मलेशिया के 17वें किंग इस्कंदर की ताजपोशी:इनके पास 47 लाख करोड़ की संपत्ति, 300 लग्जरी कारें; बेटा भारतीय सेना में कैप्टन रह चुका

मलेशिया में इब्राहिम इस्कंदर की शनिवार को ताजपोशी हुई। इसी के साथ इब्राहिम देश के 17वें महाराज बन गए। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के नेशनल पैलेस में यह समारोह हुआ। इस्कंदर अगले 5 साल तक मलेशिया के राजा रहेंगे। 1957 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से मलेशिया में मलय राज्य के शासक बारी-बारी से 5 साल के कार्यकाल के लिए राजगद्दी संभालते आए हैं। ताजपोशी समारोह में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के अलावा पड़ोसी देश ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोलकियाह और बहरीन के राजा हमद-बिन-इसा-अल-खलीफा भी मौजूद थे। किंग इस्कंदर ने सुनहरे धागों से सजा कोट और साफा पहना हुआ था। समारोह की शुरुआत में सुल्तान इस्कंदर ने और क्वीन रजा जरिथ सोफिया का मिलिट्री सैल्यूट के सात स्वागत हुआ। इसके बाद सुल्तान को कुरान की एक कॉपी दी गई, जिसे उन्होंने चूमा। फिर इस्कंदर महाराज की ताकत का प्रतीक सोने का खंजर दिया गया। प्रधानमंत्री अनवर ने सुल्तान के प्रति वफादारी की कसम खाई। इसके बाद इस्कंदर को देश का नया महाराज घोषित किया गया। ताजपोशी के बाद उन्होंने संविधान का पालन करने, इस्लाम को आगे बढ़ाने और मलेशिया में शांति सुनिश्चित करने की शपत ली। समारोह के अंत में 3 बार ‘लॉन्ग लिव द किंग’ के नारे लगाए गए। 31 जनवरी को सुल्तान इस्कंदर के अगला महाराज बनने की घोषणा हुई थी
इससे पहले 31 जनवरी को इस्कंदर को मलेशिया का नया राजा घोषित किया गया था। सुल्तान इस्कंदर मोटरसाइकिल पर पूरे देश की यात्रा करने के लिए जाने जाते हैं। इसके जरिए वे लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानते हैं। 65 साल के इस्कंदर जोहोर के शाही परिवार से आते हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके पास 47.33 लाख करोड़ की संपत्ति है। सुल्तान इब्राहिम इस्कंदर के सबसे बड़े बेटे और मलेशिया के क्राउन प्रिंस टुंकू इस्माइल भारतीय सेना में कैप्टन भी रह चुके हैं। सुल्तान के पास कई प्राइवेट जेट, प्राइवेट आर्मी
इसके अलावा सुल्तान के पास 300 लग्जरी कारें हैं, जिनमें से एक उन्हें एडॉल्फ हिटलर ने तोहफे में दी थी। सुल्तान के पास गोल्ड-ब्लू रंग के बोइंग 737 समेत कई प्राइवेट जेट भी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुल्तान इस्कंदर के परिवार के पास एक प्राइवेट आर्मी भी है। मलेशिया के अलावा सिंगापुर में भी सुल्तान की 4 अरब डॉलर की एक जमीन, एक टायर्सॉल पार्क और बोटैनिकल गार्डन के पास भी जमीन है। सुल्तान इब्राहिम के पास रियल एस्टेट और खनन से लेकर टेलिकम्युनिकेशन और पाम तेल तक कई बिजनेस में हिस्सेदारी है। उनका आधिकारिक निवास इस्ताना बुकिट सिरीन है, जो उनकी बेशुमार दौलत का सबूत है। सुल्तान इस्कंदर के पास बाइक्स का भी एक बड़ा कलेक्शन है। 2007 में भारतीय सेना का नेतृत्व करने वाले पहले विदेशी बने क्राउन प्रिंस
सुल्तान इब्राहिम की पत्नी का नाम जरीथ सोफिया है। वह शाही परिवार से आती हैं। ऑक्सफोर्ड से पढ़ीं सोफिया पेशे से लेखिका हैं और बच्चों के लिए कई किताबें भी लिख चुकी हैं। सुल्तान और सोफिया के पांच बेटे और एक बेटी हैं। सुल्तान के सबसे बड़े बेटे और मलेशिया के क्राउन प्रिंस टुंकू इस्माइल भारतीय सेना में कैप्टन रह चुके हैं। सिंगापुर की न्यूज एजेंसी द स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 में टुंकू इस्माइल भारतीय सेना की एक यूनिट का नेतृत्व करने वाले पहले विदेशी बने थे। सुल्तान ने कहा- मैं सरकार की कठपुतली वाला राजा नहीं
दिसंबर 2023 में स्ट्रेट टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में सुल्तान ने कहा था- मैं सरकार की कठपुतली वाला राजा नहीं बनना चाहता। संसद में 222 सांसद हैं, लेकिन बाहर 3 करोड़ जनता है। मैं सांसदों के साथ नहीं बल्कि जनता के साथ हूं। मैं हमेशा सरकार का समर्थन करता रहूंगा, लेकिन अगर मुझे लगेगा कि कुछ गलत हो रहा है, तो उसका विरोध जरूर करूंगा। प्रमुख राजनीतिक नियुक्तियों के अलावा, मलेशिया के राजा मुस्लिम-बहुल देश में इस्लाम के आधिकारिक प्रमुख और इसके सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ भी होते हैं। मलेशिया में पिछले कुछ सालों से राजनीतिक अस्थिरता है। ऐसे में यहां राजशाही का प्रभाव बढ़ा है। मलेशिया में राजा का चुनाव कैसे होता है?
देश में हर 5 साल में राजा बदलता है। मलेशिया में 13 राज्य और 9 शाही परिवार हैं। इनके मुखिया 9 राज्यों के सुल्तान हैं, जो बारी-बारी से 5-5 साल के लिए राजा बनते हैं। मलेशिया में यूं तो राजा बनने का तरीका पहले से तय है। इसके बावजूद एक गुप्त मतदान होता है। इसमें बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। हालांकि उस बैलेट पेपर पर उस सुल्तान का नाम होता है, जिसकी राजा बनने की बारी होती है। हर सुल्तान को ये बताना जरूरी होता है कि क्या नामांकित व्यक्ति राजा बनने के लिए सही है? राजा बनने के लिए उम्मीदवार को बहुमत मिलना जरूरी होता है। जब वोटिंग के नतीजे घोषित हो जाते हैं तो बैलेट पेपर्स को सुल्तानों के सामने नष्ट कर दिया जाता है।