस्सा लिया था, जिसमें उन्होंने दो मेडिकल प्रमाण पत्र लगाए थे। पहला मानसिक दिव्यांगता और दूसरा देखने में होने वाली परेशानी से जुड़ा था। ऐसे में सवाल उठता है कि UPSC की परीक्षा में दिव्यांगता प्रमाण पत्र हासिल करने का पैरामीटर क्या है। इसके जरिए एक अभ्यर्थी को कितनी छूट मिलती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि UPSC में दिव्यांग अभ्यर्थी को कितनी राहत मिलती है? साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: मनीष भारती, ऑनलाइन फैकल्टी एंड मीडिया कॉर्डिनेटर- संस्कृति IAS (दिल्ली सवाल- UPSC की सिविल सेवा परीक्षा या शिक्षण संस्थानों में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए कितना आरक्षण है? जवाब- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दिव्यांगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण को 3% से बढ़ाकर 4% और उच्च सरकारी शिक्षण संस्थानों (IIT, NIT, IIM) में 3% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया है। इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को आगे बढ़ने के ज्यादा-से-ज्यादा अवसर प्रदान है। हालांकि आरक्षण का लाभ तभी मिलता है, जब कोई अभ्यर्थी 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाला हो। इसके लिए अभ्यर्थी के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। सवाल- UPSC सिविल सेवा परीक्षा में दिव्यांगों को कितनी छूट मिलती है? जवाब- UPSC की सिविल सेवा परीक्षा के लिए दिव्यांग अभ्यर्थी को उम्र की सीमा में छूट, पदों में आरक्षण और परीक्षा केंद्रों को लेकर विशेष छूट मिलती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए। ग्राफिक में दिए पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं। दिव्यांगों को परीक्षा केंद्र पर मिलती सुविधा दिव्यांग अभ्यर्थी के लिए UPSC द्वारा इस बात का ख्याल रखा जाता है कि उनका परीक्षा केंद्र उनके वर्तमान पते से ज्यादा दूर न हो, जिससे वह आसानी से परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकें। परीक्षा केंद्र पर दिव्यांग अभ्यर्थियों को अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं। जैसे अगर कोई अभ्यर्थी दृष्टिबाधित है तो उसे पेपर लिखने के लिए राइटर मिलता है। इसके अलावा दिव्यांगों के लिए परीक्षा में अतिरिक्त समय और बैठने की उचित व्यवस्था की जाती है। परीक्षा के समय में छूट मिलती है दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में अतिरिक्त समय दिया जाता है, जो आमतौर पर परीक्षा की अवधि के प्रति घंटे 20 मिनट होता है। दिव्यांगों की अलग मेरिट लिस्ट UPSC की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी अलग से लगाई जाती है, जो उनके लिए आरक्षित सीटों की संख्या के अनुसार होती है। सेवा आवंटन में छूट का प्रावधान मेरिट लिस्ट में दिव्यांग अभ्यर्थी की रैंक और उसकी प्राथमिकताओं के अनुसार सेवा दी जाती है। सेवा आवंटन के समय दिव्यांगों को पात्रता पुष्टि के लिए एक मेडिकल परीक्षा से गुजरना पड़ता है। सवाल- दिव्यांगता के दायरे में क्या-क्या रखा गया है? जवाब- केंद्र सरकार द्वारा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में दिव्यांगता से जुड़े आरक्षण को रखा गया है। इसमें बेंचमार्क दिव्यांगता को पांच श्रेणियों में बांटा गया है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए। सवाल- UPSC में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए कितनी रिक्तियां आरक्षित हैं? जवाब- UPSC अधिसूचना, 2023 के मुताबिक, बेंचमार्क दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 37 रिक्तियां आरक्षित हैं। इसमें अंधेपन और कम दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए 7, बहरेपन वाले उम्मीदवारों के लिए 5, सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ रोग से ठीक हुए, बौनापन, एसिड अटैक पीड़ितों और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी सहित लोकोमोटर दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों के लिए 15 और अंधापन, बहरापन सहित मल्टीपल दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों के लिए 10 रिक्तियां शामिल हैं। सवाल- UPSC सिविल सेवा परीक्षा में चयनित दिव्यांगों को कौन कौन सी पोस्ट दी जाती हैं? जवाब- साल 2022 से पहले दिव्यांग श्रेणी का आरक्षण लेने वाले अभ्यर्थियों को IPS, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) से बाहर रखा जाता था। इसके अलावा सभी सेवाओं में नियुक्ति का अवसर दिया जाता था। इसके पीछे यह तर्क दिया जाता था कि इन सेवाओं में काफी शारीरिक एक्शन की जरूरत होती है। ऐसे में शारीरिक दिव्यांग लोगों को इन सेवाओं में परेशानी हो सकती है। लेकिन मार्च, 2022 में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित किया। इसमें उन्होंने शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को IPS, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) में चयन के लिए UPSC में आवेदन जमा करने की अनुमति दे दी। सवाल- पिछले कुछ सालों में UPSC द्वारा कितने दिव्यांग अफसरों का चयन हुआ है? जवाब- UPSC के रिजल्ट के मुताबिक पिछले कुछ सालों में दिव्यांगता आरक्षण में दृष्टिबाधित (VI), श्रवण बाधित (VI), लोकोमोटर दिव्यांग और सेरेब्रल पाल्सी (LDCP) और मल्टिपल दिव्यांगता (MD) सभी में सिलेक्शन हुआ है। इसके लिए यह लिस्ट देखिए। इन सभी लोगों को विभिन्न दिव्यांगता कोटा के माध्यम से चुना गया है। सवाल- क्या दिव्यांगता की कोई अवधि भी तय होती है? जवाब- जैसाकि हम जानतें हैं कि परीक्षा का फॉर्म भरते समय दिव्यांग अभ्यर्थी के लिए प्राइमरी लेवल पर दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है। जब अभ्यर्थी का सिलेक्शन हो जाता है तो IAS में चयन के लिए UPSC से मान्य मेडिकल बोर्ड इसकी दोबारा जांच करता है। इस बोर्ड में तीन डॉक्टरों की टीम नियुक्त की जाती है। इसमें एक डॉक्टर उस क्षेत्र का विशेषज्ञ होता है, जिसमें दिव्यांगता की जांच होनी है। अगर बोर्ड जांच के बाद इस बात की पुष्टि कर देता है कि व्यक्ति दिव्यांग है, तभी वह सेवा के लिए पात्र माना जाता है। हालांकि बोर्ड यह भी तय कर सकता है कि दिव्यांगता कितनी अवधि तक रह सकती है। उसके बाद व्यक्ति को दिव्यांग नहीं माना जाता है।