बुधवार, 31 जुलाई को सावन महीने की पहली एकादशी है। इसका नाम कामिका है। सावन, एकादशी और बुधवार के योग में शिव जी, विष्णु जी, गणेश जी और बुध ग्रह की पूजा एक साथ करने का शुभ योग बना है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, कामिका एकादशी पर किए गए व्रत-उपवास और पूजन से भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो सकती हैं। इस एकादशी पर पूजा-पाठ के साथ ही ध्यान और मंत्र जप भी करना चाहिए। दीपक जलाकर उसकी ज्योति को देखते हुए ध्यान किया जा सकता है। भगवान विष्णु के लिए किया जाता है एकादशी व्रत एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास करने की परंपरा है। इस तिथि के स्वामी विष्णु जी ही माने गए हैं। सावन महीने की इस एकादशी पर प्रथम पूज्य गणेश जी, विष्णु जी के साथ ही शिव जी की भी विशेष पूजा जरूर करें। ज्योतिष में बुधवार का कारक ग्रह बुध ग्रह माना जाता है। इसलिए बुधवार को बुध ग्रह के लिए हरे मूंग का दान करना चाहिए। बुध के मंत्र ऊँ बुधाय नम: का जप 108 बार करें। ऐसे कर सकते हैं विष्णु जी की पूजा भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। अभिषेक करने के लिए दूध में केसर मिलाएं और इस दूध को शंख में भरकर भगवान को स्नान कराएं। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भगवान विष्णु को पीले चमकीले वस्त्र चढ़ाएं। देवी लक्ष्मी को लाल चुनरी ओढ़ाएं। कुमकुम का तिलक लगाएं। लाल चूड़ी, सिंदूर, लाल फूल अर्पित करें। देवी-देवता का फूलों से श्रृंगार करें। दूध से बनी मिठाई का भोग तुलसी के पत्तों के साथ लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। एकादशी पर भगवान श्रीकृष्ण के साथ ही गौमाता की भी पूजा करनी चाहिए। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। कामिका एकादशी व्रत से जुड़ी मान्यताएं माना जाता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है या किसी अन्य ग्रह का दोष है तो उन्हें ये व्रत जरूर करना चाहिए। एकादशी व्रत करने वाले भक्तों को अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन फलाहार करें और दूध का सेवन करें। विष्णु जी के सामने गाय के दूध से बने घी का दीपक जलाना चाहिए। एक कथा के अनुसार पुराने समय में एक क्षत्रिय ने ये व्रत किया था तो उसे पापों से मुक्ति मिल गई थी और सपने में भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए थे।