जीवन में रंग न होते तो ये कितना बेरंग होता। रंग हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। वे न केवल हमारे आस-पास की सुंदरता को बढ़ाते हैं, बल्कि हमारी भावनाओं और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालते हैं। बचपन में तो हम सबने ड्रॉइंग बुक में खूब रंग भरे होंगे, लेकिन आप में से कितने लोग हैं, जो आज भी ऐसा करते हैं। शायद बहुत ही कम। आप सोच रहे होंगे कि ये तो बच्चों के करने की चीज है। लेकिन ऐसा नहीं है। कलरिंग एक कला है और इसे करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। इसका अर्थ है खुशी, ध्यान, एकाग्रता और धैर्य। उम्र कोई भी हो, इसका अर्थ नहीं बदलता। ये बात अलग है कि अब धीरे-धीरे वयस्कों के बीच एक मेडिटेशन फॉर्म के रूप में एडल्ट कलरिंग काफी पॉपुलर हो रही है। यही मानना है टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी का, जिन्होंने अपने पति की एकाग्रता बढ़ाने के लिए उन्हें किताबों में रंग भरने की सलाह दी। दिव्यांका त्रिपाठी के पति विवेक दहिया ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि “दिव्यांका ने मेरे लिए रंग भरने वाली किताबें खरीदी हैं। यह इसलिए क्योंकि मैं एक जगह स्थिर नहीं बैठ सकता। मुझे ध्यान और फोकस करने की जरूरत है। इसलिए मैं हर दिन शाम 5 से 6 बजे तक कलरिंग बुक में रंग भरता हूं। मेरी बीवी ने डंडा मारकर मुझे रंग भरवाना शुरू करवाया है। यह एक तरह से ध्यान लगाने जैसा है।” तो आज ‘रिलेशनशिप’ कॉलम में बात करेंगे एडल्ट कलरिंग और उससे जुड़े फायदों की। किताबों में रंग भरना एडल्ट्स के लिए एक आसान और बेहतरीन क्रिएटिव एक्टिविटी है। साथ ही जानेंगे ‘कलर मेडिटेशन’ के बारे में, जो एकाग्रता और इंटेलिजेंस को बढ़ाने का अच्छा माध्यम है। एडल्ट कलरिंग क्या होता है एडल्ट्स द्वारा किताब में रंग भरने को एडल्ट कलरिंग कहते हैं। इसे सेल्फ-केयर और रिलैक्स करने के तरीके के रूप में जाना जाता है। आजकल ये माइंड को रिलैक्स करने का अच्छा माध्यम बन गया है। शायद आपने रंग भरने वाली किताबें भी देखी होंगी, जिनमें मंडाला आर्ट और डिटेल्ड ड्रॉइंग होती है। जिसमें बहुत आराम से और धैर्य के साथ ड्रॉइंग के हर हिस्से में रंग भरा जाता है। जॉन डायमंड ने इस विषय पर एक किताब लिखी है, “डायमंड कलर मेडिटेशन: कलर पाथवे टू सोल”। इस किताब में उन्होंने कलरिंग को एक चिकित्सकीय ध्यान के रूप में बताया है। यह रिलैक्सेशन, व्यक्तिगत विकास के लिए डिजाइन किया गया है। जैसे ही आप प्रत्येक रंग की शक्ति का पता लगाएंगे, आप अपने मन, शरीर और आत्मा पर इसके हीलिंग इफैक्ट देख पाएंगे। रंग भरने को कलर मेडिटेशन भी कहते हैं… कलर मेडिटेशन। यह सुनने में जितना अच्छा लग रहा है, उतना ही खास भी है। कलर मेडिटेशन यानी कि सुकून से बैठकर और एंजॉय करते हुए किताबों में रंग भरना। जब हम इस एक्टिविटी को कर रहे होते हैं, तब हम शांति के साथ-साथ खुशी भी महसूस करते हैं। इसे पूरा करने के बाद हमें वैसी ही खुशी