बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण बहाली के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को कटौती की है। कोर्ट के नए आदेश के मुताबिक सरकारी नौकरियों में आरक्षण को 56% से घटाकर 7 प्रतिशत किया जाएगा। इसमें से 5 प्रतिशत स्वतंत्रता सेनानियों और 2 प्रतिशत एथनिक माइनोरिटी, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगों को दिया जाएगा। बांकी 93% पर मेरिट के आधार पर चयन होगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के आरक्षण खत्म करने के 2018 को फैसले को पलटते हुए बहाली कर दी थी। जिसके बाद से ही बांग्लादेश में हिंसा का दौर शुरू हो गया था। इस पर काबू पाने के लिए सरकार ने पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया है। सरकार ने कर्फ्यू के साथ ही हिंसा को काबू करने के लिए सैना को तैनात किया हुआ है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने का आदेश दे दिया गया है। न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक हिंसा में अब तक 115 लोग मारे गए हैं। हिंसा के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना ने विदेश दौरा रद्द कर दिया है। वे आज स्पेन और ब्राजील के दौरे पर जाने वाली थीं। बांग्लादेश में बढ़ते तनाव के बीच अब तक 978 भारतीय स्टूडेंट्स अपने घर लौट आए हैं। ढाका यूनिवर्सिटी को अगले आदेश तक के लिए बंद दिया है। छात्रों को बुधवार तक हॉस्टल खाली करने को कहा गया है। बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर प्रदर्शन की वजहबांग्लादेश 1971 में आजाद हुआ था। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक इसी साल से वहां पर 80 फीसदी कोटा सिस्टम लागू हुआ। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को नौकरी में 30%, पिछड़े जिलों के लिए 40%, महिलाओं के लिए 10% आरक्षण दिया गया। सामान्य छात्रों के लिए सिर्फ 20% सीटें रखी गईं। 1976 में पिछड़े जिलों के लिए आरक्षण को 20% कर दिया गया। इससे सामान्य छात्रों को 40% सीटें हो गईं। 1985 में पिछड़े जिलों का आरक्षण और घटा कर 10% कर दिया गया और अल्पसंख्यकों के लिए 5% कोटा जोड़ा गया। इससे सामान्य छात्रों के लिए 45% सीटें हो गईं। शुरू में स्वतंत्रता सेनानियों के बेटे-बेटियों को ही आरक्षण मिलता था लेकिन 2009 से इसमें पोते-पोतियों को भी जोड़ दिया गया। 2012 विकलांग छात्रों के लिए भी 1% कोटा जोड़ दिया गया। इससे कुल कोटा 56% हो गया। 6 साल पहले सरकार ने कोटा सिस्टम बंद किया थासाल 2018 में 4 महीने तक छात्रों के प्रदर्शन के बाद हसीना सरकार ने कोटा सिस्टम खत्म कर दिया था, लेकिन बीते महीने 5 जून को हाई कोर्ट ने सरकार को फिर से आरक्षण देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि 2018 से पहले जैसे आरक्षण मिलता था, उसे फिर से उसी तरह लागू किया जाए। शेख हसीना सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अपील के बाद हाईकोर्ट के फैसले को फिलहाल निलंबित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में 7 अगस्त को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई होगी।