असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार (4 अगस्त) को तीन बड़े ऐलान किए। पहला यह कि जल्द ही असम में सरकारी नौकरी उन्हीं लोगों को मिलेगी, जो असम में ही पैदा हुए हैं। दूसरा, लव-जिहाद के मामले में दोषी को उम्रकैद की सजा दी जाएगी। तीसरा, असम सरकार ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जमीन की बिक्री के संबंध में भी फैसला लिया है। हालांकि सरकार इसे रोक नहीं सकती, लेकिन खरीद-बिक्री से पहले मुख्यमंत्री की सहमति लेना जरूरी कर दिया गया है। सरमा ने ये बातें BJP की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में कहीं। सरकारी नौकरियों के लिए नई डोमिसाइल पॉलिसी पेश करेगी सरकार
सरमा ने बैठक में कहा कि जल्द ही एक नई डोमिसाइल पॉलिसी पेश की जाएगी, जिसके तहत केवल असम में जन्मे लोग ही राज्य सरकार की नौकरियों के लिए पात्र होंगे। चुनाव में किए वादे के अनुसार, एक लाख सरकारी नौकरियों में असम के लोगों को प्राथमिकता दी गई है। पूरी लिस्ट पब्लिश होने पर यह स्पष्ट हो जाएगा। CM ने जुलाई में मुस्लिम मैरिज के लिए नया एक्ट लाने की बात कही थी
मुख्यमंत्री सरमा ने 18 जुलाई को घोषणा की थी कि मंत्रिमंडल ने मुस्लिम मैरिज एक्ट 1935 को रद्द करते हुए नए कानून बनाने को मंजूरी दे दी है। असम मंत्रिमंडल ने इसी साल फरवरी में मुस्लिम मैरिज एक्ट को रद्द करने की मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा था कि नए कानून से शादी और तलाक के नियमों में समानता आएगी। साथ ही बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर भी रोक लगेगी। सरमा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट करके जानकारी दी थी कि हम बाल विवाह के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने जा रहे हैं, जो बेटियों और बहनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। मौजूदा एक्ट लड़कियों को 18 और लड़कों को 21 साल की उम्र से पहले शादी करने की अनुमति देता है। मंत्रिमंडल को निर्देश दिए गए हैं कि असम में मुस्लिम मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए एक कानून लाया जाए, जिस पर विधानसभा के अगले सत्र में विचार किया जाएगा। नए मुस्लिम मैरिज एक्ट में शादी-तलाक का रजिस्ट्रेशन कमिश्नर-रजिस्ट्रार करेंगे
मुस्लिम मैरिज एक्ट 1935 के रद्द होने के बाद मुस्लिम विवाह या तलाक का रजिस्ट्रेशन स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के माध्यम से हो सकेगा। इसके अलावा 1935 से विवाह की उम्र में मिलने वाली छूट भी खत्म कर दी जाएगाी। मुस्लिम विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार द्वारा किया जाएगा। इससे पहले जो काजी डिवोर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत काम कर रहे थे, उन्हें हटा दिया जाएगा और इसके बदले उन सभी को एकमुश्त दो-दो लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। हिमंत बोले- असम में मुस्लिम आबादी 10 साल में 30% बढ़ रही
जब असम सरकार ने मुस्लिम मैरिज एक्ट को रद्द करने वाली बात कही थी, तब राज्यमंत्री मल्ला बरुआ ने कहा कि हम समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ रहे हैं। इसी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। इसके बाद 19 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने कहा था कि राज्य में मुस्लिम आबादी हर 10 साल में 30% बढ़ रही है, जबकि हिंदू आबादी हर 10 साल में करीब 16 फीसदी ही बढ़ रही है।। ऐसे में साल 2041 तक असम मुस्लिम बहुल राज्य बन जाएगा। यह हकीकत है और इसे कोई नहीं रोक सकता। ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड UCC बिल पास करने वाला पहला राज्य, CM धामी बोले- PM मोदी के एक भारत-श्रेष्ठ भारत का विजन पूरा होगा उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC बिल ध्वनि मत से पास हो गया। इसी के साथ UCC बिल पास करने वाला उत्तराखंड आजाद भारत का पहला राज्य बन गया है। सीएम पुष्कर धामी ने 6 फरवरी को विधानसभा में यह बिल पेश किया था। बिल पास होने के बाद अब इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की मुहर लगते ही यह बिल कानून बन जाएगा और सभी को समान अधिकार मिलेंगे। भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में UCC लाने का वादा किया था। पूरी खबर पढ़ें… भास्कर एक्सप्लेनर- यूनिफॉर्म सिविल कोड से उत्तराखंड में क्या बदला, लिव इन और बहुविवाह के लिए कानून; मुस्लिम क्यों कर रहे विरोध यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद ही उत्तराखंड में लिव इन रिलेशन में रह रहे लोगों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो गया। ऐसा नहीं करने पर 6 महीने तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी भी गैर-कानूनी मानी जाएगी। यहां जानें यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े सात बड़े सवालों के जवाब…