महसूस होती है, जैसी हमें कोई कॉम्पटीशन जीतने के बाद होती है। इसी को कलर मेडिटेशन कहते हैं। यह व्यक्ति को साइकोलॉजिकल फायदा देती है। यदि आपको रंग भरना और ड्रॉइंग-स्केचिंग करना पसंद है तो आपको यह जानकर ज्यादा आश्चर्य नहीं होगा कि रंग भरना कुछ वक्त सुकून से समय बिताने से कहीं ज्यादा है। इसके कई फायदे हैं। नीचे ग्राफिक में देखें- रंग भरते वक्त हमारे दिमाग के दाएं और बाएं दोनों साइड्स एक्टिव होते हैं। यह हमारा फोकस बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा, क्रिएटिव थिंकिंग और फैसला लेना यानी डिसीजन मेकिंग एक साथ होती है, जिससे हमारे दिमाग का विकास होता है। जब आप रंग भरते हैं तो आपका पूरा फोकस उस पर ही होता है। यही फोकस आपके मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाता है। रंग भरने की गतिविधि आपके मस्तिष्क को आराम देने और मन को शांत करने का एक अच्छा तरीका है। जब आप रंग भर रहे होते हैं तो आप अपने सामने मौजूद सरल गतिविधि पर ध्यान लगाते हैं। इससे आपका दिमाग शांत होने लगता है और अन्य विचार आपके दिमाग में दखल नहीं दे पाते हैं। रंग भरने से आपके मस्तिष्क की कार्य करने की क्षमता भी बेहतर हो सकती है। जब आप चुनते हैं कि कौन से रंगों का उपयोग करना है तो आपकी रचनात्मकता बढ़ती है। एडल्ट कलरिंग आपके ध्यान के स्तर को भी बेहतर बना सकती है। रंग भरने से आपके अंदर धैर्य आता है क्योंकि यह कोई जल्दबाजी का काम नहीं है कि बस कलर भर दिया और हो गया। इसमें हमें कई रंगों का चयन करना होता है, किसके साथ कौन-सा रंग अच्छा लगेगा, रंग कितना गहरा होना चाहिए, यह भी ध्यान रखना होता है कि रंग कहीं बाहर न निकले। इतनी सारी चीजों को एक साथ एक तारतम्य में जोड़कर देखने के लिए बहुत धैर्य की जरूरत होती है। कलर मेडिटेशन से हमारा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। कलर मेडिटेशन स्ट्रेस कम करने में भी मदद करता है और आपको शांति देता है। कलर भरते वक्त दिमाग का पूरा फोकस दूसरी चिंताओं से दूर सिर्फ रंग भरने पर ही होता है। इससे मन को शांति मिलती है। अध्ययनों से पता चला है कि रंग भरने से लोगों में चिंता कम हो सकती है। रिसर्चगेट की स्टडी कहती है कि 20 मिनट या उससे ज्यादा समय तक रंग भरना ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने और स्ट्रेस को कम करने का एक प्रभावी तरीका है। किताबों में रंग भरना है एक माइंडफुल प्रैक्टिस “माइंडफुलनेस” सुनते ही आपको लगता होगा कि आसन बिछाकर ध्यान की मुद्रा में मेडिटेशन करना। लेकिन ये बस इतना ही नहीं है। जेन मास्टर तिक न्यात हन्ह अपनी किताब ‘हैप्पीनेस’ में लिखते हैं कि हम कहीं भी माइंडफुलनेस को अपना सकते हैं, जैसे चलते, उठते-बैठते, खेलते, पढ़ते, सांस लेते, जीते। जीवन का हर क्षण माइंडफुलनेस का रियाज है। बस जरूरत है तो जागरुक रहने की। अगर हम चाहें तो कला और रंग भरने जैसी एक्टिविटी भी माइंडफुलनेस को दृढ़ और गहरा बना सकती है। यही तो है माइंडफुल प्रैक्टिस।