सरमा ने बैठक में कहा कि जल्द ही एक नई डोमिसाइल पॉलिसी पेश की जाएगी, जिसके तहत केवल असम में जन्मे लोग ही राज्य सरकार की नौकरियों के लिए पात्र होंगे। चुनाव में किए वादे के अनुसार, एक लाख सरकारी नौकरियों में असम के लोगों को प्राथमिकता दी गई है। पूरी लिस्ट पब्लिश होने पर यह स्पष्ट हो जाएगा। CM ने जुलाई में मुस्लिम मैरिज के लिए नया एक्ट लाने की बात कही थी
मुख्यमंत्री सरमा ने 18 जुलाई को घोषणा की थी कि मंत्रिमंडल ने मुस्लिम मैरिज एक्ट 1935 को रद्द करते हुए नए कानून बनाने को मंजूरी दे दी है। असम मंत्रिमंडल ने इसी साल फरवरी में मुस्लिम मैरिज एक्ट को रद्द करने की मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा था कि नए कानून से शादी और तलाक के नियमों में समानता आएगी। साथ ही बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर भी रोक लगेगी। सरमा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट करके जानकारी दी थी कि हम बाल विवाह के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने जा रहे हैं, जो बेटियों और बहनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। मौजूदा एक्ट लड़कियों को 18 और लड़कों को 21 साल की उम्र से पहले शादी करने की अनुमति देता है। मंत्रिमंडल को निर्देश दिए गए हैं कि असम में मुस्लिम मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए एक कानून लाया जाए, जिस पर विधानसभा के अगले सत्र में विचार किया जाएगा। नए मुस्लिम मैरिज एक्ट में शादी-तलाक का रजिस्ट्रेशन कमिश्नर-रजिस्ट्रार करेंगे
मुस्लिम मैरिज एक्ट 1935 के रद्द होने के बाद मुस्लिम विवाह या तलाक का रजिस्ट्रेशन स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के माध्यम से हो सकेगा। इसके अलावा 1935 से विवाह की उम्र में मिलने वाली छूट भी खत्म कर दी जाएगाी। मुस्लिम विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार द्वारा किया जाएगा। इससे पहले जो काजी डिवोर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत काम कर रहे थे, उन्हें हटा दिया जाएगा और इसके बदले उन सभी को एकमुश्त दो-दो लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। हिमंत बोले- असम में मुस्लिम आबादी 10 साल में 30% बढ़ रही
जब असम सरकार ने मुस्लिम मैरिज एक्ट को रद्द करने वाली बात कही थी, तब राज्यमंत्री मल्ला बरुआ ने कहा कि हम समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ रहे हैं। इसी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। इसके बाद 19 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने कहा था कि राज्य में मुस्लिम आबादी हर 10 साल में 30% बढ़ रही है, जबकि हिंदू आबादी हर 10 साल में करीब 16 फीसदी ही बढ़ रही है।। ऐसे में साल 2041 तक असम मुस्लिम बहुल राज्य बन जाएगा। यह हकीकत है और इसे कोई नहीं रोक सकता। ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड UCC बिल पास करने वाला पहला राज्य, CM धामी बोले- PM मोदी के एक भारत-श्रेष्ठ भारत का विजन पूरा होगा उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC बिल ध्वनि मत से पास हो गया। इसी के साथ UCC बिल पास करने वाला उत्तराखंड आजाद भारत का पहला राज्य बन गया है। सीएम पुष्कर धामी ने 6 फरवरी को विधानसभा में यह बिल पेश किया था। बिल पास होने के बाद अब इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की मुहर लगते ही यह बिल कानून बन जाएगा और सभी को समान अधिकार मिलेंगे। भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में UCC लाने का वादा किया था। पूरी खबर पढ़ें… भास्कर एक्सप्लेनर- यूनिफॉर्म सिविल कोड से उत्तराखंड में क्या बदला, लिव इन और बहुविवाह के लिए कानून; मुस्लिम क्यों कर रहे विरोध यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद ही उत्तराखंड में लिव इन रिलेशन में रह रहे लोगों को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो गया। ऐसा नहीं करने पर 6 महीने तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी भी गैर-कानूनी मानी जाएगी। यहां जानें यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े सात बड़े सवालों के जवाब…